Bihar Teacher News: नवादा में प्रधानाध्यापक निलंबित, शिक्षिका से विवाद के बाद शिक्षा विभाग की कार्रवाई पर उठ रहे ये सवाल
Bihar Teacher News: एचएम ने विद्यालय में पदस्थापित शिक्षिका अलका कुमारी की अनुपस्थिति विवरणी जमा नहीं की। इस कार्रवाई के बाद प्रधानाध्यापक ने इसे एकतरफा कार्रवाई करार देते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
Nawada: नरहट प्रखंड स्थित प्राथमिक विद्यालय बारा खुर्द में अनुपस्थिति विवरणी को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कार्रवाई की दहलीज तक पहुंच गया है। विद्यालय के प्रधानाध्यापक रवींद्र कुमार को निलंबित कर दिया गया है। आरोप है कि उन्होंने विद्यालय में पदस्थापित शिक्षिका अलका कुमारी की अनुपस्थिति विवरणी जमा नहीं की। इस कार्रवाई के बाद प्रधानाध्यापक ने इसे एकतरफा कार्रवाई करार देते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
प्रधानाध्यापक रवींद्र कुमार के मुताबिक, शिक्षिका अलका कुमारी विद्यालय में नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहती थीं। उनका दावा है कि सरकारी नियमों और विद्यालयी व्यवस्था के तहत उन्होंने शिक्षिका की अनुपस्थिति विवरणी जमा करने से इनकार किया। उनका कहना है कि यदि अनुपस्थित रहने के बावजूद गलत विवरणी तैयार कर दी जाती, तो यह नियमों की अनदेखी होती। इसी मुद्दे ने धीरे-धीरे विवाद की शक्ल अख्तियार कर ली।
प्रधानाध्यापक का आरोप है कि अनुपस्थिति विवरणी को लेकर शिक्षिका उनसे नाराज हो गईं और इसके बाद उनके खिलाफ कार्रवाई का रास्ता तैयार हुआ। रवींद्र कुमार ने यह भी आरोप लगाया है कि शिक्षिका के पति नवादा स्थित आरडीडीई कार्यालय में लिपिक के पद पर कार्यरत हैं और उन्होंने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई कराई। हालांकि, प्रभाव के इस्तेमाल और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। लिहाजा इन दावों को फिलहाल प्रधानाध्यापक का पक्ष ही माना जा रहा है।मामले में डीपीओ स्थापना की ओर से प्रधानाध्यापक से स्पष्टीकरण भी मांगा गया था। रवींद्र कुमार का दावा है कि उन्होंने निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना जवाब विभाग के समक्ष दाखिल कर दिया था। इसके बावजूद निलंबन की कार्रवाई कर दी गई। उनका सवाल है कि जब उन्होंने विभागीय नोटिस का जवाब दे दिया था, तो उनके पक्ष को पूरी तरह परखे बिना कार्रवाई क्यों की गई?
निलंबन के बाद प्रधानाध्यापक ने जिला शिक्षा पदाधिकारी और नवादा के जिलाधिकारी को आवेदन देकर पूरे मामले की जांच की गुहार लगाई है। उन्होंने आरोपों की निष्पक्ष पड़ताल, जिम्मेदारी तय करने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के लिए मजबूर होंगे।फिलहाल इस पूरे प्रकरण में दो पक्षों के दावे सामने हैं। एक ओर शिक्षा विभाग की कार्रवाई है, तो दूसरी ओर प्रधानाध्यापक इसे नियमों का पालन करने की कीमत और कथित प्रभाव का नतीजा बता रहे हैं। अब निगाहें शिक्षा विभाग के आधिकारिक पक्ष और जांच के निष्कर्ष पर टिकी हैं। जांच के बाद ही साफ होगा कि अनुपस्थिति विवरणी का विवाद वास्तव में प्रशासनिक लापरवाही का मामला था या फिर इसके पीछे किसी तरह का दबाव और रसूख काम कर रहा था।
रिपोर्ट- अमन कुमार