Bihar Crime: सांसद बनकर डीसीएलआर को धमकी, सरकारी कार्रवाई रोकने का बनाया गया दबाव, जांच में हुआ बड़का खुलासा

Bihar Crime: सांसद विवेक ठाकुर के नाम का कथित तौर पर इस्तेमाल कर भूमि सुधार उपसमाहर्ता पश्चिमी स्नेहा कुमारी को धमकी देने और सरकारी कार्रवाई प्रभावित करने के मामले में साइबर थाना पुलिस ने जांच पूरी कर ली है।...

Nawada Threats issued to the DCLR after becoming an MP
सांसद बनकर डीसीएलआर को धमकी- फोटो : reporter

Bihar Crime: नवादा में सांसद विवेक ठाकुर के नाम का कथित तौर पर इस्तेमाल कर भूमि सुधार उपसमाहर्ता (डीसीएलआर) पश्चिमी स्नेहा कुमारी को धमकी देने और सरकारी कार्रवाई प्रभावित करने के मामले में साइबर थाना पुलिस ने जांच पूरी कर ली है। पुलिस ने आरोपित शशिभूषण सिंह उर्फ मिंटू सिंह के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र यानी चार्जशीट दाखिल कर दी है। पुलिस जांच के अनुसार, मामले में लगाए गए आरोपों को प्रथम दृष्टया सत्य पाया गया है।पुलिस के मुताबिक, शशिभूषण सिंह मूल रूप से वैशाली जिले के भगवानपुर थाना क्षेत्र के करहरी गांव का रहने वाला है। वर्तमान में वह सदर थाना क्षेत्र के खबड़ा स्थित नवल किशोर नगर में रह रहा था। मामले में डीसीएलआर पश्चिमी स्नेहा कुमारी ने 20 अप्रैल 2026 को साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसके बाद पुलिस ने कॉल डिटेल, तकनीकी साक्ष्य और अन्य उपलब्ध तथ्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई।

प्राथमिकी के अनुसार, 11 अप्रैल को दोपहर करीब 3 बजकर 31 मिनट पर डीसीएलआर के सरकारी मोबाइल नंबर पर दो बार कॉल आई। इसके बाद उनके निजी मोबाइल नंबर पर भी एक कॉल की गई। आरोप है कि कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को नवादा का सांसद विवेक ठाकुर बताया।कॉल के दौरान मड़वन के राजस्व कर्मचारी सन्नी कुमार के खिलाफ जिलाधिकारी से कार्रवाई की अनुशंसा रोकने के लिए दबाव बनाए जाने का आरोप है। इतना ही नहीं, शिकायत नहीं मानने पर विजिलेंस में शिकायत पत्र भेजने की धमकी दिए जाने की बात भी प्राथमिकी में कही गई है। कथित फोन कॉल के बाद डीसीएलआर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए इसकी जानकारी की पुष्टि करने का निर्णय लिव्यवसायी से 5.21 लाख की साइबर ठगी,टीएमटी सरिया डीलरशिप का झांसा देकर ठगा गया

नवादा जिले में साइबर ठगी का एक नया मामला सामने आया है। कौआकोल थाना क्षेत्र के खैरा गांव निवासी सीमेंट और छड़ व्यवसायी अनिल कुमार से टीएमटी सरिया की डीलरशिप दिलाने के नाम पर 5 लाख 21 हजार रुपये की ठगी की गई है।पीड़ित व्यवसायी के अनुसार, उन्हें एक अज्ञात नंबर से फोन आया था। फोन करने वाले व्यक्ति ने खुद को एक टीएमटी सरिया कंपनी का प्रतिनिधि बताया और अनिल कुमार को कंपनी की डीलरशिप लेने का प्रस्ताव दिया। आरोपी ने झांसा दिया कि डीलरशिप मिलने पर बाजार से काफी सस्ते दर पर सरिया उपलब्ध कराया जाएगा।व्यवसायी ने इस प्रस्ताव में रुचि दिखाई। इसके बाद साइबर ठग ने डीलरशिप प्रक्रिया पूरी करने के बहाने व्यवसायी से कंपनी के खाते में 5 लाख 21 हजार रुपये जमा करने को कहा। ठग ने भरोसा दिलाया कि राशि जमा होने के बाद सरिया की खेप उनके प्रतिष्ठान तक पहुंचा दी जाएगी। व्यवसायी ने विश्वास कर बताई गई राशि बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी।

रकम ट्रांसफर होने के बाद जब व्यवसायी ने आरोपी से संपर्क करने का प्रयास किया, तो उसका मोबाइल बंद मिला। कई बार कोशिश करने पर भी संपर्क नहीं हो सका। इसके बाद व्यवसायी ने कंपनी के दूसरे अधिकारी से संपर्क कर जानकारी ली, जहां उन्हें पता चला कि उनके नाम पर कोई भुगतान प्राप्त नहीं हुआ है और न ही डीलरशिप से संबंधित कोई प्रक्रिया शुरू हुई है।अनिल कुमार को तब अपने साथ हुई ठगी का एहसास हुआ। उन्होंने इस मामले में साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और ठगी में शामिल साइबर अपराधियों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के प्रयास में जुटी है।या।

17 अप्रैल को डीसीएलआर स्नेहा कुमारी ने स्वयं सांसद विवेक ठाकुर से उनके मोबाइल नंबर पर संपर्क किया और कथित कॉल के बारे में जानकारी ली। पुलिस के अनुसार, सांसद ने ऐसी किसी भी कॉल से साफ तौर पर इनकार किया। इसके बाद डीसीएलआर को आशंका हुई कि किसी व्यक्ति ने सांसद की पहचान का कथित तौर पर इस्तेमाल कर सरकारी अधिकारी पर दबाव बनाने और प्रशासनिक कार्रवाई को प्रभावित करने का प्रयास किया है।इसके बाद 20 अप्रैल को साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई। पुलिस ने जांच के दौरान कॉल रिकॉर्ड समेत विभिन्न तकनीकी साक्ष्यों को खंगाला। जांच में शशिभूषण सिंह उर्फ मिंटू सिंह की कथित भूमिका सामने आई। पुलिस ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उसे मामले में आरोपित बनाया और जांच पूरी करने के बाद न्यायालय में चार्जशीट दाखिल कर दी।

मामले में पुलिस की कार्रवाई के बाद अब न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। चार्जशीट में पुलिस ने जांच के दौरान सामने आए साक्ष्यों और आरोपों का उल्लेख किया है। हालांकि, न्यायालय में आरोप साबित होना अभी बाकी है और अंतिम फैसला अदालत की न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।पूरे घटनाक्रम ने सरकारी अधिकारियों को फोन कर प्रभाव डालने और किसी जनप्रतिनिधि की पहचान का कथित दुरुपयोग करने को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अब इस मामले में अदालत की आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।

रिपोर्ट- अमन कुमार