नवादा में PM की अपील बेअसर: सांसद-विधायक बंद गाड़ियों में ले रहे AC का मजा, ईंधन संरक्षण की उड़ी धज्जियां

वैश्विक ऊर्जा संकट और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को लेकर पीएम मोदी की 'ईंधन संरक्षण' और एयर कंडीशनर के सीमित उपयोग की अपील का नवादा में कोई असर नहीं दिख रहा है।जिले के सांसद, विधायक और रसूखदार अधिकारी इस आह्वान को ठेंगा दिखाते नजर आ रहे...

नवादा में PM की अपील बेअसर: सांसद-विधायक बंद गाड़ियों में ले
नवादा में PM की अपील बेअसर,बंद गाड़ियों में ले रहे AC का मजा- फोटो : अमन सिन्हा

Nawada : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वैश्विक ऊर्जा संकट और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच 'ईंधन संरक्षण' और एयर कंडीशनर के सीमित उपयोग की अपील का नवादा में कोई असर नहीं दिख रहा है। एक तरफ केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री देश के विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए जनता से छोटी-छोटी बचत का आग्रह कर रहे हैं, वहीं नवादा जिले के सांसद, विधायक और रसूखदार अधिकारी इस आह्वान को ठेंगा दिखाते नजर आ रहे हैं। जिले के सरकारी दफ्तरों और सार्वजनिक कार्यक्रमों के बाहर नेताओं और अफसरों की लग्जरी गाड़ियाँ घंटों खड़े होकर चालू इंजन के साथ एसी की ठंडक बिखेर रही हैं।


जनता के सवालों पर असहज हुई 'सत्ता' 

नवादा की सड़कों और सरकारी परिसरों में जब आम नागरिकों ने घंटों से चालू खड़ी इन गाड़ियों को देखा, तो कई लोगों ने इस फिजूलखर्ची पर सवाल उठाए। प्रधानमंत्री के मिशन का हवाला देने पर ड्राइवरों और सुरक्षाकर्मियों ने चुप्पी साध ली, वहीं गाड़ी के भीतर बैठे माननीयों के चेहरे पर केवल असहज मुस्कान या टालमटोल भरा जवाब देखने को मिला। स्थानीय लोगों का कहना है कि जो नेता मंच से सादगी और राष्ट्रवाद का उपदेश देते हैं, वे खुद अपनी सुख-सुविधाओं में जरा भी कटौती करने को तैयार नहीं हैं।


ईंधन बचत के मिशन को लगा झटका 

गौरतलब है कि मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें अस्थिर हैं, जिसे देखते हुए केंद्र सरकार ने देशव्यापी 'ईंधन बचाओ' अभियान पर जोर दिया है। प्रधानमंत्री ने स्वयं जनता से अपील की थी कि अनावश्यक रूप से गाड़ियों का इंजन चालू न रखें और एसी का उपयोग कम करें ताकि देश के संसाधनों पर बोझ कम हो सके। लेकिन नवादा में सत्ताधारी दल के नेताओं और प्रशासनिक अमले की इस लापरवाही ने सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच के बड़े अंतर को उजागर कर दिया है।


अधिकारियों की चुप्पी और संसाधनों की बर्बादी 

जिले के प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका भी इस मामले में सवालों के घेरे में है। जिले के कई प्रमुख विभागों के बाहर अफसरों की गाड़ियाँ घंटों पार्किंग में एसी चालू रखकर खड़ी रहती हैं, ताकि साहेब जब दफ्तर से निकलें तो उन्हें गाड़ी ठंडी मिले। यह न केवल ईंधन की बर्बादी है, बल्कि सरकारी खजाने पर भी अतिरिक्त बोझ है। जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं और नीति बनाने वाले ही नियमों को तोड़ने लगें, तो आम जनता से त्याग की उम्मीद करना बेमानी साबित हो रहा है।


सादगी के संदेश की हुई अनदेखी 

नवादा में इस विलासिता पूर्ण आचरण की अब चौतरफा आलोचना हो रही है। जागरूक नागरिकों का कहना है कि जब बिहार के कुछ मंत्रियों ने एक ही गाड़ी में सफर कर 'कार पूलिंग' की मिसाल पेश की है, तो नवादा के प्रतिनिधि ऐसी सादगी क्यों नहीं अपना सकते? वीआईपी कल्चर के प्रति यह मोह न केवल प्रधानमंत्री के ऊर्जा संरक्षण मिशन को कमजोर कर रहा है, बल्कि आम जनता के बीच भी एक नकारात्मक संदेश दे रहा है कि नियम केवल साधारण नागरिकों के लिए हैं, खास लोगों के लिए नहीं।


अमन सिन्हा की रिपोर्ट