Patna high court: सिर्फ अलग रहना नहीं, लंबे समय तक वैवाहिक संबंध से दूरी भी क्रूरता, पटना हाईकोर्ट ने तलाक के मामले में सुनाया अहम फैसला

Patna high court:पटना हाईकोर्ट ने तलाक के एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए फैमिली कोर्ट के आदेश को खारिज कर दिया है ...

 Patna high court

Patna high court:पटना हाईकोर्ट ने तलाक के एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए फैमिली कोर्ट के आदेश को खारिज कर दिया है और पीड़ित पत्नी को तलाक की मंजूरी दे दी है।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना किसी उचित कारण के अपनी पत्नी से लगातार 13 वर्षों तक अलग रहना और वैवाहिक संबंधों से दूर रहना अपने आप में मानसिक 'क्रूरता' का आधार है।  

   इस मामलें में बेगूसराय जिले की निवासी मोना कुमारी का विवाह 07 मई, 2007 को भारतीय वायुसेना के सेवानिवृत्त जवान सुनील कुमार से हुआ था। दंपति का एक बेटा भी है। पत्नी का आरोप था कि शादी के बाद से ही पति ने उसे साथ रखने में आनाकानी की, उसके चरित्र पर झूठे लांछन लगाए, गाली-गलौज किया और उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया।फरवरी, 2013 से पति ने उसे पूरी तरह बेघर कर दिया और उसके तथा बच्चे के भरण-पोषण की सुध तक नहीं ली।  

पीड़ित महिला ने तलाक के लिए लखीसराई फैमिली कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि, फैमिली कोर्ट ने तकनीकी कारणों और प्रताड़ना के ठोस सबूतों की कमी का हवाला देते हुए 15 जून, 2024 को पत्नी की याचिका खारिज कर दी थी। 

इसके खिलाफ पत्नी ने पटना हाईकोर्ट में अपील दायर की। हाइकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते पति को नोटिस जारी किया। इसके बाद भी वह हाजिर नहीं हुआ।इस मामलें की सुनवाई जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस राणा विक्रम सिंह की खंडपीठ में हुई। हाईकोर्ट में भी बार-बार नोटिस और समाचार पत्रों में विज्ञापन  के जरिए सूचना दिए जाने के बावजूद पति कोर्ट में उपस्थित नहीं हुआ।  

हाईकोर्ट ने पाया कि पति का कोर्ट में न आना और आरोपों का खंडन न करना, यह दर्शाता है कि उसे वैवाहिक रिश्ते में कोई दिलचस्पी नहीं है। दोनों 2013 से (लगभग 13 साल से) एक-दूसरे से अलग रह रहे हैं।भले ही शादी टूटने  को सीधे तौर पर कानूनन आधार न बनाया जा सके, लेकिन लगातार इतने लंबे समय तक पत्नी को वैवाहिक सुख से वंचित रखना मानसिक क्रूरता के बराबर है।  

पटना हाईकोर्ट ने लखीसराय फैमिली कोर्ट के फैसले को पूरी तरह रद्द करते हुए सोनी कुमारी को अपने पति से तलाक  की मंजूरी प्रदान कर दी। कोर्ट ने माना कि फैमिली कोर्ट ने सिर्फ कानूनी बारीकियों को देखा, जबकि लगातार 13 वर्षों तक रिश्ते से दूर रहना और पत्नी की उपेक्षा करना क्रूरता ही है।