Patna Police: 36 साल बाद टूटा पीरबहोर पैटर्न, पटना के चर्चित थाने में हिंदू थानेदार की एंट्री, सियासी गलियारों में तेज हुई चर्चा
Patna Police: राजधानी पटना के सबसे चर्चित और संवेदनशील थानों में शुमार पीरबहोर थाना एक बार फिर सुर्खियों में है।....
Patna Police: राजधानी पटना के सबसे चर्चित और संवेदनशील थानों में शुमार पीरबहोर थाना एक बार फिर सुर्खियों में है। वजह कोई आपराधिक वारदात नहीं, बल्कि थानेदारी की कुर्सी पर हुआ ऐसा बदलाव है जिसने पुलिस महकमे से लेकर सियासी गलियारों तक बहस छेड़ दी है। करीब 36 वर्षों बाद पीरबहोर थाने में एक हिंदू पुलिस पदाधिकारी को थानेदार की जिम्मेदारी सौंपी गई है। शास्त्रीनगर के सर्किल इंस्पेक्टर राज कुमार सिंह को नया थानाध्यक्ष बनाया गया है, जबकि सज्जाद गद्दी को हटाकर सर्किल इंस्पेक्टर के पद पर भेज दिया गया है।
पुलिस प्रशासन की नजर में यह एक सामान्य तबादला और पदस्थापन की प्रक्रिया हो सकती है, लेकिन पीरबहोर थाने के इतिहास को देखें तो यह बदलाव अपने आप में एक बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार वर्ष 1990 के बाद से इस थाने में लगातार मुस्लिम समुदाय के अधिकारियों की ही थानेदार के रूप में तैनाती होती रही है।
ऐतिहासिक रिकॉर्ड बताते हैं कि 23 मार्च 1990 को जेड अहमद पीरबहोर थाना के पहले मुस्लिम थानेदार बने थे। इसके बाद से लेकर अब तक एक के बाद एक मुस्लिम अधिकारियों ने इस थाना की कमान संभाली। उनसे पहले जी. कुमार इस थाने के अंतिम हिंदू थानेदार थे, जिनका कार्यकाल 30 नवंबर 1987 से 23 मार्च 1990 तक रहा था।इस प्रकार लगभग साढ़े तीन दशक बाद राज कुमार सिंह की तैनाती ने एक पुराने सिलसिले को विराम दे दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब बिहार की राजनीति में प्रशासनिक नियुक्तियों और सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर लगातार चर्चा हो रही है।
हालांकि पुलिस मुख्यालय की ओर से इस तबादले को पूरी तरह प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टिंग और ट्रांसफर सेवा आवश्यकता, कार्यक्षमता और प्रशासनिक जरूरतों के आधार पर किए जाते हैं, न कि किसी जाति या धर्म के आधार पर।
बता दें कि कांग्रेस शासनकाल में पीरबहोर थाना में विभिन्न समुदायों और जातियों के अधिकारियों की तैनाती होती रही थी। 1976 से 1990 के बीच एल.पी. तिवारी, आर.एल. सिंह, एल.एम. प्रसाद, एस.के. गुप्ता, आर.एस. सिंह और जी. कुमार जैसे कई हिंदू अधिकारी यहां थानेदार रहे।
अब राज कुमार सिंह की नियुक्ति के बाद यह मामला प्रशासनिक फैसले से आगे बढ़कर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बदलाव को लेकर सियासत किस दिशा में करवट लेती है और पुलिसिंग के स्तर पर इसका क्या असर दिखाई देता है।
ब्यूरो रिपोर्ट