India-Nepal Embankment: भारत–नेपाल सीमा पर गिरफ्तारी से बेनकाब हुआ घुसपैठ का खुफिया नेटवर्क! 3 बांग्लादेशी अरेस्ट
India-Nepal Embankment: भारत–नेपाल सीमा पर बांग्लादेशी नागरिकों की गिरफ्तारी से अवैध घुसपैठ और मानव तस्करी के सक्रिय नेटवर्क का खुलासा हुआ है।
India-Nepal Embankment: भारत–नेपाल सीमा क्षेत्र में तीन बांग्लादेशी नागरिकों की गिरफ्तारी ने एक बार फिर उस संगठित तंत्र की ओर ध्यान खींचा है, जो वर्षों से नेपाल को ट्रांजिट रूट बनाकर विदेशी नागरिकों को अवैध रूप से भारत में दाखिल कराता रहा है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह कोई अलग-थलग घटना नहीं, बल्कि एक बड़े और सुनियोजित नेटवर्क का हिस्सा है। यह नेटवर्क चुपचाप काम करता है और सीमा की भौगोलिक जटिलताओं का फायदा उठाकर सुरक्षा व्यवस्था को चकमा देता रहा है।
नेपाल बना अवैध प्रवेश का आसान रास्ता
जांच एजेंसियों के अनुसार नेपाल की अपेक्षाकृत सरल वीजा नीति इस पूरे नेटवर्क की सबसे मजबूत कड़ी है। बांग्लादेश समेत अन्य देशों के नागरिक पहले टूरिस्ट वीजा पर नेपाल पहुंचते हैं। इसके बाद सीमावर्ती भारतीय जिलों में सक्रिय एजेंट उन्हें बिना किसी वैध दस्तावेज के भारत में प्रवेश करा देते हैं। भारत–नेपाल सीमा खुली होने के कारण कई स्थानों पर औपचारिक जांच सीमित रहती है, जिसका फायदा यह गिरोह लंबे समय से उठा रहा है।
स्थानीय गाइड से लेकर बड़े एजेंट तक की चेन
गिरफ्तार किए गए सरफराज अंसारी को इस नेटवर्क की अहम कड़ी माना जा रहा है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि वह केवल एक स्थानीय गाइड नहीं, बल्कि सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय कई एजेंटों के संपर्क में था। ये लोग गांवों और जंगलों से होकर ऐसे रास्तों का इस्तेमाल करते हैं, जहां निगरानी कम होती है। इसके बदले विदेशी नागरिकों से मोटी रकम वसूली जाती है। नेटवर्क इतना संगठित है कि भारत में दाखिल होने के बाद भी इन लोगों की पूरी व्यवस्था पहले से तय रहती है।
बड़े शहरों तक पहुंचाने की पक्की व्यवस्था
सूत्रों के मुताबिक अवैध रूप से सीमा पार कराने के बाद इन विदेशी नागरिकों को पटना, दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों तक पहुंचाया जाता है। वहां उनके ठहरने, काम दिलाने और पहचान छिपाने तक की योजना बनाई जाती है। फर्जी दस्तावेज, अस्थायी ठिकाने और स्थानीय संपर्कों के जरिए इन्हें लंबे समय तक छिपाकर रखा जाता है, जिससे वे सामान्य नागरिकों की तरह रहने लगते हैं।
सीमा सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस गिरफ्तारी ने भारत–नेपाल सीमा की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारों का कहना है कि यदि नए साल को लेकर एसएसबी ने विशेष अलर्ट जारी नहीं किया होता, तो यह समूह भी बिना किसी परेशानी के सीमा पार कर जाता। इससे यह संकेत मिलता है कि सामान्य दिनों में यह नेटवर्क कितनी आसानी से सक्रिय रहता है और कितनी बार सुरक्षा एजेंसियों की नजर से बच निकलता है।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
भारत–नेपाल सीमा से पहले भी घुसपैठ, मानव तस्करी और फर्जी दस्तावेजों से जुड़े कई मामले सामने आ चुके हैं। इसके बावजूद नेटवर्क का पूरी तरह भंडाफोड़ न हो पाना प्रशासनिक चुनौतियों और सीमावर्ती इलाकों की जमीनी हकीकत को उजागर करता है।विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक नेटवर्क के सरगनाओं तक नहीं पहुंचा जाता, तब तक ऐसी घटनाएं रुकने वाली नहीं हैं।
एसएसबी और पुलिस की संयुक्त जांच तेज
फिलहाल एसएसबी और जिला पुलिस की संयुक्त टीम मामले की गहन जांच कर रही है। मोबाइल फोन डेटा, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, नेपाल में ठहरने के सबूत और भारत में मौजूद संपर्क सूत्रों की बारीकी से पड़ताल की जा रही है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं, कौन-कौन से रास्ते इस्तेमाल किए जाते हैं और यह तंत्र कितने समय से सक्रिय है।