Bihar Politics: बैनर से गायब मुखिया सम्राट चौधरी की तस्वीर, बिहार की सत्ता में अंदरूनी हलचल के संकेत? सियासी गलियारे में तेज हुई फुसफुसाहट

Bihar Politics: बिहार की सियासत एक बार फिर पोस्टर-पॉलिटिक्स के नए मोड़ पर पहुंच गई है।....

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बैनर से गायब हुए सीएम सम्राट चौधरी!- फोटो : reporter

Bihar Politics: बिहार की सियासत एक बार फिर पोस्टर-पॉलिटिक्स के नए मोड़ पर पहुंच गई है। जल संसाधन विभाग के तहत आयोजित हालिया सरकारी कार्यक्रमों में एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया है। कार्यक्रम स्थलों पर लगे बैनरों से बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की तस्वीर का नदारद होना अब सियासी बहस का केंद्र बन गया है।

दरअसल, उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने शनिवार को पटना में आयोजित कार्यक्रमों में जल संसाधन विभाग की चार महत्वपूर्ण योजनाओं का शुभारंभ किया। ये योजनाएं पटना, अरवल, जहानाबाद और गया जिलों के नागरिकों के लिए सिंचाई और आधारभूत ढांचे के विकास से जुड़ी बताई जा रही हैं। मंच से बोलते हुए उन्होंने कहा कि सरकार विकास कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है और इन परियोजनाओं की नींव पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल में ही रखी गई थी।

लेकिन इस पूरे कार्यक्रम से ज्यादा चर्चा उस दृश्य की हो रही है, जिसमें बैनरों पर प्रमुख राजनीतिक चेहरों की मौजूदगी को लेकर असंतुलन देखा गया। खासकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की तस्वीर का गायब होना राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह के कयासों को हवा दे रहा है।

विपक्षी खेमे से लेकर राजनीतिक विश्लेषकों तक, कई लोग इसे महज प्रशासनिक चूक मानने को तैयार नहीं हैं। सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह सिर्फ तकनीकी गलती थी या फिर गठबंधन की आंतरिक राजनीति में कोई सूक्ष्म संदेश छिपा है? बिहार की सत्ता संरचना में हाल के महीनों में जिस तरह के बदलाव और पुनर्संतुलन की चर्चाएँ चल रही हैं, ऐसे में यह मामला और अधिक संवेदनशील बन गया है।याद दिलाया जा रहा है कि पहले भी सरकारी बैनरों में शीर्ष नेतृत्व की तस्वीरों को लेकर स्पष्ट प्रोटोकॉल देखा जाता रहा है, खासकर नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री रहते हुए।

फिलहाल सरकार की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सियासी हलकों में गायब तस्वीर अब एक बड़े प्रतीकात्मक सवाल में बदल चुकी है क्या यह सिर्फ चूक है या सत्ता के भीतर बदलते समीकरणों की आहट?

नरोत्तम कुमार सिंह की स्पेशल रिपोर्ट