Bihar MLC Election: नीतीश कुमार से लेकर लालू यादव तक, बिहार के 7 नेता जो MLC बनकर बने CM

Bihar MLC Election: बिहार के सात मुख्यमंत्री विधायक बने बिना ही मुख्यमंत्री पद तक पहुंचे। जानें बीपी मंडल, अब्दुल गफूर, लालू यादव, राबड़ी देवी और नीतीश कुमार की राजनीतिक कहानी।

Bihar MLC Election

Bihar MLC Election: बिहार में मुख्यमंत्री बनने के लिए विधानसभा चुनाव लड़ना और जीतना जरूरी नहीं है। कोई व्यक्ति विधायक या विधान परिषद का सदस्य बने बिना भी मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकता है। हालांकि, संविधान के अनुसार उसे छह महीने के भीतर राज्य विधानमंडल के किसी एक सदन का सदस्य बनना होता है। इसी वजह से बिहार के कई नेताओं ने मुख्यमंत्री बनने के बाद विधान परिषद का रास्ता अपनाया।


इन नेताओं में बीपी मंडल, अब्दुल गफूर, भागवत झा आजाद, सत्येंद्र नारायण सिन्हा, लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और नीतीश कुमार के नाम शामिल हैं। इन सभी की राजनीतिक परिस्थितियां अलग थीं, लेकिन मुख्यमंत्री बनने के समय ये विधायक नहीं थे।


1. बीपी मंडल: पहले सतीश प्रसाद सिंह बने मुख्यमंत्री


बीपी मंडल की कहानी बिहार की राजनीति में काफी दिलचस्प मानी जाती है। साल 1967 के विधानसभा चुनाव के बाद महामाया प्रसाद सिन्हा के नेतृत्व में गैर-कांग्रेसी सरकार बनी। इसी दौरान बीपी मंडल मधेपुरा से संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर लोकसभा पहुंचे।


बीपी मंडल बिहार सरकार में स्वास्थ्य मंत्री बनना चाहते थे और वह मंत्री भी बने। लेकिन सांसद रहते हुए राज्य सरकार में मंत्री बनने और राज्य विधानमंडल का सदस्य बनने को लेकर राजनीतिक खींचतान हुई। मुख्यमंत्री महामाया प्रसाद सिन्हा के साथ मतभेद बढ़ने के बाद बीपी मंडल ने अलग रास्ता अपनाया और शोषित दल बनाया।


बाद में कांग्रेस के समर्थन से महामाया सरकार गिर गई। बीपी मंडल मुख्यमंत्री बनना चाहते थे, लेकिन उस समय वह बिहार विधानमंडल के सदस्य नहीं थे। ऐसे में 28 जनवरी 1968 को उनके करीबी सतीश प्रसाद सिंह मुख्यमंत्री बने। इसके बाद बीपी मंडल को विधान परिषद का सदस्य मनोनीत किया गया और 1 फरवरी 1968 को उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। सतीश प्रसाद सिंह का कार्यकाल केवल कुछ दिनों का रहा। 


2. अब्दुल गफूर: विधान परिषद के सदस्य रहते बने मुख्यमंत्री


जुलाई 1973 में बिहार की कांग्रेस सरकार में नेतृत्व परिवर्तन हुआ। तत्कालीन मुख्यमंत्री केदार पांडेय को पद छोड़ना पड़ा और पार्टी ने अब्दुल गफूर को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला किया।


उस समय अब्दुल गफूर बिहार विधान परिषद के सभापति थे। उन्होंने 2 जुलाई 1973 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इस तरह वह विधानसभा का सदस्य बने बिना मुख्यमंत्री बने। 


3. भागवत झा आजाद: लोकसभा सांसद से बने बिहार के मुख्यमंत्री


फरवरी 1988 में कांग्रेस के अंदर राजनीतिक खींचतान के बाद बिंदेश्वरी दुबे ने मुख्यमंत्री पद छोड़ दिया। इसके बाद भागवत झा आजाद को बिहार का मुख्यमंत्री बनाया गया।


उस समय भागवत झा आजाद लोकसभा के सदस्य थे। मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्हें बिहार विधानमंडल का सदस्य बनना पड़ा। उन्होंने विधान परिषद का रास्ता अपनाया और इसके सदस्य बने।


4. सत्येंद्र नारायण सिन्हा: सांसद रहते संभाली मुख्यमंत्री की कुर्सी


मार्च 1989 में बिहार में फिर नेतृत्व परिवर्तन हुआ। भागवत झा आजाद के बाद सत्येंद्र नारायण सिन्हा मुख्यमंत्री बने। उस समय वह औरंगाबाद से लोकसभा सांसद थे।


मुख्यमंत्री पद पर बने रहने के लिए उन्हें भी राज्य विधानमंडल का सदस्य बनना जरूरी था। इसके बाद उन्होंने विधान परिषद की सदस्यता हासिल की।


5. लालू प्रसाद यादव: मुख्यमंत्री बनने के बाद विधान परिषद पहुंचे


साल 1990 में लालू प्रसाद यादव बिहार के मुख्यमंत्री बने। उस समय वह छपरा लोकसभा सीट से सांसद थे। मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्हें भी बिहार विधानमंडल का सदस्य बनना था।


लालू यादव ने विधान परिषद का रास्ता अपनाया। इस तरह वह विधानसभा का चुनाव जीतकर विधायक बने बिना मुख्यमंत्री पद पर पहुंचे। उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला।


6. राबड़ी देवी: बिना विधायक बने बनीं मुख्यमंत्री


25 जुलाई 1997 को लालू प्रसाद यादव ने मुख्यमंत्री पद छोड़ दिया और उनकी पत्नी राबड़ी देवी को बिहार का मुख्यमंत्री बनाया गया। उस समय राबड़ी देवी बिहार विधानमंडल के किसी भी सदन की सदस्य नहीं थीं।


मुख्यमंत्री पद पर बने रहने के लिए उन्हें निर्धारित समय के भीतर विधानमंडल का सदस्य बनना पड़ा। बाद में उन्होंने विधान परिषद की सदस्यता हासिल की। राबड़ी देवी बिहार की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं।  


7. नीतीश कुमार: लोकसभा सांसद रहते बने मुख्यमंत्री


नवंबर 2005 में नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री बने। उस समय वह नालंदा से लोकसभा सांसद थे। मुख्यमंत्री पद पर बने रहने के लिए उन्हें भी राज्य विधानमंडल का सदस्य बनना था। नीतीश कुमार ने विधान परिषद का रास्ता अपनाया और बाद में लंबे समय तक बिहार की राजनीति में मुख्यमंत्री के रूप में सक्रिय रहे।


मुख्यमंत्री बनने के लिए क्या विधायक होना जरूरी है?


भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164(4) के अनुसार, अगर कोई मंत्री राज्य विधानमंडल का सदस्य नहीं है, तो वह लगातार छह महीने तक मंत्री पद पर रह सकता है। इसके बाद उसे विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना जरूरी होता है। मुख्यमंत्री पर भी यही नियम लागू होता है। इसका मतलब है कि मुख्यमंत्री बनने से पहले विधायक होना अनिवार्य नहीं है। लेकिन संवैधानिक नियमों के अनुसार तय समय में राज्य विधानमंडल का सदस्य बनना जरूरी है। बिहार के इन सात नेताओं की राजनीतिक यात्राएं इसी व्यवस्था के अलग-अलग उदाहरण पेश करती हैं।