Bihar News : पटना में ‘बिहार एग्री-पीवी समिट 2026’ का हुआ आयोजन, किसानों की आय बढ़ाने और हरित ऊर्जा को गति देने पर विशेषज्ञों ने किया मंथन
Bihar News : किसानों को खेती से होने वाली आय के साथ-साथ सौर ऊर्जा के माध्यम से अतिरिक्त आय का अवसर मिल सकता है। पटना में आयोजित 'बिहार एग्री-पीवी समिट 2026' में इस मुद्दे पर चर्चा की गयी......पढ़िए आगे
PATNA : बिहार में कृषि और सौर ऊर्जा के समन्वय से किसानों की आय बढ़ाने तथा स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मंगलवार को पटना में ‘बिहार एग्री-पीवी समिट 2026’ का आयोजन किया गया। समिट में कृषि भूमि के साथ सौर ऊर्जा उत्पादन को जोड़ने वाले एग्री-फोटोवोल्टिक (Agri-PV) मॉडल की संभावनाओं पर विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं एवं विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने विचार-विमर्श किया। ब्रेडा के निदेशक राहुल कुमार (भा.प्र.से.) ने अपने विशेष संबोधन में कहा कि बिहार कृषि प्रधान राज्य है और यहां बड़ी मात्रा में उपजाऊ कृषि भूमि है। ऐसी उपजाऊ कृषि भूमि को सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए अलग करने के बजाय ऐसी भूमि, जहां हॉर्टिकल्चर एवं बागवानी गतिविधियां होती हैं, वहां एग्री-पीवी मॉडल की संभावनाओं को तलाशना अधिक उपयोगी होगा। बिहार में भूमि की सीमित उपलब्धता को देखते हुए एग्री-पीवी मॉडल एक प्रभावी समाधान के रूप में उभर सकता है। इस मॉडल के माध्यम से कृषि गतिविधियों को जारी रखते हुए उसी भूमि पर सौर ऊर्जा उत्पादन की संभावनाओं का उपयोग किया जा सकता है।
किसानों को अतिरिक्त आय
उन्होंने कहा कि विशेष रूप से हॉर्टिकल्चर आधारित क्षेत्रों में एग्री-पीवी की अच्छी संभावनाएं हैं। छोटी-छोटी जोत और फल एवं बागवानी आधारित खेती वाले क्षेत्रों में स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप एग्री-पीवी मॉडल विकसित किए जा सकते हैं। इससे किसानों को खेती से होने वाली आय के साथ-साथ सौर ऊर्जा के माध्यम से अतिरिक्त आय का अवसर मिल सकता है। राहुल कुमार ने कहा कि किसानों की भागीदारी वाले कम्युनिटी एग्री-वोल्टाइक मॉडल की दिशा में राज्य में पहल की जा रही है। साथ ही, बिहार रिन्यूएबल एनर्जी पॉलिसी-2025 में एग्री-पीवी को ‘सोलर फॉर एग्रीकल्चर’ की विशेष श्रेणी के तहत मान्यता दी गई है। उन्होंने कहा कि पीएम-कुसुम 2 योजना के तहत भी एग्री-पीवी मॉडल को आगे बढ़ाने की संभावनाओं पर काम किया जा सकता है।
एक ही भूमि पर खेती के साथ बिजली उत्पादन
समिट में विशेषज्ञों ने बताया कि सौर पैनलों की उपयुक्त ऊंचाई एवं व्यवस्था के माध्यम से कृषि भूमि पर खेती के साथ-साथ सौर ऊर्जा का उत्पादन किया जा सकता है। इससे किसानों को पारंपरिक खेती के साथ अतिरिक्त आय का अवसर मिल सकता है तथा राज्य में अक्षय ऊर्जा उत्पादन को भी बढ़ावा दिया जा सकता है।
तकनीक से लेकर वित्तीय मॉडल तक पर चर्चा
समिट के दौरान एग्री-पीवी परियोजनाओं के लिए उपयुक्त तकनीक, भूमि उपयोग, फसलों एवं सौर पैनलों के बीच संतुलन, सिंचाई व्यवस्था, परियोजना लागत, निवेश तथा वित्तीय मॉडल जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तार से चर्चा की।
बिहार में एग्री-पीवी की व्यापक संभावनाएं
वक्ताओं ने कहा कि बिहार कृषि प्रधान राज्य है और यहां एग्री-पीवी मॉडल के विस्तार की पर्याप्त संभावनाएं हैं। कृषि एवं ऊर्जा क्षेत्र के बीच बेहतर समन्वय से किसानों को आर्थिक लाभ पहुंचाने के साथ-साथ हरित ऊर्जा लक्ष्यों को भी गति दी जा सकती है। समिट में एग्री-पीवी मॉडल को बड़े स्तर पर लागू करने के लिए सरकार, निजी क्षेत्र, किसानों, तकनीकी विशेषज्ञों और वित्तीय संस्थानों के बीच समन्वय एवं सहयोग को आवश्यक बताया गया। कार्यक्रम में ब्रेडा के निदेशक राहुल कुमार (भा.प्र.से.) के साथ-साथ सीआईआई बिहार स्टेट काउंसिल के चेयरमैन गौरव साह, बिहार सरकार के कृषि विभाग के उद्यान निदेशालय के निदेशक अभिषेक कुमार (IFS), सहित कृषि, ऊर्जा, नवीकरणीय ऊर्जा, निजी क्षेत्र एवं विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य बिहार में कृषि एवं नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में नए अवसरों की पहचान करते हुए किसान-केंद्रित ऊर्जा आधारित कृषि मॉडल को बढ़ावा देना रहा।