Bihar Assembly 2025: 35 साल बाद सदन में एक भी निर्दलीय नहीं, जानें क्यों हुआ ऐसा

Bihar Assembly 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में इतिहास बना है। पहली बार सदन में एक भी निर्दलीय विधायक नहीं पहुंचा। जानें क्यों वोटर सिर्फ NDA और महागठबंधन पर भरोसा कर रहे हैं।

Bihar Assembly 2025
बिहार विधानसभा में बदलते समीकरण- फोटो : social media

Bihar Assembly 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 कई दृष्टियों से खास रहा। इस बार का जनादेश न सिर्फ राजनीतिक समीकरणों को बदलने वाला साबित हुआ, बल्कि उसने यह भी दिखा दिया कि मतदाता अब किसी तीसरे विकल्प को जगह देने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं। रिकॉर्ड वोटिंग और दो बड़े गठबंधनों के बीच सीधी टक्कर ने पूरे चुनाव को दोध्रुवीय कर दिया। नतीजा यह हुआ कि 35 साल बाद पहली बार विधान सभा में एक भी निर्दलीय उम्मीदवार प्रवेश नहीं कर पाया।

मतदाता का झुकाव सिर्फ दो पक्षों पर रहा

पूरा चुनावी माहौल एनडीए और महागठबंधन पर केंद्रित रहा। छोटे दलों और स्वतंत्र उम्मीदवारों को वह राजनीतिक जगह नहीं मिल पाई, जो पहले चुनावों में अक्सर मिल जाया करती थी। इस बार मतदाताओं ने सीधा संदेश दिया कि वे साफ़-सुथरे और स्थिर गठबंधन को ही समाधान के रूप में देख रहे हैं।

कुछ निर्दलीयों ने संघर्ष किया, पर जीत तक नहीं पहुंचे

कई सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। कुछ ने दूसरे स्थान तक पहुंचकर मुकाबले को रोमांचक भी बनाया, फिर भी जीत उनसे दूर रही। दिलचस्प बात यह भी रही कि इनमें से कुछ उम्मीदवारों को महागठबंधन का अप्रत्यक्ष समर्थन भी मिला था, फिर भी वे फिनिश लाइन पार नहीं कर पाए।

तीन दशक पुरानी परंपरा खत्म

बिहार की राजनीति में एक समय ऐसा था जब निर्दलीय उम्मीदवार मजबूत स्थिति में रहते थे। 1990 के दशक में विधानसभा में उनकी संख्या तीस तक पहुँच चुकी थी। बाद के वर्षों में यह संख्या लगातार कम होती गई—कभी बीस, कभी दस और फिर छह तक। 2020 में यह संख्या घटते-घटते केवल एक पर आ गई थी। 2025 में पहली बार यह संख्या शून्य हो गई, जो बिहार की राजनीतिक यात्रा में एक अहम मोड़ माना जा रहा है।

2020 के आखिरी निर्दलीय विधायक की हार ने कहानी पूरी कर दी

पिछले चुनाव में जीते एकमात्र निर्दलीय विधायक सुमित सिंह इस बार जेडीयू के टिकट पर मैदान में उतरे। वे मंत्री भी रहे, लेकिन 2025 के चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। उनकी हार के साथ ही बिहार विधान सभा में निर्दलीयों का लंबा सफर एक ऐतिहासिक अंत तक पहुंच गया।