Samrat Choudhary Action:दागी अफसरों की खैर नहीं, सीएम ने दिया भ्रष्टाचार पर 'जीरो टॉलरेंस' का अल्टीमेटम

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पद संभालते ही भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति लागू करने का निर्देश दिया है। जांच के घेरे में होने के बावजूद फील्ड पोस्टिंग पाने वाले अधिकारियों पर अब सीएम की गाज गिरना तय है।

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मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शपथ ग्रहण के साथ ही साफ कर दिया है कि बिहार में अब भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर दिखेगी। उन्होंने अधिकारियों को सख्त लहजे में निर्देश दिया है कि करप्शन को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि फाइलों को लटकाने की प्रवृत्ति छोड़नी होगी और मुख्यालय से लेकर प्रखंड व थाना स्तर तक जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान करना होगा। उन्होंने राज्य को विकसित बनाने के लिए अनुशासन और संवेदनशीलता के साथ काम करने का संकल्प दोहराया है।


आरोपी अफसरों की फील्ड पोस्टिंग पर गिरेगी गाज

पिछले कुछ समय में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपियों को महत्वपूर्ण पदों (Key Posts) पर तैनात करने की प्रथा चल पड़ी थी, जिससे सरकार की छवि धूमिल हुई। नीतीश कुमार के कार्यकाल के अंतिम दौर में कई ऐसे फैसले हुए जहाँ जांच एजेंसियों की रडार पर रहे अफसरों को दोबारा फील्ड में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई। सम्राट चौधरी के कड़े रुख के बाद अब ऐसे अधिकारियों की शामत आना तय माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने संकेत दिए हैं कि जिन दागियों को 'उपकृत' किया गया है, उनके खिलाफ समीक्षा कर कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।


बेउर जेल के पूर्व अधीक्षक की पोस्टिंग पर उठे सवाल

भ्रष्टाचार को पुरस्कृत करने का सबसे ताजा उदाहरण विधु कुमार का मामला है। पटना के बेउर जेल के तत्कालीन अधीक्षक विधु कुमार के खिलाफ जनवरी 2025 में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया था। उनके कई ठिकानों पर छापेमारी हुई थी, जिसके बाद उन्हें सस्पेंड किया गया था। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि बिना किसी क्लीनचिट के, गृह विभाग ने फरवरी 2026 में उन्हें दोबारा बेगूसराय का जेल अधीक्षक बनाकर फील्ड पोस्टिंग दे दी। इस आदेश से खुद जांच एजेंसियां भी हैरान हैं और इसे जीरो टॉलरेंस नीति का मखौल माना जा रहा है।


जनता की सुविधा और अनुशासन पर जोर

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि विकास कार्यों में दुगुनी गति लाई जाए। सम्राट चौधरी का विशेष ध्यान अंचल, प्रखंड और थानों पर है, जहाँ आम जनता को सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार और देरी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी है कि निचले स्तर पर अगर आम जनता को काम के लिए दौड़ाया गया, तो इसके लिए जवाबदेही तय की जाएगी। नई सरकार का लक्ष्य भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन देना है, जिसमें किसी भी 'चहेते' दागी अधिकारी के लिए कोई जगह नहीं होगी।