Bihar Teacher news - नियमों का हवाला देकर सरकार ने बंद किए रास्ते! इतने शिक्षकों का 'प्रशिक्षित वेतनमान' का सपना चकनाचूर; शिक्षा विभाग का कड़ा फैसला

बिहार सरकार के शिक्षा विभाग ने अररिया जिले के 14 शिक्षकों द्वारा नियुक्ति तिथि से प्रशिक्षित वेतनमान दिए जाने के दावे को आधिकारिक तौर पर अस्वीकृत कर दिया है ।

Bihar Teacher news - नियमों का हवाला देकर सरकार ने बंद किए र

Patna - बिहार सरकार के शिक्षा विभाग ने अररिया जिले के 14 शिक्षकों को बड़ा झटका देते हुए उनकी नियुक्ति तिथि से प्रशिक्षित वेतनमान पाने की याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है । प्राथमिक शिक्षा निदेशक ने पटना उच्च न्यायालय में दायर याचिका संख्या-11300/2025 (विकास कुमार एवं अन्य बनाम राज्य सरकार) के आलोक में यह कड़ा आदेश जारी किया है । विभाग ने स्पष्ट किया है कि शिक्षकों की मांग विधिक प्रावधानों और तत्कालीन नियमावली के अनुरूप नहीं है 

शिक्षकों का तर्क और हाई कोर्ट का हस्तक्षेप

पूरा मामला अररिया जिले के उन शिक्षकों से जुड़ा है जिनकी नियुक्ति वर्ष 2014 में 'अप्रशिक्षित' श्रेणी में हुई थी । इन शिक्षकों का तर्क था कि चूंकि वे नियुक्ति से पहले ही बी.एड. की डिग्री रखते थे और बाद में एन.आई.ओ.एस. से 6 माह का सेतु पाठ्यक्रम (ब्रिज कोर्स) भी उत्तीर्ण कर लिया था, इसलिए उन्हें 11 जून 2019 के बजाय उनकी मूल नियुक्ति तिथि 21 अगस्त 2014 से ही प्रशिक्षित का वेतनमान मिलना चाहिए । इसी मांग को लेकर विकास कुमार और अन्य ने माननीय उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था 

NCTE के नियमों और नियमावली 2012 का हवाला

विभाग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि बिहार पंचायत प्रारंभिक शिक्षक नियमावली, 2012 के तहत कक्षा 1 से 5 के लिए बी.एड. के आधार पर नियोजन का कोई सीधा प्रावधान नहीं था 。 एन.सी.टी.ई. (NCTE) की अधिसूचना के अनुसार, बी.एड. योग्यता रखने वाले कक्षा 1 से 5 के शिक्षकों के लिए 6 माह का विशेष प्रशिक्षण (सेतु पाठ्यक्रम) अनिवार्य है । विभाग का कहना है कि बी.एड. को डी.एल.एड. के समरूप नहीं माना जा सकता और केवल ब्रिज कोर्स पूरा करने के बाद ही उन्हें प्रशिक्षित माना जा सकता है 

पुराने अदालती फैसलों से तुलना को बताया गलत

शिक्षकों ने अपने पक्ष में एल.पी.ए. संख्या-1699/2013 के पुराने फैसले का हवाला दिया था, जिसे विभाग ने पूरी तरह से 'आधार विहीन' करार दिया 。 विभाग के अनुसार, वह मामला वर्ष 1999-2005 के बीच नियुक्त उन शिक्षकों का था जिन्हें सरकार की ओर से प्रशिक्षण में भेजने में देरी हुई थी । वर्तमान शिक्षकों के मामले में विभाग की ओर से प्रशिक्षण नामांकन में कोई विलंब नहीं पाया गया है, इसलिए उन्हें पुराने मामलों के समान लाभ नहीं दिया जा सकता 

आदेश का प्रभावी क्रियान्वयन और भविष्य की स्थिति

प्राथमिक शिक्षा निदेशक ने अपने विस्तृत आदेश में विकास कुमार सहित सभी 14 याचिकाकर्ताओं के दावे को आधिकारिक रूप से अस्वीकृत कर दिया है । इस आदेश की प्रतिलिपि अररिया के जिला शिक्षा पदाधिकारी और स्थापना शाखा को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दी गई है । सरकार के इस रुख से स्पष्ट है कि अब ब्रिज कोर्स उत्तीर्ण करने की तिथि से ही शिक्षकों को प्रशिक्षित माना जाएगा, जिससे पूर्व की तिथि से एरियर मिलने की शिक्षकों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है