प्राइवेट स्कूलों जैसी सुविधा, हाई-टेक लैब और स्मार्ट क्लास; जानिए बिहार के किन स्कूलों की खुलने वाली है लॉटरी

बिहार सरकार ने PM श्री योजना के तहत 789 स्कूलों के लिए 14.85 अरब रुपये की मंजूरी दी है। जानें कैसे स्मार्ट क्लास और आधुनिक लैब से बदल जाएगी बिहार के सरकारी स्कूलों की तस्वीर।

प्राइवेट स्कूलों जैसी सुविधा, हाई-टेक लैब और स्मार्ट क्लास;

Patna - बिहार के शिक्षा जगत में एक ऐसा बदलाव आने वाला है जिसकी कल्पना शायद ही किसी ने की थी। शिक्षा विभाग ने एक ऐसी योजना को हरी झंडी दे दी है, जिसके बाद राज्य के 789 सरकारी स्कूलों का चेहरा पूरी तरह बदल जाएगा। इस बड़े बदलाव के लिए सरकार ने 14 अरब 85 करोड़ रुपये से अधिक की भारी-भरकम राशि जारी की है। यह बजट इतना बड़ा है कि इसने पूरे महकमे में हलचल पैदा कर दी है, लेकिन सवाल यह है कि आखिर इन स्कूलों में ऐसा क्या होने जा रहा है जो अब तक नहीं हुआ?

नई शिक्षा नीति का दिखेगा असली असर 

इस भारी निवेश के पीछे का राज राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (NEP-2020) में छिपा है। केंद्र प्रायोजित पी०एम० श्री योजना के तहत बिहार के इन चुनिंदा माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों को 'मॉडल स्कूल' के रूप में तैयार किया जाएगा। अब तक पारंपरिक ढर्रे पर चल रहे इन स्कूलों में कक्षा 6वीं से 12वीं तक के छात्रों के लिए पढ़ाई का तरीका पूरी तरह बदलने वाला है। सरकार का गुप्त एजेंडा छात्रों को केवल डिग्री दिलाना नहीं, बल्कि उन्हें तकनीकी रूप से इतना साक्षर बनाना है कि वे बड़े शहरों के निजी स्कूलों को टक्कर दे सकें।

क्या होंगे इन स्कूलों के नए 'हाई-टेक' हथियार?

जल्द ही इन 789 स्कूलों में ऐसी सुविधाएं देखने को मिलेंगी जो अब तक सिर्फ बड़े प्राइवेट स्कूलों की पहचान थीं। योजना के तहत स्कूलों में हाई-टेक स्मार्ट क्लास, एडवांस्ड लैब और मॉडर्न लाइब्रेरी का जाल बिछाया जाएगा। लेकिन सबसे दिलचस्प बात यह है कि यहाँ केवल इंफ्रास्ट्रक्चर ही नहीं बदलेगा, बल्कि शिक्षा को 'कौशल आधारित' बनाया जा रहा है। इसका मतलब है कि अब छात्र सिर्फ किताबें नहीं रटेंगे, बल्कि लैब में प्रयोग करेंगे और नवाचार के जरिए अपनी छिपी हुई प्रतिभा को दुनिया के सामने लाएंगे।

शिक्षकों के लिए भी तैयार है 'सीक्रेट प्लान'

इस मिशन की सफलता के लिए सरकार ने शिक्षकों के लिए भी एक विशेष रणनीति तैयार की है। केवल आधुनिक लैब बना देने से बदलाव नहीं आएगा, इसलिए इन विद्यालयों के शिक्षकों को एक विशेष आधुनिक प्रशिक्षण से गुजरना होगा। इस ट्रेनिंग के बाद शिक्षक नई और आधुनिक शिक्षण-प्रणाली के जरिए छात्रों को पढ़ाने के लिए तैयार होंगे। सरकारी स्कूलों का यह कायाकल्प शिक्षा के स्तर को कहाँ ले जाएगा, यह तो आने वाला वक्त बताएगा, लेकिन इस भारी निवेश ने बिहार की शिक्षा व्यवस्था में एक नई उम्मीद जरूर जगा दी है।