सीएम की कुर्सी छोड़ने से पहले बिहार के लाखों छात्रों को नीतीश कुमार दे सकते हैं बड़ा तोहफा, 360 प्रखंडों के स्टूडेंस को होगा फायदा
बिहार सरकार ने राज्य के 360 कॉलेज विहीन प्रखंडों में नए डिग्री कॉलेज खोलने का फैसला किया है। शिक्षा विभाग ने इसी सत्र से पढ़ाई शुरू करने का लक्ष्य रखा है। जानें पूरी योजना।
Patna - बिहार में उच्च शिक्षा की सूरत बदलने के लिए नीतीश सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा मास्टरस्ट्रोक खेला है। राज्य के उन 360 प्रखंडों में नए डिग्री कॉलेज खोले जाएंगे, जो अब तक कॉलेज विहीन थे। शिक्षा विभाग ने इस महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने के लिए युद्धस्तर पर तैयारी शुरू कर दी है। सरकार का लक्ष्य साफ है—बेटे-बेटियों को डिग्री लेने के लिए अब मीलों दूर बड़े शहरों का रुख नहीं करना होगा, बल्कि उनके अपने प्रखंड में ही कॉलेज की घंटी गूंजेगी।
क्यों पड़ी इस बड़े फैसले की जरूरत?
शिक्षा विभाग के सर्वे में यह कड़वी सच्चाई सामने आई थी कि राज्य के 360 प्रखंडों में एक भी डिग्री कॉलेज नहीं है। इसके कारण ग्रामीण इलाकों के मेधावी छात्र, विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर और छात्राएं, इंटर के बाद पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हो जाते थे। शहरों में रहने और पढ़ाई का खर्च उठाना सबके बस की बात नहीं थी। इसी 'एजुकेशन गैप' को भरने के लिए सरकार ने गांव-गांव तक कॉलेज पहुंचाने का बीड़ा उठाया है।
इसी सत्र से 'ओपन' होंगे कॉलेज: शिक्षकों की बहाली और इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर
सरकार सिर्फ कागजों पर कॉलेज नहीं खोल रही, बल्कि विभाग की कोशिश है कि इसी शैक्षणिक सत्र से इन कॉलेजों में नामांकन और पढ़ाई शुरू करा दी जाए। इसके लिए अस्थाई भवनों की पहचान और संसाधनों की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही, इन नए कॉलेजों के लिए शिक्षकों और गैर-शैक्षणिक कर्मियों की नियुक्ति प्रक्रिया को भी तेज करने का निर्देश दिया गया है ताकि छात्रों का साल बर्बाद न हो।
लाखों छात्रों को सीधा लाभ: समय और पैसे की होगी भारी बचत
इस पहल से बिहार के लाखों ग्रामीण छात्रों को सीधा फायदा मिलेगा। अब उन्हें पटना, मुजफ्फरपुर या भागलपुर जैसे शहरों में जाकर ऊंचे किराए पर कमरा लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे न केवल उनके समय और पैसे की बचत होगी, बल्कि राज्य में ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो (GER) में भी भारी उछाल आने की उम्मीद है।
शिक्षा विभाग की चेतावनी: काम में ढिलाई बर्दाश्त नहीं!
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, सभी संबंधित जिलों के शिक्षा पदाधिकारियों को जमीन चिन्हित करने और आधारभूत संरचना की रिपोर्ट जल्द सौंपने को कहा गया है। सरकार की मंशा स्पष्ट है कि इस योजना में किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह कदम बिहार के शैक्षणिक इतिहास में एक सांस्कृतिक और बौद्धिक आंदोलन की तरह देखा जा रहा है।