बिहार के जिला अस्पतालों में रात भी होगी जिंदगी की जंग, सरकार का बड़ा फैसला, अब 24 घंटे मिलेंगी इमरजेंसी सेवाएं, रेफरल सिस्टम पर लगेगा लगाम

Bihar Health System: राज्य सरकार ने जिला अस्पतालों को महज रेफरल सेंटर की छवि से बाहर निकालने के लिए बड़ा कदम उठाया है।...

Bihar Hospitals Get Round the Clock Emergency Care
बिहार के जिला अस्पतालों में रात भी होगी जिंदगी की जंग- फोटो : social Media

Bihar Health System: बिहार में स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की कवायद तेज हो गई है। राज्य सरकार ने जिला अस्पतालों को महज रेफरल सेंटर की छवि से बाहर निकालने के लिए बड़ा कदम उठाया है। अब प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों में रात के समय भी नियमित इमरजेंसी सेवाएं उपलब्ध रहेंगी। सरकार का मकसद साफ है—गंभीर मरीजों को उनके जिले में ही समय पर इलाज मिले और उन्हें पटना के बड़े अस्पतालों की ओर भागने की मजबूरी कम हो।नई व्यवस्था के तहत जिला अस्पतालों में रात की ड्यूटी में जनरल मेडिसिन, जनरल सर्जरी, शिशु रोग और स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉक्टर तैनात रहेंगे। डॉक्टरों के साथ प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल कर्मी और तकनीकी विशेषज्ञ भी मौजूद रहेंगे, ताकि किसी भी आपात स्थिति में मरीज का इलाज बिना देरी के शुरू किया जा सके।

राज्य सरकार ने पिछले पांच वर्षों में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए 8 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए हैं। जिला अस्पतालों में नए भवन बनाए गए, 100 से 200 बेड वाले मातृ एवं शिशु सदन तैयार किए गए, आईसीयू, एचडीयू, ऑक्सीजन प्लांट और अत्याधुनिक जांच मशीनों की व्यवस्था की गई. अस्पताल भवनों के निर्माण और विस्तार के लिए करीब 2500 करोड़ रुपये, आईसीयू, एचडीयू और ऑक्सीजन प्लांट के लिए 1200 करोड़ रुपये से अधिक, दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की खरीद के लिए करीब 5000 करोड़ रुपये तथा मुख्यमंत्री डायलिसिस योजना के लिए लगभग 250 करोड़ रुपये खर्च किए गए।

सरकार का उद्देश्य था कि गंभीर मरीजों को जिला स्तर पर ही बेहतर इलाज मिले और पटना के पीएमसीएच, आईजीआईएमएस जैसे बड़े अस्पतालों पर मरीजों का दबाव कम हो। लेकिन हकीकत यह है कि भारी निवेश के बावजूद कई जिला अस्पताल अब भी रेफरल सेंटर की भूमिका से बाहर नहीं निकल पाए हैं।कई मामलों में हर्निया, हाइड्रोसील, बवासीर जैसी सामान्य सर्जरी के मरीजों को भी बड़े अस्पतालों में भेज दिया जाता है। इससे पटना के सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों की इमरजेंसी और ओपीडी व्यवस्था पर अनावश्यक दबाव बढ़ रहा है।

आईजीआईएमएस के अस्पताल अधीक्षक डॉ. मनीष मंडल का कहना है कि सुपर स्पेशियलिटी संस्थानों में गंभीर और जटिल मामलों का इलाज प्राथमिकता से होना चाहिए, लेकिन जिला अस्पतालों से सामान्य सर्जरी और संक्रमण वाले मरीज भी रेफर कर दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि हेपेटाइटिस-बी या एचआईवी जैसे मामलों में भी कई बार जिला स्तर पर प्रोटोकॉल के अनुसार इलाज करने के बजाय मरीजों को सीधे बड़े अस्पताल भेज दिया जाता है।वहीं पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने कहा कि पीएमसीएच में बेहद गंभीर मरीजों और जटिल बीमारियों का इलाज होना चाहिए, लेकिन सामान्य मामलों के पहुंचने से इमरजेंसी और ओपीडी पर दबाव बढ़ जाता है। अगर जिला अस्पतालों में उपलब्ध सुविधाओं का सही इस्तेमाल हो, तो गंभीर मरीजों को बेहतर समय और बेहतर इलाज मिल सकेगा।

सरकार की नई पहल को स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। रात के समय विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ने से दुर्घटना, प्रसव, गंभीर बीमारी और अचानक बिगड़ी तबीयत वाले मरीजों को तत्काल इलाज मिल सकेगा।अब असली चुनौती यह होगी कि यह व्यवस्था सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि डॉक्टरों की तैनाती, उपकरणों की उपलब्धता और जवाबदेही के साथ जमीन पर भी प्रभावी ढंग से लागू हो। अगर योजना सफल होती है तो बिहार के जिला अस्पताल आने वाले दिनों में मरीजों के लिए पहली उम्मीद बन सकते हैं, न कि केवल रेफर करने वाले केंद्र।