बिहार सरकार के गृह विभाग ने प्रशासनिक स्तर पर एक बड़ा फैसला लेते हुए पुलिस महकमे में अहम फेरबदल किया है। बुधवार को जारी आधिकारिक अधिसूचना के तहत भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारियों का तबादला किया गया है, जिसका सीधा असर जिला स्तर की कानून व्यवस्था पर पड़ने वाला है। इस पूरे फेरबदल में सबसे प्रमुख बदलाव जिला स्तर पर कप्तानों की अदला-बदली को लेकर हुआ है। आदेश के तहत नवगछिया के पुलिस अधीक्षक (SP) राजेश कुमार का ट्रांसफर कर दिया गया है, वहीं उनकी जगह आर्थिक अपराध इकाई (EOU) से वैभव शर्मा को नवगछिया जिले की नई कमान सौंपी गई है। पटना से जारी इस आदेश के बाद नए पदस्थापन को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। लेकिन इन सब के बिच एक गज़ब का कोइंसिडेंट है 18 मार्च 2026 को भी बुधवार था जब राजेश कुमार को नवगछिया का एसपी नियुक्त किया गया और 20 मई को भी बुधवार है जब नवगछिया के एसपी का अचानक तबादला कर दिया गया।

वैभव शर्मा बने नवगछिया के नए एसपी, राजेश कुमार को मिली साइबर कमान
इस प्रशासनिक हेरफेर के तहत 2016 बैच के आईपीएस अधिकारी राजेश कुमार को अब पुलिस अधीक्षक, साइबर अनुसंधान एवं अभियान, आर्थिक अपराध इकाई (EOU), बिहार, पटना के पद पर तैनात किया गया है। दूसरी ओर, आर्थिक अपराध इकाई में इसी पद पर पहले से कार्य कर रहे 2018 बैच के तेज-तर्रार आईपीएस अधिकारी वैभव शर्मा को नवगछिया का नया पुलिस अधीक्षक (SP) नियुक्त किया गया है। वैभव शर्मा के आने से नवगछिया में पुलिसिंग को एक नया विजन मिलने की उम्मीद जताई जा रही है, जबकि राजेश कुमार अब राज्य के साइबर अपराधों से जुड़े बड़े अभियानों और अनुसंधान की कमान संभालेंगे।
महज दो महीने में ही हटे एसपी राजेश कुमार, पुलिस महकमे और सियासी गलियारों में उठे सवाल
इस पूरे तबादले में सबसे ज्यादा चर्चा नवगछिया के निवर्तमान एसपी राजेश कुमार को हटाए जाने को लेकर हो रही है। विदित हो कि महज दो महीने पहले, यानी 18 मार्च 2026 को ही राजेश कुमार को नवगछिया का एसपी नियुक्त किया गया था। इससे पहले वह मद्य निषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो में एसपी के पद पर कार्यरत थे। पद संभालने के मात्र 2 महीने के भीतर ही उन्हें अचानक नवगछिया के एसपी पद से मुक्त कर पटना वापस बुलाए जाने को लेकर अब पुलिस महकमे से लेकर सियासी गलियारों तक कई तरह के सवाल उठने लगे हैं। लोग इस बेहद संक्षिप्त कार्यकाल के पीछे के प्रशासनिक या अन्य कारणों को लेकर तरह-तरह के कयास लगा रहे हैं।

प्रशासनिक जरूरत या कोई और वजह? क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म
अचानक हुए इस फेरबदल को जहां गृह विभाग एक सामान्य और प्रशासनिक दृष्टिकोण से की गई रूटीन प्रक्रिया बता रहा है, वहीं स्थानीय स्तर और राजनीतिक हलकों में इसे लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। महज दो महीने के छोटे कार्यकाल में किसी जिले के कप्तान को बदलना आमतौर पर किसी विशेष प्रशासनिक घटनाक्रम या रणनीतिक बदलाव का संकेत माना जाता है। बहरहाल, कारण चाहे जो भी हों, पटना से जारी इस आदेश के बाद दोनों अधिकारियों ने अपने नए पदों की जिम्मेदारी संभालने की कवायद शुरू कर दी है और आने वाले दिनों में नवगछिया की कानून व्यवस्था में इसके परिणाम देखने को मिलेंगे।