IGIMS Paper Leak Case:बिहार में डॉक्टर बनने की डिग्री भी बिक रही है? IGIMS में पेपर लीक का रेट कार्ड राज उजागर, निदेश के साथ प्रभारी निदेशक भी अब छुट्टी पर, परीक्षा डीन का इस्तीफा,छात्रों में आक्रोश
IGIMS Paper Leak Case: पटना के प्रतिष्ठित IGIMS में ऐसा सनसनीखेज खेल सामने आया है जिसने पूरे चिकित्सा शिक्षा तंत्र को हिला कर रख दिया है। MBBS और PG फाइनल ईयर परीक्षाओं में पेपर लीक और धांधली के गंभीर आरोपों ने न सिर्फ संस्थान की साख पर सवाल खड़े...
IGIMS Paper Leak Case:बिहार की राजधानी पटना के प्रतिष्ठित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) में ऐसा सनसनीखेज खेल सामने आया है जिसने पूरे चिकित्सा शिक्षा तंत्र को हिला कर रख दिया है। MBBS और PG फाइनल ईयर परीक्षाओं में पेपर लीक और धांधली के गंभीर आरोपों ने न सिर्फ संस्थान की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि भविष्य के डॉक्टरों की योग्यता पर भी संदेह की परछाई डाल दी है।पूरा मामला एक ईमेल के वायरल होने से खुला, जो 11 मार्च 2026 को भेजा गया था। इस ईमेल में डीन कार्यालय के एक गैर-शिक्षण कर्मचारी हेमंत पर आरोप लगाए गए हैं कि वह पैसों के बदले गुप्त सौदे करता था और कुछ चुनिंदा छात्रों को परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र उपलब्ध करा देता था। इतना ही नहीं, आंसर शीट में हेरफेर और सेटिंग का खेल भी इसी नेटवर्क का हिस्सा बताया जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, यह पूरा सिस्टम किसी रेट कार्ड की तरह चल रहा था पेपर लीक की अलग कीमत, और बाहर से उत्तर लिखवाकर सिस्टम में फिट कराने की अलग डील। लाखों रुपये के इस शैक्षणिक सौदेबाजी ने मेडिकल शिक्षा की पवित्रता को सीधा चुनौती दी है।
मामला उजागर होने के बाद 17 मार्च को निदेशक कक्ष में बैठक तो हुई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इसी खामोशी से नाराज होकर तत्कालीन परीक्षा डीन प्रकाश दुबे ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद प्रशासन ने डॉ. नीरू गोयल को नई जिम्मेदारी सौंपी, लेकिन विवाद थमने के बजाय और बढ़ता चला गया।
छात्रों में आक्रोश फैल गया और आंदोलन की चेतावनी दी गई। 7 अप्रैल को हुई उच्चस्तरीय बैठक में सबसे बड़ा सवाल तब उठा जब संस्थान के निदेशक स्वयं अनुपस्थित रहे। यह अनुपस्थिति ही अब पूरे प्रकरण को और रहस्यमयी बना रही है।
जानकारी के अनुसार, निदेशक डॉ. बिंदे पहले से ही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) जांच के घेरे में हैं, जो फर्जी प्रमाणपत्र से जुड़े पुराने मामले से संबंधित है। उनके अचानक छुट्टी पर चले जाने और प्रशासनिक चुप्पी ने संस्थान के भीतर संदेह का माहौल और गहरा कर दिया है।

कथित तौर पर अंदरखाने की खबरें तो यह भी कहती हैं कि इस पूरे सिस्टम में परीक्षा शाखा के अंदर डीलिंग नेटवर्क सक्रिय था, जहां पैसे के आधार पर प्रश्नपत्र लीक कराना और कॉपी मैनेज करना आम बात बन चुकी थी। असामान्य समय पर संदिग्ध लोगों की आवाजाही सीसीटीवी फुटेज में कैद होने की बात भी सामने आई है, जिसे जांच की अहम कड़ी माना जा रहा है।
अब इस मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय समिति गठित की गई है, जिसे सात दिनों में रिपोर्ट सौंपनी है। इससे पहले जांच करने वाले प्रभारी निदेशक हीं छुट्टी पर चले गए है। लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह समिति सच को सामने ला पाएगी, या यह मामला भी फाइलों के ढेर में दब जाएगा?
प्रशासन की ढिलाई, अंदरूनी साजिश और पैसों के खेल ने IGIMS को एक ऐसे मेडिकल स्कैंडल में बदल दिया है, जहां डॉक्टर बनने का सपना अब डील और दलाली के शक के दायरे में खड़ा दिखाई दे रहा है।
अब बड़ा सवाल यही है क्या यह सिर्फ एक पेपर लीक है, या मेडिकल शिक्षा के नाम पर चल रहा एक संगठित सिस्टम गैंग?