बिहार मानसून सत्र आज से, 21 साल बाद सदन में नहीं दिखेंगे नीतीश, तेजस्वी की गैरमौजूदगी से विपक्ष की रणनीति पर उठे सवाल

इस बार सत्र का सबसे बड़ा सियासी पहलू यह है कि करीब 21 साल बाद बिहार के किसी सदन में नीतीश कुमार की मौजूदगी नहीं होगी।

Bihar Monsoon Session Nitish Absent After 21 Years Tejashwi
21 साल बाद सदन में नहीं दिखेंगे नीतीश- फोटो : social Media

Bihar Monsoon Session 2026: बिहार विधानमंडल का पांच दिवसीय मानसून सत्र आज यानी सोमवार से शुरू हो रहा है। 24 जुलाई तक चलने वाले इस सत्र में जहां सरकार अपनी उपलब्धियों और विकास योजनाओं का हिसाब-किताब पेश करने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष सरकार को घेरने के लिए मुद्दों की तलाश में जुटा है। लेकिन इस बार सत्र का सबसे बड़ा सियासी पहलू यह है कि करीब 21 साल बाद बिहार के किसी सदन में नीतीश कुमार की मौजूदगी नहीं होगी।

करीब दो दशक तक बिहार की सत्ता की धुरी रहे नीतीश कुमार पिछले बजट सत्र तक मुख्यमंत्री के रूप में सदन का हिस्सा थे। बाद में उनके राज्यसभा जाने के बाद अब विधानसभा और विधान परिषद दोनों में उनका सीधा हस्तक्षेप नहीं रहेगा। ऐसे में सत्ता पक्ष की रणनीति और विपक्ष की चुनौती दोनों नए समीकरणों के बीच तय होगी।मानसून सत्र शुरू होने से पहले विपक्षी महागठबंधन में साझा रणनीति को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। पांचों घटक दलों राजद, कांग्रेस, भाकपा माले, सीपीएम और सीपीआई के नेताओं की संयुक्त बैठक अब तक नहीं हो सकी है।

इसकी बड़ी वजह नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की विदेश यात्रा और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की खराब तबीयत बताई जा रही है। वहीं कांग्रेस और वाम दलों की ओर से भी संयुक्त बैठक को लेकर कोई ठोस पहल नहीं हो पाई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विपक्ष में आपसी समन्वय की कमी का फायदा सीधे तौर पर सरकार को मिल सकता है।नेता प्रतिपक्ष की गैरमौजूदगी में विधानसभा में विपक्ष के मुख्य सचेतक कुमार सर्वजीत तेजस्वी यादव के कक्ष में विपक्षी विधायकों के साथ रणनीति पर चर्चा करेंगे। वहीं विधान परिषद में मुख्य सचेतक अब्दुल बारी सिद्दीकी विपक्षी सदस्यों के साथ बैठक करेंगे।

हालांकि साझा रणनीति का अभाव है, लेकिन विपक्ष पहले दिन अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की तैयारी में है। नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ी के मुद्दे को लेकर विपक्षी विधायक शहीद स्मारक (सप्त मूर्ति) से विधानसभा मुख्य द्वार तक करीब 400 मीटर पैदल मार्च निकालेंगे।विधानसभा में विपक्षी दलों की संख्या अच्छी है। राजद के करीब 25, कांग्रेस के 6, भाकपा माले के 2 तथा सीपीएम और सीपीआई के एक-एक विधायक हैं। इसके बावजूद पांचों दलों के बीच समन्वय की कमी सत्ता पक्ष के लिए राहत की वजह बन सकती है।

मानसून सत्र में विपक्ष कई अहम मुद्दों को उठाने की तैयारी में है। इनमें सबसे प्रमुख हैं। कम बारिश और धान की रोपनी का संकट: राज्य में अब तक कम बारिश के कारण धान की रोपनी प्रभावित हुई है। विपक्ष किसानों के मुद्दे पर सरकार को घेर सकता है।विपक्ष का आरोप है कि किसानों को पर्याप्त बिजली नहीं मिल रही है, जबकि खेती के लिए लगातार बिजली की जरूरत है।कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार पर सवाल उठाए जाएंगे। पंचायतों में टैक्स व्यवस्था लागू करने के फैसले पर भी सियासी घमासान की संभावना है।कथित एनकाउंटर मामला विपक्ष इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाने की तैयारी में है।शिक्षक बहाली और रोजगार, बेरोजगारी के मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश होगी।

भले ही विपक्ष फिलहाल बिखरा हुआ नजर आ रहा हो, लेकिन मानसून सत्र में सरकार को भी कई सवालों का जवाब देना होगा। अनुपूरक बजट, विकास योजनाएं, कानून-व्यवस्था और ग्रामीण समस्याओं को लेकर विपक्ष सदन में दबाव बनाने की कोशिश करेगा।

कुल मिलाकर बिहार का यह मानसून सत्र कई मायनों में ऐतिहासिक रहने वाला है। एक तरफ 21 साल बाद सदन में नीतीश कुमार की अनुपस्थिति नया राजनीतिक अध्याय लिखेगी, तो दूसरी ओर तेजस्वी की गैरमौजूदगी में विपक्ष अपनी एकजुटता साबित करने की चुनौती से जूझता नजर आएगा। अब देखना होगा कि सदन में मुद्दों की धार भारी पड़ती है या सियासी रणनीति की कमी विपक्ष पर हावी रहती है।