बेगूसराय में ₹80,000 की घूस न देने पर CO ने रोका दाखिल-खारिज! राजस्व मंत्री ने बैठाई गोपनीय जांच

बिहार के बेगूसराय में ₹80,000 की रिश्वत न देने पर पीड़ित का दाखिल-खारिज आवेदन रद्द करने का सनसनीखेज मामला। राजस्व मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल ने संज्ञान लेते हुए CO प्रीति कुमारी के खिलाफ गोपनीय जांच के आदेश दिए।

 Minister Dilip Kumar Jaiswal Action
राजस्व मंत्री ने बैठाई गोपनीय जांच - फोटो : Reporter

बिहार सरकार के "जीरो टॉलरेंस अगेंस्ट करप्शन" के दावों को ठेंगा दिखाते हुए बेगूसराय जिले के खोदावंदपुर अंचल कार्यालय में भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है। न्यूज़4नेशन द्वारा प्रमुखता से उजागर की गई इस घटना में, नूरुल्लाहपुर के निवासी ललन कुमार ने मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों को ईमेल भेजकर न्याय की गुहार लगाई है। पीड़ित का आरोप है कि उनकी वैध तरीके से खरीदी गई जमीन का दाखिल-खारिज करने के एवज में वर्तमान अंचलाधिकारी (CO) प्रीति कुमारी और कंप्यूटर ऑपरेटर रणजीत कुमार द्वारा स्थानीय बिचौलियों के माध्यम से ₹80,000 की मोटी रिश्वत मांगी गई। जब पीड़ित ने यह घूस देने से साफ इनकार कर दिया, तो उनके वैध आवेदन (संख्या 993/2025-2026) को बीती 13 मई 2026 को जानबूझकर खारिज (Reject) कर दिया गया।


राजस्व मंत्री का बड़ा एक्शन, गोपनीय जांच के आदेश

मामले के तूल पकड़ते ही राजस्‍व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल ने इस पर कड़ा संज्ञान लिया है। उन्होंने बेगूसराय के समाहर्ता (DM) को मामले की गंभीरता को देखते हुए अपर समाहर्ता से इस पूरे प्रकरण की गोपनीय जांच कराने का निर्देश जारी किया है। इसके साथ ही, जांच रिपोर्ट को अविलंब मुख्यालय को उपलब्ध कराने को कहा गया है। राजस्व मंत्री के इस कड़े रुख के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि घूसखोरी के आरोपी अंचलाधिकारी प्रीति कुमारी और कंप्यूटर ऑपरेटर रणजीत कुमार पर प्रशासन क्या और कितनी सख्त कार्रवाई करता है।


अमीन की क्लीन चिट के बाद भी जमीन 'रोक सूची' में डाली

यह पूरा मामला प्रशासनिक संरक्षण और पद के दुरुपयोग की पराकाष्ठा को दर्शाता है। पीड़ित ललन कुमार ने साल 2012 में मौजा-दौलतपुर में विधिवत रूप से 14 कट्ठा भूमि खरीदी थी, जिस पर उनका मकान और दुकान भी बना हुआ है। हैरानी की बात यह है कि इसी खाता-खेसरा से अन्य 10 लोगों ने भी जमीन खरीदी थी, जिनका दाखिल-खारिज वर्षों पहले हो चुका है। लेकिन पीड़ित के मामले को अंचल कार्यालय द्वारा जानबूझकर "ROK सूची" में डाल दिया गया, जिससे उनका विवरण ऑनलाइन पोर्टल से गायब हो गया। लंबी जद्दोजहद के बाद जब फरवरी 2026 में ऑनलाइन आवेदन हुआ, तो अमीन और संबंधित कर्मचारियों की स्थल जांच रिपोर्ट पूरी तरह सकारात्मक (Positive) आई, फिर भी रिश्वत न मिलने के कारण इस क्लीन चिट को दरकिनार कर दिया गया।


"चाहे CM से कहवा लें, बिना पैसे काम नहीं होगा"— भ्रष्ट तंत्र की चुनौती

शिकायती पत्र में अंचल कार्यालय के भीतर फैले बेखौफ भ्रष्टाचार की पोल खोलने वाली एक बेहद चौंकाने वाली बात सामने आई है। पीड़ित को कार्यालय की तरफ से स्पष्ट शब्दों में धमकी देते हुए कहा गया, "चाहे आप DM, Secretary, Minister या मुख्यमंत्री से कहवा दीजिए, जब तक पैसा नहीं देंगे तब तक काम नहीं होगा, क्योंकि हमें भी ऊपर तक पैसा देना पड़ता है।" यह बयान साबित करता है कि स्थानीय स्तर पर भ्रष्ट अधिकारियों के हौसले कितने बुलंद हैं। पीड़ित सितंबर 2025 से लेकर अब तक बेगूसराय के जिलाधिकारी और राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के एसीएस (ACS) को लगातार 5 बार शिकायती ईमेल भेज चुके थे, लेकिन लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।


CO दंपत्ति पर आय से अधिक संपत्ति का आरोप और विजिलेंस जांच की मांग

इस मामले में एक और बड़ा मोड़ तब आया जब वर्तमान अंचलाधिकारी प्रीति कुमारी के पति उमाशंकर यादव के भी राजस्व विभाग में ही सीओ (CO) के पद पर तैनात होने की बात सामने आई। आरोपी महिला सीओ के पति के खिलाफ भी पहले से कई गंभीर विभागीय मामले और जांच लंबित बताई जा रही है। पीड़ित ललन कुमार ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि इस पूरे भ्रष्ट तंत्र और सीओ दंपत्ति की संपत्ति की निगरानी (विजिलेंस) या किसी स्वतंत्र विशेष जांच टीम (SIT) से उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही, रिश्वत मांगने वाली अंचलाधिकारी और कंप्यूटर ऑपरेटर को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए।


जनता के टूटते भरोसे और सख्त कार्रवाई का इंतजार

शिकायतकर्ता ने सरकार और आला अधिकारियों को चेतावनी दी है कि यदि अंचल कार्यालयों में चल रहे ऐसे गंभीर मामलों में कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो बिहार की भूमि और राजस्व व्यवस्था में व्याप्त इस गहरे भ्रष्टाचार से आम जनता का शासन प्रणाली से भरोसा पूरी तरह उठ जाएगा। अब जबकि मामला सीधे विभाग के मंत्री के संज्ञान में है और गोपनीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं, बेगूसराय की जनता की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या पीड़ित ललन कुमार को न्याय मिल पाएगा और दोषियों को उनके किए की सजा मिलेगी या नहीं।