Bihar Panchayat Poll: बिहार पंचायत चुनाव पर इस कारण लगा है ब्रेक! अब पुराने समीकरण होंगे ध्वस्त, इस दिन कराएंगे जाएंगे चुनाव

Bihar Panchayat Poll: बिहार में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच चुनावी रण का इंतजार बढ़ता दिख रहा है। पंचायतों के नए परिसीमन, वार्डों के पुनर्गठन और आरक्षण से जुड़ी कवायद पूरी होने में लग रहे वक्त के कारण 2026 ...

Bihar Panchayat Poll
बिहार पंचायत चुनाव- फोटो : social Media

Bihar Panchayat Poll: बिहार में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच चुनावी रण का इंतजार बढ़ता दिख रहा है। पंचायतों के नए परिसीमन, वार्डों के पुनर्गठन और आरक्षण से जुड़ी कवायद पूरी होने में लग रहे वक्त के कारण 2026 में चुनाव कराने की प्रक्रिया प्रभावित हुई है। राज्य निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर भी 2026 के पंचायत परिसीमन से जुड़े ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, जिला परिषद और वार्ड सदस्य के लिए अधिसूचनाएं तथा निगरानी संबंधी अपडेट दर्ज हैं।

परिसीमन ने बदला पंचायतों का नक्शा

पंचायत चुनाव की राह में सबसे बड़ी कवायद परिसीमन की है। इसके तहत पंचायतों और उनके क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का नए सिरे से निर्धारण किया जा रहा है। राज्य निर्वाचन आयोग के मुताबिक ग्राम पंचायतों के क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन जनसंख्या के आधार पर किया जाता है, जबकि पंचायत समिति और जिला परिषद के निर्वाचन क्षेत्रों का भी निर्धारित आबादी के अनुरूप पुनर्गठन होता है।आयोग के रिकॉर्ड से पता चलता है कि अगस्त 2026 तक भी परिसीमन से संबंधित नक्शों, जनसंख्या आंकड़ों और भौगोलिक विवरणों को दुरुस्त करने की कवायद जारी थी। 17 अगस्त को परिसीमन के लिए छूटे हुए नक्शे और जनसंख्या संबंधी आंकड़े उपलब्ध कराने से जुड़ा निर्देश भी जारी हुआ था।

आरक्षण का नया हिसाब, पुराने समीकरण होंगे ध्वस्त

इस बार चुनावी तस्वीर पर आरक्षण का नया रोस्टर भी असर डाल सकता है। लगातार दो चक्रों से आरक्षित सीटों पर आरक्षण की स्थिति बदलने के कारण कई संभावित प्रत्याशियों के सियासी समीकरण उलट सकते हैं। खासकर अति पिछड़ा वर्ग के आरक्षण को लेकर समर्पित आयोग की भूमिका अहम है। सितंबर में पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने कहा था कि अति पिछड़े वर्गों के प्रतिनिधित्व और सामाजिक-आर्थिक स्थिति के आकलन के लिए समर्पित आयोग को अध्ययन का जिम्मा दिया गया है।राज्य निर्वाचन आयोग के पोर्टल पर 2026 के पंचायत आम निर्वाचन के लिए आरक्षण से जुड़े प्रपत्र, दावा-आपत्ति और आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया के संबंध में भी कई निर्देश उपलब्ध हैं।

भावी प्रत्याशियों की बढ़ी बेचैनी

परिसीमन, दावा-आपत्ति के निपटारे, नए आरक्षण रोस्टर और जरूरी प्रशासनिक मंजूरियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही चुनावी कार्यक्रम आगे बढ़ सकेगा। ऐसे में 2026 के बजाय 2027 में पंचायत चुनाव होने की संभावना को लेकर चर्चाएं तेज हैं। हालांकि, अंतिम चुनाव कार्यक्रम राज्य निर्वाचन आयोग की औपचारिक घोषणा से ही स्पष्ट होगा।चुनाव टलने की आहट ने गांव की सियासत में हलचल बढ़ा दी है। मुखिया, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य, वार्ड सदस्य और अन्य पदों के लिए तैयारी कर रहे संभावित प्रत्याशी अब नए परिसीमन और आरक्षण सूची का इंतजार कर रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि नई सीमाओं और नए आरक्षण रोस्टर के बाद किसका इलाका बदलेगा और किसकी चुनावी जमीन खिसकेगी।