कप्तान साहब की भारी फजीहत: एसपी साहब के 'दुलरुआ' बॉडीगार्ड पर गिरी गाज, उगाही के खेल का हुआ भंडाफोड़
बिहार पुलिस के दामन पर एक बार फिर 'खाकी' और 'खास' के गठजोड़ ने गहरा दाग लगा दिया है।पहली बार पूर्ण जिले की कमान संभाल रहे एक एसपी (कप्तान) के अंगरक्षक पर लगे गंभीर आरोपों ने महकमे की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
बिहार पुलिस के दामन पर एक बार फिर 'खाकी' और 'खास' के गठजोड़ ने गहरा दाग लगा दिया है। एक तरफ जहाँ प्रदेश पुलिस अपराध नियंत्रण के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं पहली बार पूर्ण जिले की कमान संभाल रहे एक एसपी (कप्तान) के अंगरक्षक पर लगे गंभीर आरोपों ने महकमे की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। चर्चा है कि साहब का यह 'दुलरुआ' बॉडीगार्ड लंबे समय से वसूली और उगाही के काले खेल में लिप्त था। यह मामला अब प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है, जिससे पुलिस विभाग की भारी फजीहत हो रही है।
साहब का अंधविश्वास और तबादलों में बॉडीगार्ड की 'अदृश्य' दखलअंदाजी
सूत्रों की मानें तो यह बॉडीगार्ड कप्तान साहब का इतना विश्वासपात्र था कि साहब उसे हर जगह अपने 'ललाट के चंदन' की तरह साथ रखते थे। हैरानी की बात यह है कि जिले के बड़े फैसलों और पुलिसकर्मियों के तबादलों में भी इस सिपाही की अदृश्य दखलअंदाजी रहती थी। साहब के करीब होने का फायदा उठाकर उसने अपना एक अलग प्रभाव क्षेत्र बना लिया था। पूर्व में कई शिकायतें मिलने के बावजूद 'साहब' की छत्रछाया ने उसे हर बार बचा लिया। वह न केवल साहब की सुरक्षा करता था, बल्कि उनके निजी और सरकारी 'मैनेजमेंट' के कार्यों का भी निर्वहन करने लगा था।
मुख्यालय तक पहुँची आंच: कप्तान भी आए घेरे में
जब उगाही के इस खेल ने सीमाओं को लांघना शुरू किया, तो इसकी गूँज सीधे पुलिस मुख्यालय तक जा पहुँची। आरोप है कि गार्ड ने साहब के नाम का इस्तेमाल कर अवैध वसूली का एक बड़ा नेटवर्क फैला रखा था। इस मामले के उजागर होने के बाद अब सीधे कप्तान (एसपी) की कुर्सी भी जांच की आंच में है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या साहब को अपने अंगरक्षक की इन काली करतूतों की भनक नहीं थी, या फिर जानबूझकर इसे नजरअंदाज किया गया? रक्षक के भक्षक बनने की इस कहानी ने जनता के बीच पुलिस के भरोसे को हिलाकर रख दिया है।
साहब को मिली कड़ी फटकार, अंगरक्षक को जिला बदर की सजा
कहते हैं कि पाप का घड़ा एक दिन जरूर भरता है। पुलिस मुख्यालय द्वारा कराई गई गोपनीय जांच में जब पुख्ता सबूत मिले, तो उच्चाधिकारी काफी नाराज हुए। चूंकि मामला एक आईपीएस अधिकारी के सम्मान से जुड़ा था, इसलिए साहब को जमकर फटकार लगाई गई और उनके क्रियाकलापों का पूरा लेखा-जोखा उनके सामने रखकर सख्त चेतावनी दी गई। वहीं, उनके 'दुलरुआ' बॉडीगार्ड को तत्काल प्रभाव से साहब कि सुरक्षा की जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया और सजा के तौर पर उसे उसके मूल जिला बल यानी 'बाबा वैद्यनाथ' की धरती (देवघर) से सटे बिहार के एक जिला बल में भेज दिया गया है।