राजस्व अदालतों में 'अंधेरगर्दी' पर नकेल: अंचल अधिकारियों को अल्टीमेटम, अब हर दिन सार्वजनिक करनी होगी मुकदमों की सूची

बिहार में अंचल अधिकारियों की मनमानी अब नहीं चलेगी। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने 1 अप्रैल 2026 से सभी 537 अंचल कार्यालयों में 'डेली कॉज लिस्ट' का प्रकाशन अनिवार्य कर दिया है। अब जनता को सुनवाई की तारीख के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।

बिहार राजस्व विभाग नोटिस - अंचल अधिकारी दैनिक कार्य सूची (Ca

Patna - बिहार के राजस्व न्यायालयों में जारी अव्यवस्था और आम जनता की परेशानी को देखते हुए सरकार ने अब कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने राज्य के सभी 537 अंचल अधिकारियों (CO) के लिए 'डेली कॉज लिस्ट' (दैनिक कार्य सूची) का प्रकाशन अनिवार्य कर दिया है। 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाली इस व्यवस्था में किसी भी प्रकार की कोताही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सीधे अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी 

जनता की परेशानी और सीएम की 'समृद्धि यात्रा' का असर

बिहार सरकार का यह कड़ा फैसला माननीय मुख्यमंत्री की 'समृद्धि यात्रा' और उपमुख्यमंत्री के 'जन कल्याण संवाद' में मिली शिकायतों का नतीजा है । जांच में यह कड़वा सच सामने आया कि अंचल अधिकारियों की अदालतों में भारी अराजकता व्याप्त है । बिना किसी पूर्व सूचना के मुकदमों को स्थगित कर देना और सुनवाई की तारीखों को गुप्त रखना आम बात हो गई थी, जिससे गरीब जनता को भारी मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही थी 

सिविल कोर्ट की तर्ज पर अब दिखेगी पारदर्शिता

विभागीय आदेश के अनुसार, अब अंचल अधिकारियों को भी पटना उच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित "Civil Court Rules, 1957" का पालन करना होगा । चूंकि राजस्व न्यायालय भी कई अधिनियमों के तहत दीवानी अदालतों की श्रेणी में आते हैं, इसलिए अब उन्हें भी हर दिन सुनवाई से पहले शाम 8:00 बजे तक अगले दिन की सूची (Cause List) प्रकाशित करनी होगी । इसमें केस नंबर, पक्षकारों के नाम और सुनवाई का क्रम स्पष्ट रूप से दर्ज करना अनिवार्य है 

डिजिटल ट्रैक पर राजस्व अदालतें: SMS और वेबसाइट पर अपडेट

पारदर्शिता को केवल कागजों तक सीमित न रखकर इसे पूरी तरह डिजिटल बनाया जा रहा है । अब कॉज लिस्ट न केवल कार्यालय के सूचना पट्ट पर चस्पा होगी, बल्कि इसे विभागीय वेबसाइट www.biharbhumi.bihar.gov.in पर भी अपलोड करना होगा । इसके अलावा, पहले की तरह आवेदकों को SMS के माध्यम से भी सुनवाई की जानकारी भेजी जाएगी । इस पूरी प्रणाली की निगरानी का जिम्मा जिला समाहर्त्ता (DM) को सौंपा गया है 

अधिकारियों की मनमानी खत्म, बदलाव के लिए डीएम की मंजूरी जरूरी

विभाग ने अधिकारियों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए एक और बड़ा पेंच फंसा दिया है । एक बार कॉज लिस्ट प्रकाशित होने के बाद, अंचल अधिकारी अपनी मर्जी से उसमें कोई फेरबदल नहीं कर सकेंगे । यदि किसी कारणवश सूची में बदलाव की आवश्यकता पड़ती है, तो इसके लिए संबंधित जिले के समाहर्त्ता (DM) से औपचारिक अनुमोदन लेना अनिवार्य होगा । यह नियम "Ease of Living" के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक बड़ा क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है