Bihar Land registration: बिहार में जमीन-मकान रजिस्ट्री के नियमों में बड़ा बदलाव,अब नहीं काटने होंगे दफ्तरों के चक्कर, ऑनलाइन गड़बड़ी होने पर अब इतने दिनों में होगा एक्शन, लापरवाह अधिकारियों पर होगी कार्रवाई

Bihar Land registration: जमीन और मकान के निबंधन में होने वाली डिजिटल गलतियों से आम जनता को राहत देने के लिए सरकार ने अब सख्त और व्यवस्थित कदम उठाया है।...

Bihar simplifies property registry Fast online fixes now
रजिस्ट्री में सुधार का नया नियम- फोटो : social Media

Bihar Land registration: जमीन और मकान के निबंधन में होने वाली डिजिटल गलतियों से आम जनता को राहत देने के लिए सरकार ने अब सख्त और व्यवस्थित कदम उठाया है। मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी कर दी है, जिसके तहत अब किसी भी तकनीकी या मानवीय त्रुटि को तय समय सीमा के भीतर अनिवार्य रूप से सुधारा जाएगा। नई व्यवस्था के तहत अलग-अलग स्तर पर सुधार के लिए 3 से 7 दिनों की समय सीमा निर्धारित की गई है, जबकि पूरी प्रक्रिया अधिकतम 22 दिनों के भीतर हर हाल में पूरी करनी होगी। इससे निबंधन दस्तावेजों में होने वाली टाइपिंग, स्कैनिंग, डेटा एंट्री या अपलोडिंग संबंधी त्रुटियों से होने वाली परेशानियों पर रोक लगेगी।

उप निबंधन महानिरीक्षक डॉ. संजय कुमार द्वारा जारी निर्देश में सभी क्षेत्रीय और जिला स्तर के निबंधन अधिकारियों को सख्त अनुपालन सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया है। यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। एसओपी के अनुसार अब टाइपिंग गलती, खाता-खेसरा में त्रुटि, नाम में गलती, गलत पेज अपलोड या स्कैनिंग में हुई गड़बड़ी जैसे मामलों को पारदर्शी तरीके से सुधारा जाएगा। हर सुधार से पहले मूल दस्तावेज से मिलान अनिवार्य होगा, ताकि किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ या अनियमितता की संभावना समाप्त हो सके।

इस पूरी प्रक्रिया में तीन स्तरों पर समयबद्ध जिम्मेदारी तय की गई है-निबंधन पदाधिकारी को 7 दिन में प्रारंभिक जांच रिपोर्ट देनी होगी, प्रमंडलीय सहायक निबंधन महानिरीक्षक को भी 7 दिनों में अंतिम आदेश पारित करना होगा, जबकि विभागीय स्तर पर 3 कार्य दिवस में फाइल आगे बढ़ानी होगी। सिस्टम इंटीग्रेटर को 5 दिनों के भीतर डिजिटल संशोधन करना अनिवार्य किया गया है।

सबसे अहम बात यह है कि अब मूल दस्तावेज में किसी भी प्रकार का प्रत्यक्ष बदलाव नहीं किया जाएगा। इसके लिए अलग से सुधारात्मक या कैंसिल डीड तैयार कर अलग पंजीकरण होगा, जिससे कानूनी पारदर्शिता बनी रहे

सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि हर संशोधन का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाएगा और त्रैमासिक रिपोर्ट तथा वार्षिक आईटी ऑडिट अनिवार्य होगा। किसी भी प्रकार का डेटा संशोधन बिना सक्षम प्राधिकार की अनुमति के पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा और आईटी सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन दंडनीय अपराध माना जाएगा। कुल मिलाकर, यह नई व्यवस्था न सिर्फ तकनीकी सुधार की दिशा में बड़ा कदम है, बल्कि जमीन-मकान निबंधन प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही को भी नए स्तर पर ले जाने वाली पहल मानी जा रही है