भूमिहार की नाराज़गी दूर करने में जुटी भाजपा ! विजय सिन्हा प्रकरण के बाद एमएलसी उप चुनाव में डैमेज कंट्रोल, जानिए कौन हैं अरविंद शर्मा

भूमिहार जाति को लेकर हाल के दिनों में यह चर्चा रही कि एक बड़ा वर्ग भाजपा से नाराज है लेकिन अब भाजपा ने इसका डैमेज कंट्रोल एमएलसी उप चुनाव में करने का संकेत दिया है.

Bhumihar angry with BJP
Bhumihar angry with BJP- फोटो : news4nation

Bhumihar : बिहार की सियासत में भूमिहार मतदाताओं की नाराज़गी को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच भारतीय जनता पार्टी ने बड़ा राजनीतिक संकेत दिया है। पार्टी ने बिहार विधान परिषद उपचुनाव में अरविंद शर्मा को उम्मीदवार बनाकर अपने पारंपरिक वोटर माने जाने वाले भूमिहार वर्ग को साधने की कोशिश की है। दरअसल, यह सीट मंगल पांडेय के सिवान से विधायक चुने जाने के बाद खाली हुई थी। पांडेय ब्राह्मण समुदाय से आते हैं, ऐसे में कयास लगाए जा रहे थे कि पार्टी किसी ब्राह्मण चेहरे को ही उम्मीदवार बनाएगी। लेकिन भाजपा ने इस बार समीकरण बदलते हुए भूमिहार समाज से आने वाले अरविंद शर्मा को मैदान में उतार दिया।


गुरुवार को अरविंद शर्मा (सूर्य कुमार शर्मा) ने नामांकन दाखिल किया। 30 अप्रैल नामांकन की अंतिम तिथि थी और अब तक विपक्ष की ओर से कोई उम्मीदवार सामने नहीं आया है, ऐसे में उनका निर्विरोध निर्वाचन लगभग तय माना जा रहा है। नामांकन के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उप मुख्यमंत्री विजय चौधरी और विजेंद्र यादव, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, जदयू विधायक दल के नेता श्रवण कुमार, जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा, हम के संतोष सुमन सहित कई अन्य एनडीए नेता मौजूद रहे।


भूमिहार नाराज़गी और विजय सिन्हा फैक्टर

बिहार में पिछले कुछ समय से यह चर्चा जोर पकड़ रही थी कि भूमिहार समुदाय भाजपा से नाराज़ है। इसकी एक बड़ी वजह विजय कुमार सिन्हा से जुड़ा घटनाक्रम माना गया। जब मुख्यमंत्री पद के लिए सम्राट चौधरी के नाम पर फैसला हुआ, तब विजय सिन्हा ने सार्वजनिक तौर पर कहा था कि उन्होंने “कमांडर के आदेश” का पालन करते हुए सम्राट चौधरी के नाम का प्रस्तावक बनना स्वीकार किया। इस बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में यह संदेश गया कि भूमिहार नेतृत्व को दरकिनार किया गया है, जिससे इस वर्ग में असंतोष पनपा।


भूमिहार वोट बैंक का महत्व

बिहार में भूमिहार समुदाय की आबादी लगभग 3 प्रतिशत के बीच मानी जाती है, लेकिन राजनीतिक प्रभाव के लिहाज से यह वर्ग कई सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाता है। खासकर मगध, शाहाबाद और कुछ उत्तर बिहार के इलाकों में इनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है। मौजूदा विधानसभा में भी भूमिहार समुदाय के कई विधायक विभिन्न दलों से आते हैं, जिनमें भाजपा की हिस्सेदारी महत्वपूर्ण है। ऐसे में इस वर्ग की नाराज़गी किसी भी दल के लिए चुनावी समीकरण बिगाड़ सकती है।

अरविंद शर्मा पर दांव

अरविंद शर्मा अरवल जिले के बंभई गांव के रहने वाले हैं और लंबे समय से पटना में सक्रिय हैं। संगठन में जिलाध्यक्ष से लेकर कई जिलों के प्रभारी रह चुके शर्मा को सम्राट चौधरी के प्रदेश अध्यक्ष कार्यकाल में प्रदेश कार्यालय प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई थी। पार्टी के भीतर उन्हें एक शांत और रणनीतिक रूप से मजबूत नेता माना जाता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अरविंद शर्मा को उम्मीदवार बनाकर भाजपा ने एक साथ दो संदेश देने की कोशिश की है पहला, संगठन के समर्पित नेताओं को आगे बढ़ाने का, और दूसरा, भूमिहार समुदाय को साधने का।