Bihar Vidhanparishad : एमएलसी दिनेश सिंह को काटने से मर जाएगा सारा आवारा कुत्ता... विधान परिषद में स्ट्रीट डॉग पर नियंत्रण के लिए आया हैरान करने वाला सुझाव
आवारा कुत्तों पर नियंत्रण के लिए अब तक अलग अलग फार्मूला आते रहा है लेकिन विधान परिषद में जब यह बात सामने आई कि एमएलसी दिनेश सिंह को काटने से कुत्ता भी मार जाएगा तो यह सुनते ही सदन में सभी सदस्य हैरान हो गए.

Bihar Vidhanparishad : बिहार विधान परिषद में बुधवार को राज्य में आवारा कुत्तों का मामला उठा. लेकिन आवारा कुत्तों पर नियंत्रण कैसे हो इसके लिए जो बातें सामने आई उससे सभी सदस्य हैरान हो गए. सदन में जब इस पर चर्चा हो रही थी तब परिषद के अध्यक्ष अवधेश नारायण सिंह ने कहा कि एमएलसी दिनेश सिंह को अगर कुत्ता काटेगा तो वही मर जाएगा. इस पर संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी एक कदम आगे बढ़ते हुए बोले कि अब एमएलसी बंशीधर व्रजवासी की जिम्मेदारी है कि वे मुजफ्फरपुर के सारे आवारा कुत्तों (जिनकी संख्या करीब 8 हजार है) को लाकर एमएलसी दिनेश सिंह को कटा दें. सदन में हुई इस चर्चा से हर कोई हैरान हो गया.
दरअसल, एमएलसी बंशीधर व्रजवासी ने मुजफ्फरपुर में बड़ी संख्या में कुत्तों के होने और कई लोगों को काटने का सवाल किया. यहां कि कुत्तों के काटने से लोगों के मरने की भी बातें कही गई. इस पर मंत्री जीवेश मिश्र ने कहा कि आवारा कुत्ते हैं लेकिन उनके काटने से किसी की मौत नहीं हुई है. साथ ही ऐसे कुत्तों और बेसहारा गायों को भी पकड़ने का अभियान चलाया जा रहा है.
हालाँकि उनके जवाब से असंतुष्टि जाहिर करते हुए बंशीधर व्रजवासी ने कहा खुद उनके बेटे को ही कुते ने काटा है. यहां तक कि मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मुजफ्फरपुर में करीब 8 हजार आवारा कुत्ते हैं. उन्होंने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देकर कुत्तों के काटने से हुई मौत का भी जिक्र किया. यहां तक कि मुजफ्फरपुर में डॉग कैचर वाहन होते हुए भी कार्रवाई नहीं हो रही है. इसी बीच अध्यक्ष अवधेश नारायण सिंह ने कहा कि अगर दिनेश बाबू को कुत्ता काटेगा तो वह कुत्ता ही मर जाएगा. गौरतलब है कि दिनेश सिंह भी मुजफ्फरपुर से ही आते हैं.
इसी बीच, विजय कुमार चौधरी ने चुटकी लेते हुए कहा कि आवारा कुत्तों पर नियंत्रण का तरीका तो अध्यक्ष ने बता ही दिया है. अब एमएलसी बंशीधर व्रजवासी की जिम्मेदारी है कि वे मुजफ्फरपुर के सारे आवारा कुत्तों को दिनेश सिंह के पास ला दें. इस प्रकार के मनोविनोद वाली चर्चा से सदन में सदस्यों के बीच हंसी-ठिठोली होने लगी.