Bihar Flood: बिहार में बाढ़ का कहर, गंगा में समाए मंदिर, टूट रहे तटबंध, इन गांवों पर जलप्रलय का खौफ

Bihar Flood: बिहार में नदियों का मिजाज इस वक्त बेहद खौफनाक हो चुका है। नेपाल के तराई और सीमावर्ती इलाकों में लगातार हो रही बारिश का असर अब बिहार में साफ दिखाई दे रहा है।...

Bihar Flood
बिहार में बाढ़ का कहर- फोटो : social Media

Bihar Flood: बिहार में नदियों का मिजाज इस वक्त बेहद खौफनाक हो चुका है। नेपाल के तराई और सीमावर्ती इलाकों में लगातार हो रही बारिश का असर अब बिहार में साफ दिखाई दे रहा है। गंगा, गंडक, सोन और सरयू का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। कई जिलों में नदी की धार इतनी बेदर्द हो गई है कि तटबंध और घर उसके सामने बेबस नजर आ रहे हैं। भागलपुर से लेकर पश्चिम चंपारण और रोहतास तक बाढ़, कटाव और जलप्रलय का खतरा गहराता जा रहा है।

भागलपुर के खरीक में गंगा की तेज और बेकाबू धारा ने करीब सौ साल पुराने बजरंगबली और चैती दुर्गा मंदिरों को निगल लिया। नदी के रौद्र रूप ने तटबंध के हिस्से को भी बहा दिया। पांच वार्ड खाली कराए गए हैं और पांच हजार से ज्यादा लोग प्रभावित बताए जा रहे हैं। राघोपुर दियारा में गंगा का कटाव 35 से 40 मीटर की गहराई तक जारी है। नदी की धार अब आबादी और सुरक्षा तंत्र के लिए गंभीर चुनौती बन चुकी है।सबसे भयावह तस्वीर राघोपुर-काजीकोरैया तटबंध से सामने आ रही है। करीब 350 मीटर हिस्सा गंगा में समा चुका है। पुरानी रेलवे लाइन की तरफ अब महज करीब 100 मीटर तटबंध बचा है। अगर यह सुरक्षा कवच भी नदी की सनक में बह गया तो आसपास के कई गांवों में पानी घुसने का खतरा पैदा हो जाएगा। रेलवे लाइन को बचाने के लिए बालू भरी बोरियां, हाथी पांव और बंबू रोल लगाए जा रहे हैं।23 अगस्त को काजीकोरैया-राघोपुर में करीब 30 मीटर का बांध टूटा था, जो अब बढ़कर करीब 300 मीटर तक पहुंच गया है। 

पटना भी इस आफत से अछूता नहीं है। दीघा घाट पर गंगा खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जबकि पुनपुन लाल निशान से 160 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच चुकी है। नकटा दियारा, पन्नापुर दियारा, मोकामा और बख्तियारपुर के दियारा इलाकों में स्कूल बंद कर दिए गए हैं। नदी का पानी लगातार बढ़ा तो ग्रामीण इलाकों में हालात और संगीन हो सकते हैं।

उधर रोहतास में इंद्रपुरी बराज पर पानी का दबाव पांच साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। यहां 5.20 लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी पहुंचने के बाद बराज के सभी 69 फाटक खोल दिए गए हैं। सोन के तटीय इलाकों में रेड अलर्ट है। बाणसागर और भीम बराज से डेढ़-डेढ़ लाख क्यूसेक तथा कनहर नदी से सवा लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद सोन किनारे बसे इलाकों में दहशत और बढ़ गई है।

गोपालगंज में गंडक खतरे के निशान से नौ सेंटीमीटर ऊपर है। बक्सर में गंगा वार्निंग लेवल से 89 सेंटीमीटर और आरा में खतरे के निशान से 40 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। यानी नदी किनारे बसे इलाकों में खतरे की घंटी लगातार बज रही है।

सहरसा में तिलाबे नदी में नाव पलटने से एक महिला की मौत हो गई, जबकि एक बच्ची लापता है। वहीं मधुबनी के तीन मजदूर नेपाल में हाइड्रोपावर साइट पर आई आपदा के बाद से लापता बताए जा रहे हैं।

पश्चिम चंपारण के योगापट्टी और बगहा में गंडक का कटाव ग्रामीणों के लिए मुसीबत बन गया है। हालात ऐसे हैं कि लोग अपने आशियाने खुद तोड़कर सामान सुरक्षित स्थानों पर ले जाने को मजबूर हैं। वाल्मीकिनगर बराज से पानी छोड़े जाने के कारण गोपालगंज में गंडक का जलस्तर अगले चरण में 8 से 10 सेंटीमीटर और बढ़ने की आशंका है।

बाढ़ प्रभावित इलाकों में NDRF की 9 और SDRF की 27 टीमें तैनात की गई हैं। पथ निर्माण मंत्री ईं. कुमार शैलेंद्र के अनुसार तटबंधों और संवेदनशील इलाकों को सुरक्षित रखने के लिए सरकार की ओर से लगातार प्रयास  किए जा रहे हैं। भागलपुर में गंगा की बदलती धारा को नियंत्रित करने के लिए ड्रेजिंग मशीन से गाद निकालने का काम भी शुरू किया गया है।कटाव की वजह को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। भागलपुर में नए विक्रमशिला पुल के निर्माण के कारण गंगा की धारा में बदलाव की आशंका जताई जा रही है। सरकार IIT की विशेषज्ञ टीम से नदी की बदलती धारा का अध्ययन कराने की तैयारी में है, ताकि इसके कारणों को समझकर नदी की धारा को पुराने स्वरूप में लाने का रास्ता तलाशा जा सके।

गंगा की यह बेलगाम धार अगर इसी तरह आगे बढ़ती रही तो तटबंध, रेलवे लाइन और दियारा की बस्तियों पर संकट और गहरा सकता है। फिलहाल बिहार के कई इलाकों में बाढ़ का खौफ और कटाव की दहशत लोगों की नींद उड़ाए हुए है।