Bihar Budget Session: सदन में गूंजा घोसी को अनुमंडल बनाने की मांग, विधायक ऋतुराज सिंह ने सरकार से मांगा हिसाब, मंत्री के जवाब में उलझी प्रक्रिया की राजनीति

ऋतुराज सिंह ने सरकार से दो टूक पूछा कि क्या यह बात सही है कि तमाम मानकों पर खरा उतरने के बावजूद घोसी को पूर्ण अनुमंडल का दर्जा नहीं दिया गया है।

Demand to make Ghosi a sub division echoes in House govt gri
सदन में गूंजा घोसी को अनुमंडल बनाने की मांग- फोटो : reporter

Bihar Budget Session: बिहार विधानसभा के पटल पर आज घोसी को पूर्ण अनुमंडल का दर्जा दिलाने की मांग पूरी मजबूती के साथ उठी। घोसी विधायक ऋतुराज सिंह  ने सदन में सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए सवाल दागा कि जहानाबाद जिला अंतर्गत घोसी आज भी सिर्फ पुलिस अनुमंडल बनकर क्यों काम कर रहा है, जबकि वहां की जनसंख्या, क्षेत्रफल और प्रशासनिक बोझ एक पूर्ण अनुमंडल के बराबर है। विधायक ने कहा कि घोसी की जनता को आज भी राजस्व, भूमि सुधार, आपूर्ति और अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए दूर-दराज के अनुमंडल मुख्यालयों के चक्कर काटने पड़ते हैं, जो साफ तौर पर क्षेत्रीय भेदभाव को उजागर करता है।

ऋतुराज सिंह ने सरकार से दो टूक पूछा कि क्या यह बात सही है कि तमाम मानकों पर खरा उतरने के बावजूद घोसी को पूर्ण अनुमंडल का दर्जा नहीं दिया गया है। यदि हां, तो सरकार इस दिशा में अब तक क्या कदम उठा चुकी है और आगे क्या कार्रवाई करने का इरादा रखती है। वहीं, अगर सरकार इसे जरूरी नहीं मानती, तो इसके पीछे की वजह क्या है यह भी सदन के सामने स्पष्ट किया जाए।

विधायक की इस तल्ख आवाज के बाद सदन में सियासी सरगर्मी तेज हो गई। जवाब में मंत्री ने प्रशासनिक प्रक्रिया का हवाला देते हुए कहा कि राज्य में जिला, अनुमंडल, प्रखंड और अंचल के पुनर्गठन के लिए एक सुव्यवस्थित ढांचा तय किया गया है। मंत्री के मुताबिक, इस उद्देश्य से माननीय उप मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में “मंत्रियों के समूह” का गठन किया गया है। साथ ही, इन प्रस्तावों को परखने और आगे बढ़ाने के लिए “सचिवों की समिति” भी गठित है।

मंत्री ने बताया कि पुनर्गठन से जुड़े किसी भी प्रस्ताव को पहले जिला पदाधिकारी और प्रमंडलीय आयुक्त के माध्यम से औचित्यपूर्ण संलेख के साथ सचिवों की समिति के समक्ष रखा जाता है। समिति द्वारा लिए गए निर्णय के आलोक में ही आगे की कार्रवाई होती है। मंत्री ने साफ किया कि वर्तमान में जहानाबाद जिला अंतर्गत घोसी को पूर्ण अनुमंडल बनाए जाने के संबंध में जिला पदाधिकारी या प्रमंडलीय आयुक्त से निर्धारित प्रक्रिया के तहत कोई प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है।

इस जवाब के बाद सवाल यह खड़ा हो गया है कि घोसी को अनुमंडल का दर्जा मिलने में बाधा राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी है या फिर फाइलों में उलझी प्रशासनिक प्रक्रिया। विधायक ऋतुराज सिंह की आवाज ने मुद्दे को एक बार फिर सियासी एजेंडे पर ला खड़ा किया है, अब देखना यह है कि यह गूंज सदन से बाहर धरातल तक कब पहुंचती है।