Bihar News : पटना हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, ड्यूटी के दौरान हृदय गति रुकने से मृत पुलिसकर्मी के परिजनों को मिलेगा अनुग्रह अनुदान
Bihar News : पटना हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के दौरान तैनात जिस पुलिसकर्मी की हृदय गति रुकने से मौत हो जाती है, उनके परिजनों को अनुग्रह अनुदान राशि दी जानी चाहिए......पढ़िए आगे
PATNA : पटना हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण निर्णय में ये कहा कि कानून व्यवस्था बनाये रखने के लिए तैनात पुलिस कर्मी की हृदय गति रुकने से हुई मौत पर अनुग्रह अनुदान राशि देना होगा। कोर्ट ने कहा कि सरकार पुलिसकर्मियों के मामले में सहानुभूति पूर्वक विचार करना चाहिए,न कि सरकारी संकल्प का आधार बना तकनीकी आधार पर खारिज करना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि पुलिस बल का मनोबल ऊंचा रखने के लिए सरकार कार्रवाई करें,ताकि मृत पुलिसकर्मियों के परिजनों को आर्थिक सहायता मिल सकें। बुधवार को जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस राणा बिक्रम सिंह की खंडपीठ ने जस्टिस संदीप कुमार के एकलपीठ के फैसला को बरकरार रखते हुए राज्य सरकार की ओर से दायर अपील को खारिज कर दिया।
गौरतलब है कि सरस्वती पूजा के दौरान मूर्ति विसर्जन को लेकर उठे विवाद में विधि व्यवस्था कायम रखने के लिए तैनात पुलिस निरीक्षक की मृत्यु पर उनके विधवा को अनुग्रह राशि देने से इंकार कर दिया गया था। मृतक इंस्पेक्टर की विधवा मधु भारती की ओर से हाईकोर्ट में केस दायर कर अनुग्रह राशि देने की गुहार लगाई गई थी। मामलें पर जस्टिस संदीप कुमार की एकलपीठ ने सुनवाई की। कोर्ट को बताया गया कि आवेदिका के पति जयप्रकाश गोपालगंज के सदर अंचल में पुलिस निरीक्षक के पद पर तैनात थे। उनका कहना था कि सरस्वती पूजा मूर्ति विसर्जन को लेकर उठे विवाद में विधि व्यवस्था बनाये रखने के लिए हथुआ के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के साथ तैनाती की गई थी।
इसी दौरान उनकी तबियत बिगड़ने पर सरकारी वाहन से डॉक्टर के पास लाया गया। जहां डॉक्टर ने हृदयगति रूक जाने से मृत्यु होने का मंतव्य दिया। उनका कहना था कि कर्तव्य के दौरान हुईं मौत पर सरकारी कर्मियों को अनुग्रह राशि देने का प्रावधान है। वहीं सरकारी वकील याचिका का विरोध करते हुए कहा कि कर्तव्य के दौरान उग्रवादी या अन्य हिंसक गतिविधियों में हुईं मौत पर सरकारी कर्मियों को अनुग्रह राशि देने का प्रावधान है। जबकि आवेदिका के पति की मृत्यु विधि व्यवस्था बनाये रखने के लिए तैनाती के दौरान हृदयगति रुकने से हुई हैं। ऐसे में अनुग्रह राशि नही दिया जा सकता।
कोर्ट ने दोनों पक्षों की ओर से प्रस्तुत तथ्यों को सुनने और सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के कई फैसलों के आधार पर कहा कि आवेदिका अनुग्रह राशि पाने की हकदार हैं। साथ ही अनुग्रह राशि का भुगतान मृत्यु के तारीख से 9 प्रतिशत की दर से भुगतान करने का आदेश दिया। साथ ही बेवजह मामला दायर करने के लिए बाध्य किये जाने को लेकर 25 हजार रुपया बतौर खर्च के रूप में देने का आदेश दिया। एकलपीठ के निर्णय को अपील दायर कर राज्य सरकार ने चुनौती दी गई थी। खंडपीठ ने अपील को खारिज करते हुए चार सप्ताह के भीतर आदेश का पालन करने का आदेश दिया।