रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गए पुल निर्माण निगम के एक्सक्यूटिव इंजीनियर को मिली सजा, निगरानी के स्पेशल जज ने दिया बड़ा फैसला

रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गए पुल निर्माण निगम के एक्सक्यूटि

Patna - बिहार चुनाव के बाद जबसे नई सरकार का गठन हुआ है। यहां काम का ढंग बदला हुआ नजर  आ रहा है। भ्रष्टाचार और अतिक्रमण को लेकर लगातार कार्रवाई  की जा रही है। जिसमें अब निगरानी के स्पेशल जज ने रिश्वतखोरी के 18 साल पुराने मामले में आरोपी इंजीनियर के खिलाफ बड़ा फैसला सुनाया है। 

है। शनिवार को निगरानी के विशेष न्यायाधीश मोहम्मद रुस्तम की अदालत ने बिहार राज्य पुल निर्माण निगम (डिवीजन-प्रथम), पटना के तत्कालीन कार्यपालक अभियंता (Executive Engineer) सह वरीय परियोजना पदाधिकारी विनय कुमार सिंह को दोषी करार दिया है। 

सजा और जुर्माना

अदालत ने विनय कुमार सिंह को भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत दोषी पाते हुए एक वर्ष के सश्रम कारावास की सजा दी है। इसके अतिरिक्त, उन पर 40 हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया है। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि यदि दोषी जुर्माने की राशि अदा नहीं करते हैं, तो उन्हें दो महीने की अतिरिक्त सजा काटनी होगी।

क्या था पूरा मामला?

इस मामले की जानकारी देते हुए विशेष लोक अभियोजक विजय भानू उर्फ पुट्टू बाबू ने बताया कि यह घटना करीब 18 साल पुरानी है। 24 अक्टूबर 2007 को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (Vigilance) की टीम ने एक जाल बिछाया था। उस समय विनय कुमार सिंह पटना के यारपुर स्थित पुल निर्माण निगम के कार्यालय में तैनात थे। आरोप था कि वे एक ठेकेदार, हरेंद्र सिंह से काम के बदले घूस मांग रहे थे। 

निगरानी की टीम ने कार्रवाई करते हुए उन्हें परिवादी ठेकेदार से 20 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। लंबी कानूनी प्रक्रिया और गवाहों के बयानों के आधार पर शनिवार को अदालत ने उन्हें दोषी मानते हुए यह फैसला सुनाया।