कभी 21 विधायक, अब सिर्फ 1 MLA ... बिहार में कायस्थ जाति से कभी मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष रहे अब राजनीतिक वजूद पर संकट
देश का संविधान तैयार करने की प्रक्रिया शुरू होने पर संविधान सभा के अंतरिम अध्यक्ष बिहार के वरिष्ठ नेता सच्चिदानंद सिन्हा बने थे, जो कायस्थ समाज से थे। संविधान सभा के अध्यक्ष और देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद भी कायस्थ थे .
Bihar News : बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार नीरज सिन्हा की हार के साथ ही बिहार की राजनीति में कायस्थ समाज के प्रतिनिधित्व को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। कभी बिहार की राजनीति और प्रशासन में प्रभावशाली मानी जाने वाली इस बिरादरी का विधानसभा में प्रतिनिधित्व अब घटकर महज एक विधायक तक सिमट गया है। वर्तमान में सिकटा से जनता दल (यू) के विधायक समृद्ध वर्मा ही बिहार विधानसभा में कायस्थ समाज का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। बांकीपुर उपचुनाव में भाजपा के नीरज को जनसुराज के प्रशांत किशोर से हार का सामना करना पड़ा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आजादी के बाद बिहार की राजनीति में कायस्थ समाज की मजबूत मौजूदगी रही है। देश का संविधान तैयार करने की प्रक्रिया शुरू होने पर संविधान सभा के अंतरिम अध्यक्ष बिहार के वरिष्ठ नेता सच्चिदानंद सिन्हा बने थे, जो कायस्थ समाज से थे। वहीं संविधान सभा के अध्यक्ष और देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद भी बिहार के कायस्थ समुदाय से ही आते थे। स्वतंत्र भारत के शुरुआती वर्षों में यह समाज राजनीति, प्रशासन, शिक्षा और न्यायपालिका में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा।
1952 में थे 21 विधायक, अब केवल एक
1952 में हुए बिहार विधानसभा के पहले चुनाव में 252 सीटों में से 21 विधायक कायस्थ समाज से चुनकर विधानसभा पहुंचे थे। उस समय यह संख्या बेहद प्रभावशाली मानी जाती थी। इसके बाद समय के साथ यह प्रतिनिधित्व लगातार घटता गया। 1952 – 21 विधायक, 1962 – 11 विधायक, 1969 – 7 विधायक, 1972 – 4 विधायक, 1977 – 9 विधायक, 1980 – 6 विधायक, 1985 – 5 विधायक, 1990 – 4 विधायक, 1995 – 7 विधायक, 2000 – 4 विधायक, 2005 – 4 विधायक, 2010 – 3 विधायक, 2015 – 4 विधायक, 2020 – 3 विधायक, 2025 – 2 विधायक, 2026 (बांकीपुर उपचुनाव के बाद) – 1 विधायक ही कायस्थ समुदाय से बचे हैं।
दो मुख्यमंत्री भी रहे कायस्थ समाज से
बिहार की राजनीति में कायस्थ समाज का प्रभाव केवल विधायकों तक सीमित नहीं रहा। वर्ष 1963 में के.बी. सहाय बिहार के चौथे मुख्यमंत्री बने, जबकि बाद में महामाया प्रसाद सिन्हा राज्य के पांचवें मुख्यमंत्री बने। दोनों ही नेता कायस्थ समाज से थे। इसके अलावा बिहार विधान परिषद के शुरुआती दौर में सर राजीव रंजन प्रसाद को सभापति बनाया गया था, जबकि बिंदेश्वरी प्रसाद वर्मा विधानसभा अध्यक्ष रहे।
कितनी है कायस्थ समाज की आबादी?
बिहार में जाति आधारित सर्वे (2023) में कायस्थ समाज की कुल आबादी लगभग 7.5 लाख (0.60%) है। यह कुल सवर्ण या सामान्य श्रेणी की आबादी का एक हिस्सा है। आबादी अपेक्षाकृत कम होने के बावजूद यह समुदाय लंबे समय तक राजनीति, प्रशासन, शिक्षा और न्यायपालिका में प्रभावशाली भूमिका निभाता रहा है।
नई चुनौती और नई उम्मीद
वर्तमान समय में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को कायस्थ समाज के प्रमुख नेताओं में गिना जाता है। इसके अलावा पटना साहिब के सांसद रविशंकर प्रसाद भी कायस्थ वर्ग से आते हैं। हालांकि, बांकीपुर उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार नीरज सिन्हा की हार के बाद विधानसभा में इस समाज का प्रतिनिधित्व और कमजोर हो गया है। अब केवल जदयू विधायक समृद्ध वर्मा ही इस समुदाय के एकमात्र विधायक हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रतिनिधित्व में आई यह गिरावट बिहार की बदलती सामाजिक और चुनावी राजनीति का संकेत है। जातीय समीकरणों, नए राजनीतिक गठबंधनों और बदले हुए मतदान पैटर्न के बीच कभी प्रभावशाली रहा कायस्थ समाज अब विधानसभा में अपने न्यूनतम प्रतिनिधित्व के दौर से गुजर रहा है।