Bihar Flood: बाढ़ की चपेट में पटना, गांधी घाट से दीघा तक गंगा के खतरे के पार, दियारा डूबा
Bihar Flood: पटना और आसपास के इलाकों पर बाढ़ का खतरा अब लगातार गहराता जा रहा है। ...
Bihar Flood: पटना और आसपास के इलाकों पर बाढ़ का खतरा अब लगातार गहराता जा रहा है। गंगा, सोन और पुनपुन नदियों के उफान ने हालात को संगीन बना दिया है। नदी के बढ़ते जलस्तर से घाटों, दियारा क्षेत्रों और निचले इलाकों में पानी फैलने लगा है। कई जगह आवागमन प्रभावित हो गया है और नदी किनारे बसे लोगों में खौफ बढ़ता जा रहा है।
गंगा का मिजाज सबसे ज्यादा तल्ख गांधी घाट और दीघा में दिखाई दे रहा है। गांधी घाट पर खतरे का निशान 48.60 मीटर है, जबकि जलस्तर 49.71 मीटर दर्ज किया गया है। यानी नदी खतरे के निशान से 1.11 मीटर ऊपर बह रही है। दीघा घाट पर खतरे का निशान 50.45 मीटर है और जलस्तर 50.80 मीटर पहुंच गया है। यहां गंगा 35 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। मनेर में भी गंगा 52.53 मीटर तक पहुंच गई है, जबकि खतरे का निशान 52 मीटर है। हाथीदह में नदी 42.48 मीटर पर है, जो 41.76 मीटर के खतरे के निशान से ऊपर है।
उधर पुनपुन नदी ने भी मुश्किल बढ़ा दी है। श्रीपालपुर में खतरे का निशान 50.60 मीटर है, जबकि जलस्तर 52.58 मीटर दर्ज किया गया है। यानी पुनपुन 2.01 मीटर ऊपर बह रही है। नदी का पानी आसपास के घरों और निचले इलाकों में फैलने लगा है।
सोन नदी का बहाव भी चिंता का सबब बना हुआ है। इंद्रपुरी बराज से करीब पौने छह लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद मनेर में सोन खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गई है। मनेर में जलस्तर 53 सेंटीमीटर ऊपर दर्ज किया गया, जबकि कोईलवर में नदी चेतावनी स्तर पार कर चुकी है।
तीनों नदियों के बढ़ते जलस्तर का सीधा असर दानापुर, मनेर, पटना सदर, बख्तियारपुर और मोकामा के दियारा इलाकों पर पड़ा है। पटना रिवर फ्रंट पर पानी चढ़ आया है। पटना सिटी में महावीर घाट के पास गंगा किनारे की सड़क जलमग्न होने से आवागमन बाधित है। दीघा के रिहायशी इलाकों में भी पानी फैल गया है। जेपी गंगा पथ के नीचे बसी बिंद टोली चारों तरफ से पानी से घिर गई है, जिससे लोगों के सुरक्षित ठिकानों की ओर पलायन की नौबत बन रही है।
उत्तर भारत और नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में जारी बारिश को नदियों के बढ़ते जलस्तर की बड़ी वजह माना जा रहा है। हालात को देखते हुए जल संसाधन विभाग और जिला प्रशासन ने तटबंधों, सुरक्षा दीवारों और नाला तटबंधों की निगरानी तेज कर दी है। अधिकारियों को चौबीसों घंटे मुस्तैद रहने के निर्देश दिए गए हैं। उत्तरी और दक्षिणी नाला तटबंधों पर बालू की बोरियां भी तैयार रखी गई हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर फौरन सुरक्षात्मक कार्रवाई शुरू की जा सके।