ककोलत से करकटगढ़ तक… गौरव राय ने दुनिया को दिखाए बिहार के 22 जलप्रपात, झरनों में छुपा पर्यटन का खजाना

गौरव राय के अनुसार बिहार में छोटे-बड़े मिलाकर 40 से 50 झरने हो सकते हैं। वे खुद अभी तक 22 झरनों और जलप्रपातों का अनुभव लेकर आए हैं. ऐसे में पर्यटन दिवस पर बिहार में इस किस्म के प्राकृतिक क्षेत्रों को विकसित करने की सबसे बड़ी जरूरत है

Bihar Waterfalls
Bihar Waterfalls- फोटो : news4nation

Bihar Waterfalls : बिहार की पहचान सिर्फ इतिहास, धर्म और प्राचीन विरासत से नहीं है। राज्य की पहाड़ियों और जंगलों के बीच प्रकृति ने ऐसे कई झरने और जलप्रपात भी रचे हैं, जो किसी भी पर्यटन मानचित्र की खूबसूरती बढ़ा सकते हैं। लेकिन जानकारी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव में इनमें से कई स्थल आज भी आम पर्यटकों की पहुंच और चर्चा से दूर हैं।


पटना के गौरव राय ने बिहार के इन्हीं अनदेखे प्राकृतिक खजानों को दुनिया के सामने लाने का बीड़ा उठाया है। गौरव राय के मुताबिक उन्होंने राज्य के करीब 22 झरनों और जलप्रपातों को खुद जाकर एक्सप्लोर किया है। उन्होंने सिर्फ इन जगहों की खूबसूरती नहीं देखी, बल्कि वहां पहुंचने का रास्ता, घूमने का सही समय, ठहरने की व्यवस्था और एक यात्रा में कितने स्थान देखे जा सकते हैं, जैसी व्यावहारिक जानकारियां भी जुटाई हैं।

ककोलत से रोहतास तक झरनों की लंबी श्रृंखला

गौरव राय के अनुसार नवादा का ककोलत जलप्रपात बिहार का चर्चित प्राकृतिक पर्यटन स्थल है। लेकिन इसके आसपास ही कोलवा और अमझर जैसे जलप्रपात भी हैं। गया में हदहदवा और जमुई में पंचभूर, गिद्धेश्वर और देबोदह जैसे प्राकृतिक झरने भी पर्यटकों को आकर्षित कर सकते हैं। रोहतास तो मानो प्राकृतिक सौंदर्य से भरा पूरा पर्यटन क्षेत्र है। चौरासन मंदिर के रास्ते में मिलने वाली जलधाराएं, नौहट्टा का महादेव खो, अमझोर के पास कशिश झरना और मां तुतला भवानी के आसपास गिरती जलधारा रोमांच पैदा करती है। 

इसके अलावा मंझर कुंड, सीता कुंड, धुआ कुंड, सिकड़ियां, मेघवा और गीता घाट जैसे झरने भी इस क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा हैं। करमचट डैम से गुप्ता धाम की ओर जाने वाले रास्ते में भी कई खूबसूरत जलधाराएं हैं। शीतल कुंड, तेलहर डैम और आगे करकटगढ़ तक का इलाका प्रकृति प्रेमियों के लिए खास आकर्षण बन सकता है।

पर्यटन से रोजगार की नई राह

गौरव राय का कहना है कि इन स्थानों को विकसित करने से सिर्फ पर्यटन नहीं बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। इसके लिए खराब सड़कों को दुरुस्त करने के साथ सुरक्षा, पेयजल, शौचालय और विश्राम जैसी बुनियादी सुविधाओं पर काम करना जरूरी है। वे खास तौर पर महिलाओं के लिए कपड़े बदलने की व्यवस्था की कमी को गंभीर समस्या मानते हैं। उनके मुताबिक ककोलत को छोड़कर अधिकांश झरनों पर ऐसी सुविधाएं नहीं हैं। पर्यटन विभाग को इस दिशा में पहल करनी चाहिए। स्थानीय लोगों को भी पर्यटकों के प्रति भरोसे का माहौल बनाना होगा। वहीं पर्यटकों को स्थानीय भोजन और उत्पाद खरीदकर स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना चाहिए।

22 नहीं, 40-50 झरनों की संभावना

गौरव राय के अनुसार बिहार में छोटे-बड़े मिलाकर 40 से 50 झरने हो सकते हैं। लखीसराय का श्रृंगी धाम और मुंगेर के बरसाती झरने भी इसकी मिसाल हैं। हालांकि कई स्थानों पर खड़ी चढ़ाई और फिसलन है, इसलिए पर्यटकों को सावधानी बरतने और आवश्यक पानी-खाना साथ रखने की जरूरत है।

27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस के मौके पर बिहार के इन अनदेखे प्राकृतिक स्थलों पर ध्यान देना एक बड़ा अवसर है। गौरव राय कहते हैं कि मेरी निजी यात्रायें और यात्रा अनुभव बताती है कि बिहार में पर्यटन की संभावनाएं सिर्फ ऐतिहासिक स्थलों तक सीमित नहीं हैं। पहाड़ों के बीच गिरती ये जलधाराएं अगर सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल तरीके से विकसित की जाएं, तो बिहार के पर्यटन और स्थानीय रोजगार की तस्वीर बदलने की क्षमता रखती हैं।