Bihar Ias News - रिटायरमेंट के बाद कानून के शिकंजे से बच निकले पूर्व डीएम! बिहार सरकार ने बंद की जांच की फाइल

पूर्व डीएम मनोज कुमार शाही को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर वाहनों के निबंधन मामले में बड़ी राहत मिली है। बिहार सरकार ने तकनीकी कारणों और पेंशन नियमावली का हवाला देते हुए उनके विरुद्ध चल रहे आरोपों की फाइल बंद करने का फैसला लिया है।

Bihar Ias News - रिटायरमेंट के बाद कानून के शिकंजे से बच निक

Patna -बिहार के सामान्य प्रशासन विभाग ने पूर्णिया के तत्कालीन जिला पदाधिकारी मनोज कुमार शाही के खिलाफ चल रही विभागीय कार्यवाही को बंद करने का आदेश दिया है। शाही पर आरोप था कि उन्होंने अवैध तरीके से 45 वाहनों का निबंधन कर राज्य में होने वाले 'Bulk LPG Tender' की प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की थी।

 फर्जीवाड़े का गंभीर आरोप

जांच प्रतिवेदन के अनुसार, परिवहन विभाग ने पाया था कि अन्य राज्यों के टैंक ट्रकों (Tank Truck-TTs) का बिहार में फर्जी पते पर निबंधन कराया गया था। इसमें मोटर निरीक्षक और जिला परिवहन पदाधिकारी की भूमिका संदिग्ध थी, जिनके द्वारा नियमों के विरुद्ध निर्गत रिपोर्ट के आधार पर श्री शाही ने वाहनों का निबंधन किया था।

तकनीकी आधार पर बंद हुई फाइल

मामले की समीक्षा के दौरान यह तथ्य सामने आया कि मनोज कुमार शाही 30 नवंबर 2018 को ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं। सरकार ने पाया कि उनकी सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें पेंशन और अन्य देय राशियों का भुगतान भी किया जा चुका है।

पेंशन नियमावली ने दी सुरक्षा

 सरकार ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि बिहार पेंशन नियमावली 1950 के प्रावधानों के तहत, सेवानिवृत्ति के इतने वर्षों बाद पुराने मामलों पर कार्यवाही करना 'कालबाधित' (Time-barred) हो चुका है। चूंकि आरोप वर्ष 2018 या उससे पहले के हैं, इसलिए नियम 43(बी) और 139 के तहत अब कार्रवाई संभव नहीं है।

परिवहन विभाग के पास कार्रवाई का विकल्प

 भले ही सामान्य प्रशासन विभाग ने इस प्रकरण को संचिकास्त कर दिया हो, लेकिन आदेश में यह भी उल्लेख है कि यदि परिवहन विभाग को मामला अत्यंत गंभीर या वित्तीय क्षति से जुड़ा लगता है, तो वे अन्य प्रावधानों के तहत कार्रवाई के लिए स्वतंत्र हैं।