तिब्बी कॉलेज हॉस्पिटल में प्रशिक्षु डॉक्टरों का 'ओरिएंटेशन': प्रोफेशनल स्किल और नैतिक मूल्यों पर जोर; तीन दिनों तक चलेगा मंथन

पटना के गवर्नमेंट तिब्बी कॉलेज हॉस्पिटल में बैच 2020 के प्रशिक्षु चिकित्सकों के लिए तीन दिवसीय ओरिएंटेशन कार्यशाला का आगाज हो गया है। चिकित्सा के क्षेत्र में नए कदम रखने वाले इंटर्न्स को उनके पेशेवर दायित्वों और कौशल से रूबरू कराने के लिए यह एक महत्

तिब्बी कॉलेज हॉस्पिटल में प्रशिक्षु डॉक्टरों का 'ओरिएंटेशन':

Patna  : गवर्नमेंट तिब्बी कॉलेज हॉस्पिटल, पटना में बैच 2020 के प्रशिक्षु चिकित्सकों के लिए आयोजित तीन दिवसीय ओरिएंटेशन कार्यशाला का सोमवार को विधिवत शुभारंभ हुआ। मेडिकल सुपरिटेंडेंट प्रोफेसर डॉ. शाहनवाज़ अख्तर के संरक्षण में आयोजित यह कार्यशाला 16 से 18 फरवरी 2026 तक चलेगी। इसका मुख्य उद्देश्य नवप्रवेशी चिकित्सकों को उनके पेशेवर कर्तव्यों, चिकित्सा नियमों, नैतिक मूल्यों और व्यावहारिक कौशल से परिचित कराना है। 

डिग्री ही नहीं, दक्ष चिकित्सक तैयार करना लक्ष्य

उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. शाहनवाज़ अख्तर ने कहा कि संस्थान का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि ऐसे चिकित्सक तैयार करना है जो तकनीकी रूप से दक्ष और नैतिक रूप से सुदृढ़ हों। उन्होंने इंटर्न्स से अपील की कि वे इस तीन दिवसीय प्रशिक्षण का अधिकतम लाभ उठाएं ताकि वे भविष्य में मरीजों की बेहतर सेवा कर सकें। 

वैज्ञानिक सत्रों में व्यावहारिक ज्ञान पर चर्चा

समारोह के बाद आयोजित वैज्ञानिक सत्र में विभिन्न विशेषज्ञों ने महत्वपूर्ण व्याख्यान दिए:

  • डॉ. मोहम्मद तनवीर आलम ने इंटर्नशिप के नियम, ड्यूटी प्रणाली और अनुशासन की जानकारी दी।

  • डॉ. मुजफ्फरुल इस्लाम ने "इलाज-बिल-तदबीर" की व्यावहारिक उपयोगिता समझाई।

  • डॉ. अमरीश कुमार ने अस्थि-संधि रोगों में फिजियोथेरेपी की महत्ता पर प्रकाश डाला।

  • डॉ. मोहम्मद राज़ी अहमद ने वाइटल्स की जांच और डॉ. नजीबुर्रहमान ने पैथोलॉजिकल जांचों की भूमिका को विस्तार से समझाया।


  • वरिष्ठ शिक्षकों और विशेषज्ञों की रही मौजूदगी

इस अवसर पर डॉ. मोहम्मद निजामुद्दीन, डॉ. मंसूर आलम, डॉ. जावेद अहमद, डॉ. अब्दुस्सलाम, डॉ. सदरुज़्ज़मां और डॉ. काइनात ज़हरा सहित कई वरिष्ठ शिक्षक और बड़ी संख्या में पीजी स्कॉलर्स व इंटर्न्स उपस्थित रहे। कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. ग़ज़ाला शम्सी, डॉ. शिफा शाहिद और अन्य कार्यालय कर्मचारियों का सराहनीय योगदान रहा।