Patna News: हिजाब–नकाब पर सर्राफा जगत में दो राय, सर्राफा संघ ने कहा-बिना समीक्षा लिया गया जल्दबाजी भरा निर्णय
Patna News: बिहार की राजधानी पटना में सर्राफा कारोबार से जुड़ा एक फैसला अब विवाद और बहस का विषय बन गया है।...
Patna News: बिहार की राजधानी पटना में सर्राफा कारोबार से जुड़ा एक फैसला अब विवाद और बहस का विषय बन गया है। हाल ही में ऑल इंडिया जेम्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन द्वारा यह निर्णय लिया गया था कि प्रदेश की स्वर्ण दुकानों में ग्राहक हिजाब, नकाब, मास्क और हेलमेट उतारकर ही प्रवेश करें। इस फैसले को सुरक्षा से जोड़कर देखा गया, लेकिन अब इस पर सर्राफा जगत के भीतर ही मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं।
पटना के प्रभावशाली संगठन पाटलिपुत्र सर्राफा संघ ने इस निर्णय से साफ तौर पर अपनी असहमति जता दी है। संघ के अध्यक्ष विनोद कुमार ने TV9 डिजिटल से बातचीत में कहा कि यह फैसला न तो संघ के स्तर पर लिया गया और न ही इस पर किसी तरह की कार्यकारिणी या जनरल बॉडी मीटिंग में चर्चा हुई। उन्होंने साफ कहा कि पाटलिपुत्र सर्राफा संघ की स्थापना 1977 में हुई थी और यहां कोई भी फैसला बिना प्रस्ताव, समीक्षा और सहमति के लागू नहीं किया जाता।
विनोद कुमार ने कहा कि मास्क और हेलमेट को लेकर स्थिति पहले ही स्पष्ट है। कोविड काल में मास्क सरकारी निर्देश के तहत जरूरी था, लेकिन अब ऐसा कोई आदेश नहीं है। यदि कोई ग्राहक डॉक्टर की सलाह पर मास्क पहनकर आता है, तो दुकानदार निजी तौर पर उनसे अनुरोध करते हैं। लगभग सभी दुकानों में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं और हेलमेट पहनकर आने वाले ग्राहकों से सामान्य तौर पर हेलमेट हटाने को कहा जाता है।
जहां तक हिजाब और बुर्के का सवाल है, इस पर उन्होंने बेहद संतुलित लेकिन स्पष्ट रुख अपनाया। उन्होंने स्वीकार किया कि चोरी की कुछ घटनाओं में बाद में यह बात सामने आई कि महिला हिजाब या बुर्का पहने थी, जिससे पहचान में दिक्कत हुई। लेकिन इसके बावजूद संघ ने कभी कोई लिखित निर्देश जारी नहीं किया, क्योंकि यह मामला धार्मिक और सामाजिक रूप से अत्यंत संवेदनशील है।
विनोद कुमार का सवाल सीधा है कि क्या नियम बना देने से अपराध रुक जाते हैं? उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि जो लुटेरे हैं, क्या वे संस्था का आदेश मानकर बिना मास्क या गमछा पहने लूट करने आएंगे? नियम तभी कारगर होते हैं, जब उन्हें व्यावहारिक रूप से लागू करने की व्यवस्था हो। क्या दुकानों में अलग केबिन हैं? क्या हिजाब उतारने की कोई सम्मानजनक व्यवस्था मौजूद है?उन्होंने कहा कि अगर प्रशासन की ओर से ऐसा कोई आदेश आता है, तो संघ उसका पालन कराने में सहयोग करेगा। लेकिन बिना प्रशासनिक बातचीत, बिना समीक्षा और बिना ज़मीनी तैयारी लिया गया यह फैसला जल्दबाजी और अपरिपक्वता को दर्शाता है।
फिलहाल, यह मुद्दा सिर्फ सुरक्षा का नहीं, बल्कि व्यापार, सामाजिक संतुलन और व्यावहारिकता का भी बन चुका है। सर्राफा संघ का साफ कहना है कि नियम थोपने से नहीं, सोच-समझकर और सबको साथ लेकर ही समाधान निकाला जा सकता है।