सोन नद जल बंटवारे पर बिहार-झारखंड के बीच ऐतिहासिक समझौता, 25 वर्षों पुराना विवाद सुलझा

बिहार और झारखंड के बीच पिछले 25 सालों से चला आ रहा सोन नद जल बंटवारा विवाद सुलझ गया है। नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी और मध्यस्थता में दोनों राज्यों के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए....

सोन नद जल बंटवारे पर बिहार-झारखंड के बीच ऐतिहासिक समझौता, 25
25 वर्षों पुराना सोन नद जल बटवारा विवाद सुलझा- फोटो : धीरज सिंह

Delhi/Patna : सोन नद के जल बंटवारे को लेकर बिहार और झारखंड के बीच पिछले 25 सालों से चला आ रहा अंतर्राज्यीय विवाद आखिरकार समाप्त हो गया है। नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी और मध्यस्थता में दोनों राज्यों के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। नए समझौते के तहत सोन नद के 7.75 एमएएफ (मिलियन एकड़ फीट) जल में से बिहार को 5.75 एमएएफ और झारखंड को 2.00 एमएएफ जल आवंटित किया गया है। इस अवसर पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का आभार व्यक्त किया।


बाणसागर समझौते के 25 साल बाद हुआ स्थायी समाधान 

उल्लेखनीय है कि वर्ष 1973 के बाणसागर समझौते के तहत सोन नद के 14.25 एमएएफ जल में से मध्य प्रदेश को 5.25, उत्तर प्रदेश को 1.25 और अविभाजित बिहार को 7.75 एमएएफ जल आवंटित हुआ था। वर्ष 2000 में झारखंड गठन के बाद से ही अविभाजित बिहार के हिस्से के पानी को लेकर दोनों राज्यों में खींचतान चल रही थी। 10 जुलाई 2025 को रांची में आयोजित पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की 27वीं बैठक में गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में बनी सहमति के बाद इसे अंतिम रूप दिया गया। इस ऐतिहासिक मौके पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी भी मौजूद रहे।


सिंचाई, पेयजल और औद्योगिक विकास को मिलेगी नई गति 

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह समझौता दोनों राज्यों के बीच सहयोगात्मक संघवाद, विश्वास और साझा विकास की नई मिसाल है। जल आवंटन से दक्षिण बिहार और झारखंड के पठारी तथा सूखा प्रभावित क्षेत्रों में जल की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। इससे कृषि सिंचाई सुविधाओं का विस्तार होगा, पेयजल का संकट दूर होगा और औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी।


सोन-फल्गु नदी जोड़ो परियोजना से गयाजी को मिलेगा विशेष लाभ 

विवाद समाप्त होने से अब सोन नद पर प्रस्तावित जलाशय निर्माण और 'सोन-फल्गु नदी जोड़ो परियोजना' पर तेजी से काम आगे बढ़ाया जा सकेगा। इससे गयाजी समेत दक्षिण बिहार के कई इलाकों में जल स्तर सुधरेगा। फल्गु नदी में पर्याप्त जल रहने से पितृपक्ष मेले के दौरान देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को तर्पण एवं पिंडदान करने में काफी सहूलियत होगी।


सहकारी संघवाद की भावना से संभव हुआ समाधान 

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि इतने जटिल अंतर्राज्यीय मुद्दे का समाधान केवल निरंतर संवाद और सहकारी संघवाद की भावना से ही संभव हो सका है। उन्होंने केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय, झारखंड सरकार और प्रक्रिया से जुड़े सभी अधिकारियों का धन्यवाद किया और विश्वास जताया कि यह समझौता दोनों राज्यों की भावी पीढ़ियों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा।


धीरज सिंह की रिपोर्ट