Patna IGIMS Paper Leak Controversy: पेपर लीक का खेल, करोड़ों की डील! IGIMS में इम्तिहान बना सौदेबाजी का अड्डा, कुलपति बनने के जुगाड़ में जुटे निदेशक!सिस्टम पर उठे ये संगीन सवाल

सियासी गलियारों में यह भी चर्चा है कि IGIMS के निदेशक डॉ. बिंदे, जो बिहार राज्य स्वास्थ्य एवं विज्ञान विश्वविद्यालय में एढॉक कुलपति की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं, कथित तौर पर सत्ता के करीब माने जाते हैं और स्थायी कुलपति बनने की जुगत में लगे हैं।

IGIMS exam scam row director on leave amid VC ambitions
IGIMS में एग्जाम माफिया का साया!- फोटो : social Media

Patna IGIMS  Paper Leak Controversy: पटना का चर्चित संस्थान इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) एक बार फिर सियासी संगीन साए में घिर गया है। इल्ज़ाम है कि एमबीबीएस और पीजी फाइनल ईयर के इम्तिहानों को ज्ञान का मैदान नहीं, बल्कि सौदेबाजी का बाजार बना दिया गया। पेपर लीक, कॉपियों में हेरफेर और मोटी रकम के लेन-देन की खबरों ने पूरे सिस्टम को कटघरे में ला खड़ा किया है। 

इस पूरे घमासान के बीच संस्थान के निदेशक डॉ. बिंदे का अचानक छुट्टी पर चले जाना कई तरह के शक-ओ-शुब्हात को जन्म दे रहा है। सियासी गलियारों में यह भी चर्चा है कि डॉ. बिंदे, जो बिहार राज्य स्वास्थ्य एवं विज्ञान विश्वविद्यालय में एढॉक कुलपति की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, कथित तौर पर सत्ता के करीब माने जाते हैं और स्थायी कुलपति बनने की जुगत में लगे हैं। ऐसे में पूरे माजरे को और पेचीदा बना देता है।बता दें बिहार राज्य स्वास्थ्य एवं विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति की नियुक्त राज्यपाल न कर मुख्यमंत्री करता है। 

मामले की शुरुआत एक बेनाम ई-मेल से हुई, जिसने 13 मार्च को ही इस इम्तिहानी घोटाले की परतें खोल दी थीं। मगर हैरत की बात ये है कि करीब 28 दिनों तक फाइलों में धूल जमती रही और कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। जब मामला तूल पकड़ने लगा, तब जाकर एक चार सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गई जिसे अब सात कार्य दिवस में हकीकत का पर्दाफाश करना है।

प्रभारी निदेशक सह डीन (अकादमिक) डॉ. ओम कुमार की अगुवाई में बनी इस कमेटी में डॉ. संजय कुमार, डॉ. ज्ञान भाष्कर और डॉ. अश्विनी को शामिल किया गया है। लेकिन यहां भी सियासत की बू साफ महसूस हो रही है। IGIMS के प्रिंसिपल डॉ. रंजीत गुहा को जांच से दूर रखा गया जबकि मामला सीधे उनके अधिकार क्षेत्र से जुड़ा है। खुद डॉ. गुहा ने इसे जांच की पारदर्शिता पर संगीन सवाल बताया है।

सूत्रों की मानें तो यह पूरा खेल रेट कार्ड पर चल रहा था पेपर लीक कराने के अलग दाम, कॉपी बाहर से लिखवाने के अलग भाव। लाखों रुपये की डील के जरिए कुछ परीक्षार्थियों के भविष्य के साथ खुला खिलवाड़ किया गया। यह भी इल्ज़ाम है कि कुछ आंसर शीट्स को बाहर से तैयार कर सिस्टम में फिट किया गया, जो मेडिकल शिक्षा की साख पर करारा तमाचा है।

इतना ही नहीं, परीक्षा शाखा के सीसीटीवी फुटेज में भी संदिग्ध हलचल कैद होने की बात सामने आ रही है। असामान्य समय पर लोगों का आना-जाना, बंद कमरों में गतिविधियां ये सब इशारा करते हैं कि पर्दे के पीछे बहुत कुछ गड़बड़झाला चल रहा था। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक तस्दीक अभी बाकी है।

इससे पहले भी एक प्रारंभिक जांच में अनियमितताओं के संकेत मिले थे, मगर उस वक्त भी मामला दबा दिया गया। अब जब राज खुला है, तो सवाल सिर्फ IGIMS पर नहीं, बल्कि पूरे मेडिकल एजुकेशन सिस्टम की साख पर उठ रहा है।

लोगों की निगाहें अब जांच कमेटी पर टिकी हैंक्या सच सामने आएगा या फिर यह मामला भी फाइलों में दफ्न हो जाएगा? अगर इल्ज़ाम साबित हुए, तो यह सिर्फ एक संस्थान का नहीं, बल्कि पूरे बिहार के मेडिकल निज़ाम के लिए बड़ा झटका होगा।