सोन नदी में अवैध खनन का तांडव: पटना में माफिया के आगे ध्वस्त हुए सारे दावे!
पटना जिले के जीतन छपरा-मसौढा घाट पर अवैध खनन का वायरल वीडियो, टास्क फोर्स और पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल, पटना में माफियाओं के आगे नदी संरक्षण के दावे हुए 'सफेद झूठ'
पटना जिले में सोन नदी के अस्तित्व पर बालू माफियाओं का खतरा मंडरा रहा है। हाल ही में वायरल हुए एक वीडियो ने सरकार के नदी संरक्षण के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जल संसाधन मंत्री विजय चौधरी द्वारा नदियों को पुराने स्वरूप में लौटाने और करोड़ों के बजट के वादों के उलट, धरातल पर स्थिति बिल्कुल जुदा है। जीतन छपरा और मसौढा बालू घाट के समीप सोन नदी की मुख्य धारा को अवरुद्ध कर अवैध खनन का खेल खुलेआम जारी है, जिससे नदी के प्राकृतिक प्रवाह को भारी नुकसान पहुँच रहा है।
नदी की धारा में बनाया जा रहा बांध, एनजीटी के नियमों की अनदेखी
वायरल वीडियों देखने खातिर लिंक को कलिल करें -नदी के स्वरूप के साथ खिलवाड़ (Environmental Violation)
वायरल वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि आधा दर्जन से अधिक भारी-भरकम पॉकलेन मशीनें नदी की प्रवाहित धारा के बीचों-बीच बांध बना रही हैं। खनन अधिनियम 2019 और एनजीटी (NGT) की गाइडलाइन्स के अनुसार पानी के अंदर से बालू निकालना या धारा को बाधित करना पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद, ईसी (EC) एरिया से बाहर जाकर मशीनों द्वारा बालू का उत्खनन किया जा रहा है। वीडियो में दिख रहे जीपीएस नंबर और अवैध गतिविधियों के बावजूद प्रशासन की चुप्पी स्थानीय टास्क फोर्स की कार्यप्रणाली पर संदेह पैदा करती है।
पुलिस और प्रशासन की नाक के नीचे रात भर चलता है अवैध खेल
बालू माफियाओं का दुस्साहस इस कदर बढ़ गया है कि धाना बालू घाट जैसे इलाकों से पूरी रात अवैध खनन किया जा रहा है। बिना चालान के सैकड़ों ट्रक और ट्रैक्टर नेशनल हाईवे के रास्ते बेखौफ निकल रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि तीन-तीन खनन निरीक्षकों और गठित टास्क फोर्स की तैनाती के बावजूद इन मशीनों को जब्त नहीं किया जा रहा है। जानकार बताते हैं कि यदि पुलिस केवल रानीतलाब लख, कनपा लख और सैदाबाद जैसे प्रमुख मार्गों पर सघन चेकिंग अभियान चलाए, तो अवैध बालू का बाजार तक पहुँचना नामुमकिन हो जाएगा।
कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति, पुलिस पर फायरिंग के बाद भी गिरफ्तारी नहीं
रानीतलाब के शारदा छपरा और धनराज छपरा में बालू माफियाओं द्वारा पुलिस पर फायरिंग की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। इस मामले में दो दर्जन नामजद और 150 अज्ञात लोगों पर प्राथमिकी तो दर्ज की गई, लेकिन अब तक एक भी गिरफ्तारी न होना प्रशासन की मंशा पर सवाल उठाता है। कार्रवाई के नाम पर महज खानापूर्ति की जा रही है, जबकि माफिया खुलेआम पुलिस को चुनौती दे रहे हैं। सोन नदी के सीने को छलनी कर किए जा रहे इस अवैध कारोबार ने सरकार के "जीरो टॉलरेंस" के दावों को पूरी तरह खोखला साबित कर दिया है।