पटना में इंडिया सिने कम्यून फिल्म फेस्टिवल का पहला संस्करण 27 सितंबर को, जुटेंगी कई नामचीन हस्तियां

इंडिया सिने कम्यून फिल्म फेस्टिवल (ICCFF) का पहला संस्करण 27 सितंबर 2026 को ऐतिहासिक पटना संग्रहालय में आयोजित होने जा रहा है। रेनॉक मीडिया की इस पहल का उद्देश्य क्षेत्रीय और स्वतंत्र फिल्मकारों को उनके अपने सांस्कृतिक परिवेश में एक मंच प्रदान करना

India cine commune film festival first edition Patna
पटना में इंडिया सिने कम्यून फिल्म फेस्टिवल का पहला संस्करण 27 सितंबर को- फोटो : Reporter

पटना के ऐतिहासिक पटना संग्रहालय में 27 सितंबर 2026 को इंडिया सिने कम्यून फिल्म फेस्टिवल (ICCFF) के प्रथम संस्करण का आयोजन होने जा रहा है। ऑस्कर-क्वालिफाइंग लॉस एंजिल्स एशियन पैसिफिक फिल्म फेस्टिवल से सम्मानित प्रियंका सिंह और आज़ाद आलम द्वारा स्थापित यह एक दिवसीय महोत्सव स्वतंत्र फिल्मकारों को उनके अपने क्षेत्रों में एक सशक्त मंच प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू किया गया है। रेनॉक मीडिया द्वारा प्रस्तुत यह भ्रमणशील सांस्कृतिक पहल हर संस्करण में देश के अलग-अलग क्षेत्रों की यात्रा करेगी, जिसकी शुरुआत बिहार से हो रही है।


महोत्सव का उद्देश्य: क्षेत्रीय प्रतिभाओं को सशक्त बनाना

ICCFF का मुख्य ध्येय उभरती और स्वतंत्र प्रतिभाओं को केवल मुंबई या अन्य स्थापित फिल्म केंद्रों पर निर्भर रहने के बजाय उनके अपने शहरों, क्षेत्रों और सांस्कृतिक परिवेश में पहचान, दर्शक तथा अवसर उपलब्ध कराना है। फेस्टिवल डायरेक्टर प्रियंका सिंह का कहना है, "किसी फिल्मकार का सपना उसके पिन कोड से तय नहीं होना चाहिए।" इस पहल के जरिए पारंपरिक फिल्म निर्माण केंद्रों से बाहर काम कर रहे फिल्मकारों की भौगोलिक बाधाओं को दूर करने और क्षेत्रीय कहानियों को मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया जा रहा है।


फिल्मों की स्क्रीनिंग और संवाद: 3 फीचर और 4 लघु फिल्में

महोत्सव में कुल सात फिल्मों (तीन फीचर और चार शॉर्ट फिल्में) की स्क्रीनिंग की जाएगी, जिसके बाद दर्शकों को सीधे फिल्मकारों से बातचीत का मौका मिलेगा:

  • फीचर फिल्में:

    • धड़क 2 (निर्देशक: शाजिया इकबाल): सामाजिक असमानताओं पर चोट करती एक प्रेम कहानी।

    • पोखर के दुनू पार (निर्देशक: पार्थ सौरभ): आर्थिक तंगी और टूटते रिश्ते से जूझते दंपति का चित्रण।

    • धुइन (निर्देशक: अचल मिश्रा): दरभंगा के एक युवा रंगकर्मी के सपनों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच के संघर्ष की गाथा।

  • लघु फिल्में:

    • हाफ फॉलन ट्री (निर्देशक: सुमित मिश्रा): कर्ज के दबाव में उलझे बेरोजगार व्यक्ति की कहानी।

    • माया (निर्देशक: विकास चंद्रा): अपनी शादी से पहले अपने भीतर के भयों से लड़ती महिला की कथा।

    • गुठली (निर्देशक: अनुरिता झा): 1980 के दशक के ग्रामीण बिहार के एक 5 वर्षीय बच्चे का भावनात्मक संसार।

    • दूर (निर्देशक: आज़ाद आलम): तीन साल के अलगाव के बाद मिलने वाले दो पूर्व प्रेमियों की दास्तान।


    • दो विषय-केंद्रित परिचर्चाएं (Panel Discussions)

फिल्मों के प्रदर्शन के अलावा, सिनेमा के विभिन्न पहलुओं पर केंद्रित दो प्रमुख परिचर्चाएं भी आयोजित की जाएंगी:

  1. 'ब्रिजिंग सिनेमा होम: प्रोड्यूसिंग इन बिहार': यह सत्र बिहार फिल्म नीति, राज्य में फिल्म निर्माण की संभावनाओं और स्थानीय प्रतिभाओं के लिए एक स्थायी इकोसिस्टम तैयार करने पर केंद्रित रहेगा। इसमें निर्माता अंशुलिका दुबे (विशबेरी) और रंजन सिंह (फिल्म मार्केटर व निर्माता) अपने विचार साझा करेंगे।

  2. 'फाइंडिंग द स्टोरी विदिन: राइटिंग फॉर द स्क्रीन': यह चर्चा प्रामाणिक लेखन, अपने आसपास से कहानियां चुनने और स्क्रीनप्ले डेवलपमेंट पर आधारित होगी। इसमें लेखिका अनुकृति पांडे (मेरी क्रिसमस, क्रिमिनल जस्टिस) और लेखक-फिल्मकार पंकज दुबे हिस्सा लेंगे।                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                    

इस आयोजन में शाजिया इकबाल, अचल मिश्रा, पार्थ सौरभ, विकास चंद्रा, अनुरिता झा, अभिनेता अभिनव झा, निर्माता अंशुलिका दुबे, रंजन सिंह और लेखक पंकज दुबे जैसी कई नामचीन हस्तियां शिरकत करेंगी।आगामी संस्करणों में ICCFF केवल फिल्मों के प्रदर्शन तक सीमित न रहकर डेवलपमेंट लैब, मेंटरशिप प्रोग्राम, पिच फोरम और सह-निर्माण (को-प्रोडक्शन) के अवसर भी जोड़ेगा। इसका मकसद क्षेत्रीय सिनेमा से जुड़े प्रोजेक्ट्स को लगातार और सार्थक सहयोग प्रदान करना है।