Bihar News: पशुपालकों के द्वार पहुंची मोबाइल पशु चिकित्सा सेवा, दो साल पूरा होने पर नई पुस्तिका और वेबसाइट का हुआ लोकार्पण
Bihar News: डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के तहत संचालित मोबाइल पशु चिकित्सा इकाई सेवा ने अपने दो वर्ष पूरे कर लिए हैं।
Bihar News: डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के तहत संचालित मोबाइल पशु चिकित्सा इकाई सेवा ने अपने दो वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस अवसर पर विकास भवन स्थित विभागीय सभागार में कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मंत्री नन्दकिशोर राम ने पशुपालकों के लिए तैयार ‘पशुपालकों के द्वार पर पशु चिकित्सा सेवाएं, चलंत पशु अस्पताल हेतु मानक संचालन प्रक्रिया’ और ‘बिहार पशु प्रजनन विनियमन अधिनियम, 2025’ पर आधारित पुस्तिका का विमोचन किया। साथ ही राज्य की ब्रीडिंग पॉलिसी के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विकसित वेबसाइट का भी लोकार्पण किया गया।
मोबाइल पशु चिकित्सा इकाई सेवा की शुरुआत 9 सितंबर 2024 को की गई थी। इसका मकसद ग्रामीण और दूरदराज इलाकों के पशुपालकों को उनके घर के नजदीक समयबद्ध, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण पशु चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है। मंत्री नन्दकिशोर राम ने कहा कि चलंत पशु चिकित्सा इकाइयां पशु स्वास्थ्य सेवाओं को सीधे पशुपालकों के द्वार तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने बाढ़ आपदा के दौरान जिलों में विभागीय पदाधिकारियों और कर्मियों के कार्यों की भी सराहना की।
विभागीय सचिव शीर्षत कपिल अशोक ने सेवा से जुड़े पशु चिकित्सकों, तकनीकी कर्मियों, कॉल सेंटर प्रतिनिधियों, वाहन चालकों और अधिकारियों को दूसरी वर्षगांठ की बधाई दी। उन्होंने कहा कि दो वर्षों की उपलब्धियां सभी कर्मियों के समर्पण और निरंतर प्रयासों का नतीजा हैं।
पशुपालन निदेशक श्रीकांत शास्त्री ने बताया कि बिहार पशु प्रजनन विनियमन अधिनियम, 2025 लागू होने के बाद पशुओं में कृत्रिम गर्भाधान से जुड़े विभिन्न घटकों पर नियंत्रण की व्यवस्था मजबूत हुई है। संबंधित संस्थाओं और व्यक्तियों के पंजीकरण की सुविधा वेबसाइट के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी।
पशुपालक टोल-फ्री नंबर 1962 पर कॉल कर मोबाइल पशु चिकित्सा सेवा का लाभ ले सकते हैं। कॉल सेंटर सप्ताह के सातों दिन 24 घंटे संचालित होता है, जबकि मोबाइल इकाइयों की सेवा प्रतिदिन सुबह 8:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक उपलब्ध रहती है।