मोकामा पर गंभीर खतरा, गंगा में समा सकते हैं कई गांव, किलोमीटर में फैल रहा नदी का कटाव

गंगा के बहाव क्षेत्र में आए बदलाव ने पटना जिला के मोकामा पर बाढ़ और कटाव का गंभीर खतरा उत्पन्न करना शुरू कर दिया है. पिछले एक वर्ष में मोकामा घाट से हथिदह तक स्थिति गंभीर हुई है

Erosion by the Ganges in Mokama
Erosion by the Ganges in Mokama- फोटो : news4nation

Mokama :  मोकामा पर बाढ़ और कटाव का गंभीर खतरा मंडरा रहा है - इसका कारण मोकामा में कई किलोमीटर के दायरे में गंगा नदी से हो रहा कटाव है. इससे कई गांवों पर आने वाले समय में गंगा में समा जाने का खतरा उत्पन्न हो सकता है. स्थानीय लोग गंगा के बढ़ते कटाव से काफी चिंतित हैं. इसे लेकर सोशल मीडिया पर भी लोग अपनी चिंताएं जाहिर कर रहे हैं ताकि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों द्वारा इस पर संज्ञान लिया जाए. 


मोकामा इलाके में प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म Versial Aunta ने गंगा के कटाव से जान-माल की होने वाली क्षति को लेकर लोगों को जागरूक करना शुरू किया है.  Versial Aunta के संचालक सुंदरम ने रविवार को कटाव से जुड़ी सेटेलाइट तस्वीरें जारी की. इसमें उन्होंने बताया है कि गंगा अपने मूल बहाव क्षेत्र के बदले दक्षिणी किनारे को काट रही है. 


सेटेलाइट की तस्वीरों से कटाव का खतरा समझिए

इसके लिए नीचे की दोनों सेटेलाइट की तस्वीरें देखें। पहली गाँव औंटा की है, दूसरी मोकामाघाट की है। गंगा नदी में ड्रेजिंग और ऑटोमेटिक  रिवर कोर्स शिफ्टिंग की वजह से बीते वर्ष लगभग 800 मीटर गंगा दियारा कट कर नदी में शमा गया। परिणामतः जो गंगा घाट एक किलोमीटर दूर रहती थी, वह 100 मीटर की दूरी पर आ चुकी है। दोनों तस्वीरों में रेड लाईन के ऊपर का पूरा इलाका गंगा नदी में शमा चुका है और दियारा बेगूसराय साइड में निकला है। गंगा साँप के आकार(Meanders) से बह रही है। अगला ऑक्सबो मोकामा साइड में निकला है।

मोकामा से हथिदह तक खतरा 

उन्होंने कहा कि गंगा नदी की धारा मोकामाघाट, औंटा, दरियापुर, हाथीदह के पास मुख्यधारा के रूप में मिलती है, नदी की धारा का प्रवाह जिसमें तीव्र है और कटाव जारी है। अगर प्रशासन अभी इस मसले में सचेत नहीं होता है, तो यह सम्भव है कि इस वर्ष मोकामा के इलाके कटाव से प्रभावित हों। गंगा मुख्य घाट से लगभग 50-60 फ़ीट गहरी है। 


जल संसाधन विभाग से अपील 

उन्होंने बताया कि जल संसाधन विभाग ने  अख़बार में विज्ञापन जारी किया है वह सेटेलाइट के जरिये नदियों के कटाव को देखेगी। हालांकि मोकामा घाट से हथिदह तक जिस तेजी से गंगा के कारण कटाव बढ़ता जा रहा है अगर अभी ही समय रहते एहतियाती कदम नहीं उठाये गए तो इस वर्ष जिस तरीके से “कटाव और रिवर कोर्स शिफटिंग” हुआ है।साल भर में मोकामा के कई गांव कटाव पीड़ित बन जाएंगे।