सबौर विवि महाघोटाला: सेक्रेटरी से लेकर कुलपति तक सब पर बरसे सुधाकर सिंह, खोल दी नियुक्ति और शोध की पोल!

राजद के बक्सर सांसद सुधाकर सिंह ने भागलपुर के सबौर कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे उत्तर प्रदेश के लोगों को लाभ पहुँचाने और सरकारी धन की लूट का अड्डा बताया है।

MP Sudhakar Singh showing documents of corruption in a press
सांसद सुधाकर सिंह का बड़ा खुलासा।- फोटो : नरोत्तम कुुमार

Patna - सांसद सुधाकर सिंह ने साक्ष्यों के साथ आरोप लगाया कि कृषि विज्ञान केंद्र में सात पदों के लिए विज्ञापन निकाला गया था, लेकिन अपने चहेतों को लाभ पहुँचाने के लिए नियम विरुद्ध तरीके से आठवें व्यक्ति (राम नरेश जी, जो उत्तर प्रदेश के निवासी हैं) को प्रोफेसर के रूप में नियुक्त कर दिया गया। सांसद ने कहा कि विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों से लेकर पढ़ाने वाले स्टाफ तक आधे से ज्यादा लोग उत्तर प्रदेश के हैं, जबकि बिहार के प्रतिभाशाली युवाओं को दरकिनार किया जा रहा है।

बिहार सरकार के आदेशों की सरेआम अवहेलना

सुधाकर सिंह ने दावा किया कि बिहार विधानसभा ने कानून बनाया है कि विश्वविद्यालयों को सीधे नियुक्ति का अधिकार नहीं है; यह प्रक्रिया बीपीएससी (BPSC) या सरकारी संस्थाओं के जरिए होनी चाहिए। इसके बावजूद, कृषि मंत्री और बिहार सरकार के दो-दो बार रोक लगाने के आदेशों को ठेंगा दिखाते हुए कुलपति धड़ल्ले से नियुक्तियां कर रहे हैं।

कुलपति के परिजनों की 'अवैध' नियुक्तियां और वेतन वृद्धि

सांसद ने कुलपति दुनिया राम सिंह पर परिवारवाद का आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी बेटी अमिता सिंह को बिजनेस इनक्यूबेशन सेंटर में अवैध तरीके से नियुक्त किया गया। अमिता सिंह का वेतन 30,000 रुपये से बढ़ाकर सवा लाख रुपये कर दिया गया, जबकि वे महीने में मुश्किल से 2-5 दिन ही विश्वविद्यालय आती हैं। इसके अलावा, कुलपति के पुत्र आदर्श कुमार, जो वाराणसी में हत्या के आरोपी हैं, उनकी कंपनी को विश्वविद्यालय के आउटसोर्सिंग कार्यों का अवैध ठेका दिया गया है।

शोध और पेटेंट के नाम पर सरकारी धन की लूट

सांसद ने एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा कि कुलपति ने अपने 25 साल के करियर में एक भी पेटेंट हासिल नहीं किया था, लेकिन विश्वविद्यालय के पद पर बैठते ही एक साल के भीतर विश्वविद्यालय के 25 लाख रुपये खर्च करके लगभग 20 पेटेंट अपने नाम करवा लिए। इसके अलावा, शिक्षकों के वेतन मद के 15 लाख रुपये अवैध रूप से एक एनजीओ (डॉ. एसपी सिंह) को ट्रांसफर कर दिए गए।

विदेशी उपकरणों की खरीद में वित्तीय अनियमितता

भ्रष्टाचार के एक अन्य मामले का जिक्र करते हुए सांसद ने बताया कि जर्मनी से कैमरा और मशीन आयात करने के लिए यह शर्त थी कि भुगतान तभी होगा जब दो वैज्ञानिक वहां से ट्रेनिंग लेकर आएंगे। लेकिन बिना किसी ट्रेनिंग के भुगतान कर दिया गया और वे कीमती मशीनें आज विश्वविद्यालय में 'कबाड़' के रूप में पड़ी हैं। यह सीधे तौर पर सरकारी खजाने को चूना लगाने का मामला है।

कुलाधिपति से कुलपति को जेल भेजने की अपील

सुधाकर सिंह ने नवनियुक्त राज्यपाल (कुलाधिपति) से अपील की है कि वे इस 'प्रोफेशनल भ्रष्टाचारी' कुलपति के खिलाफ जांच तेज करें और उन्हें तुरंत जेल भेजें। उन्होंने आरोप लगाया कि राजभवन के कुछ अधिकारी कुलपति के साथ मिले हुए हैं और जांच को बाधित कर रहे हैं। सांसद ने चेतावनी दी कि अगर कार्रवाई नहीं हुई, तो बिहार की कृषि और शोध व्यवस्था पूरी तरह बर्बाद हो जाएगी।

रिपोर्ट - नरोत्तम कुमार