सुप्रीम कोर्ट के फैसले से नवादा में जश्न: UGC के नए नियमों पर रोक को सवर्ण समाज ने बताया 'समानता की जीत'

सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद सवर्ण समाज में हर्ष और उल्लास का माहौल व्याप्त है। न्यायालय द्वारा यूजीसी के विवादित 'प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस 2026' पर रोक लगाए जाने को स्थानीय लोगों ने समानता के अधिकार की जी

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Nawada - : उच्च शिक्षा संस्थानों में भेदभाव रोकने के लिए लाए गए यूजीसी (UGC) के नए 'प्रमोशन ऑफ इक्विटी' रेगुलेशन 2026 पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगाए जाने के बाद नवादा में सवर्ण समाज के बीच हर्षोल्लास का माहौल है। स्थानीय लोगों ने इसे न्याय की जीत बताते हुए एक-दूसरे को गुलाल लगाकर बधाई दी।

सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के 'प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस 2026' के क्रियान्वयन पर फिलहाल रोक लगा दी है। अदालत ने अपने प्रारंभिक अवलोकन में इन नियमों को प्रथम दृष्टया अस्पष्ट और दुरुपयोग की आशंका वाला माना है। कोर्ट के इस आदेश के बाद अब स्पष्ट हो गया है कि फिलहाल 2012 के पुराने नियम ही प्रभावी रहेंगे, जिससे प्रशासनिक और शैक्षणिक स्तर पर चल रही उहापोह की स्थिति पर विराम लग गया है।

नवादा जिले में इस फैसले की खबर पहुँचते ही सवर्ण समाज के लोग सड़कों पर उतर आए और एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर अपनी खुशी जाहिर की। समाज के प्रबुद्ध जनों और युवाओं ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) की रक्षा बताया। नवादा के मुख्य चौक-चौराहों पर जुटे लोगों ने कहा कि न्यायपालिका ने यह साबित कर दिया है कि योग्यता और समानता के साथ समझौता नहीं किया जा सकता।

सवर्ण पक्ष का मुख्य आरोप था कि यूजीसी के ये नए नियम केवल SC/ST/OBC वर्गों को विशेष संरक्षण देने के नाम पर सामान्य वर्ग के छात्रों और शिक्षकों के साथ भेदभाव करते हैं। प्रदर्शनकारियों और कानूनी विशेषज्ञों का तर्क था कि इन नियमों की आड़ में सामान्य श्रेणी के मेधावी युवाओं के अधिकारों का हनन होने की प्रबल संभावना थी। कोर्ट के हस्तक्षेप ने उन आशंकाओं को फिलहाल टाल दिया है, जिससे नवादा के छात्र समुदाय में विशेष उत्साह है।

स्थानीय स्तर पर आयोजित विजय उत्सव के दौरान वक्ताओं ने कहा, "यह फैसला हमारे बच्चों के भविष्य और समान अवसरों की रक्षा करता है। हम किसी वर्ग के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन नियमों के नाम पर एकतरफा पक्षपात स्वीकार्य नहीं है।" स्थानीय युवाओं ने सुप्रीम कोर्ट के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इसे एक बड़ी जीत करार दिया। लोगों का मानना है कि इस रोक से उच्च शिक्षण संस्थानों में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनी रहेगी।

इस मामले की अगली सुनवाई अब 19 मार्च को तय की गई है। तब तक के लिए देश भर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पुराने दिशा-निर्देशों के तहत ही कार्य होगा। नवादा के सवर्ण समाज ने संकल्प लिया है कि वे संवैधानिक दायरे में रहकर अपनी आवाज उठाते रहेंगे ताकि भविष्य में भी समान अवसरों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।

Report - aman sinha