विधान परिषद में नीरज कुमार–अब्दुल बारी सिद्दीकी के बीच नोकझोंक, शिक्षा और खाद्य सुरक्षा पर खूब हुई बहस
अब्दुल बारी सिद्दीकी ने तंज कसते हुए कहा कि “नीरज जी, हम लोग तो चाहते हैं कि आप मंत्री बन जाइए। इस पर जदयू के नीरज ने उन्हें करारा जवाब दिया.
Bihar Vidhan Sabha : बिहार विधान परिषद में शुक्रवार को शिक्षा से जुड़े एक मुद्दे पर चर्चा के दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच हल्की नोकझोंक देखने को मिली। यह नोकझोंक जदयू एमएलसी नीरज कुमार और राजद एमएलसी अब्दुल बारी सिद्दीकी के बीच हुई। दरअसल, विपक्ष की ओर से शिक्षा विभाग को लेकर सरकार पर सवाल उठाए जा रहे थे। इसी दौरान जवाब देने के लिए नीरज कुमार खड़े हुए। इससे पहले अब्दुल बारी सिद्दीकी ने तंज कसते हुए कहा कि “नीरज जी, हम लोग तो चाहते हैं कि आप मंत्री बन जाइए। बिना मंत्री बने ही आप बार-बार खड़े होकर सरकार की ओर से बोलने लगते हैं।”
इस पर नीरज कुमार ने पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें मंत्री बनने की कोई इच्छा नहीं है, लेकिन विपक्ष सरकार की उपलब्धियों को सामने नहीं रख रहा है, इसलिए वे उन्हें गिनाने के लिए खड़े होते हैं। इसी बात को लेकर दोनों नेताओं के बीच कुछ देर तक नोकझोंक होती रही।
इसी चर्चा के दौरान माले एमएलसी शशि यादव ने शिक्षा व्यवस्था पर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि शिक्षा के लिए बजट में लगभग 20 प्रतिशत राशि का प्रावधान है, जो सबसे बड़ा बजट है, लेकिन इसके बावजूद बिहार शिक्षा के मामले में देश में सबसे निचले पायदान पर है। उन्होंने सरकार से कहा कि बार-बार सिर्फ 2005 से पहले की स्थिति दोहराने के बजाय अपनी मौजूदा नाकामियों पर सदन में जवाब दे।
शशि यादव ने मांग की कि कॉमर्स की पढ़ाई को और मजबूत किया जाए, पटना विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिले और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की तर्ज पर बिहार में भी बड़े केंद्रीय शैक्षणिक संस्थान स्थापित किए जाएं, ताकि राज्य के छात्रों को पढ़ाई के लिए बाहर न जाना पड़े। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग में कई कमियां हैं, अनेक कॉलेजों में प्रोफेसरों की भारी कमी है और पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय में SC, ST और महिला छात्रों को मिलने वाली छूट में भी अब धांधली हो रही है तथा छात्रों से अवैध वसूली की जा रही है।
वहीं, सदन में खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग से जुड़ा मामला भी उठा। राजद एमएलसी उर्मिला ठाकुर ने कहा कि दूध, दही, मिठाई सहित रोजमर्रा के खाद्य उत्पादों में खुलेआम मिलावट की जा रही है। इससे लोग लगातार बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं, लेकिन सरकार इस गंभीर समस्या पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रही है। उन्होंने सरकार से खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की मांग की।
विधान परिषद की कार्यवाही के दौरान शिक्षा और खाद्य सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर हुई इस बहस में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी तकरार के साथ-साथ तंज और व्यंग्य भी देखने को मिला।
वंदना की रिपोर्ट