Bihar Politics: 2005 में मैं सरकार में आया… जहां तक मुझसे हो सका, मैंने किया…20 साल का सफर खत्म! आज हीं CM आवास छोड़ेंगे नीतीश कुमार, सर्कुलर रोड होगा विकास पुरुष का नया पता

Bihar Politics: पटना की सियासत इस वक्त जज़्बात और जोरदार राजनीतिक हलचल के दौर से गुजर रही है। बिहार में नई सरकार के गठन से ठीक पहले नीतीश कुमार ने अपनी आखिरी कैबिनेट बैठक लेकर एक लंबे सियासी सफर को अलविदा कह दिया है।

Bihar Politics:  2005 में मैं सरकार में आया… जहां तक मुझसे ह
विदाई के आंसू, सत्ता का ट्रांसफर- फोटो : social Media

Bihar Politics: पटना की सियासत इस वक्त जज़्बात और जोरदार राजनीतिक हलचल के दौर से गुजर रही है। बिहार में नई सरकार के गठन से ठीक पहले नीतीश कुमार ने अपनी आखिरी कैबिनेट बैठक लेकर एक लंबे सियासी सफर को अलविदा कह दिया है।

इस्तीफे के बाद अब उनका ठिकाना भी बदलने जा रहा है। 1 अर्णे मार्ग स्थित मुख्यमंत्री आवास छोड़कर वह 7 सर्कुलर रोड के नए पते पर शिफ्ट होंगे। बताया जा रहा है कि उनका सामान पहले ही नए आवास पर पहुंच चुका है यानी सत्ता के साथ-साथ निजी जिंदगी में भी बड़ा बदलाव शुरू हो चुका है।

कैबिनेट बैठक के बाद जो मंज़र सामने आया, वह किसी सियासी स्क्रिप्ट से कम नहीं था। नीतीश कुमार ने एक-एक मंत्री और अधिकारी से मुलाकात की, विदाई ली और पूरा मंत्रिमंडल उन्हें पोर्टिको तक छोड़ने आया। यह पल इतना भावुक था कि हर चेहरा कुछ कहता नजर आया कहीं गर्व, कहीं ग़म, तो कहीं सम्मान की झलक।

अपने संक्षिप्त मगर असरदार संबोधन में नीतीश कुमार ने कहा-“2005 में मैं सरकार में आया… जहां तक मुझसे हो सका, मैंने किया… नई सरकार को मेरा मार्गदर्शन मिलता रहेगा।” इस बयान ने माहौल को और भी नम कर दिया, मानो एक युग अपने अंत की ओर बढ़ रहा हो, लेकिन अनुभव की विरासत पीछे छोड़ रहा हो।

उधर सियासी बिसात तेजी से बदल रही है। जदयू ने अपनी विधानमंडल दल की बैठक रद्द कर दी है, जो गठबंधन के भीतर बदलते समीकरणों की तरफ साफ इशारा करता है। अब सबकी निगाहें एनडीए की बैठक पर टिकी हैं, जहां बिहार के नए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लग सकती है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंच सकते हैं। सूत्रों के हवाले से यह भी कहा जा रहा है कि बुधवार को वे शपथ ले सकते हैं। वहीं जदयू कोटे से निशांत कुमार और विजय चौधरी के मंत्री पद की शपथ लेने की संभावना जताई जा रही है।

कुल मिलाकर, बिहार इस वक्त एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है जहां एक तरफ ‘विकास पुरुष’ की भावुक विदाई है, तो दूसरी तरफ नए नेतृत्व की सियासी पटकथा लिखी जा रही है। अब बस इंतजार उस ऐलान का है, जो तय करेगा कि बिहार की सत्ता की कमान अगले पांच साल किसके हाथों में होगी।