Bihar News : भोजपुर में आबकारी पुलिस हिरासत से गायब दलित युवक का नहीं मिला सुराग, पटना हाईकोर्ट ने CBI को सौंपी जांच
Bihar News : पटना हाईकोर्ट ने भोजपुर जिले में आबकारी पुलिस की कस्टडी से दलित युवक के रहस्यमयी तरीके से गायब होने के मामले पर बेहद सख्त रुख अपनाया है। इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गयी है.....पढ़िए आगे
PATNA : पटना हाईकोर्ट ने बिहार के भोजपुर जिले में आबकारी पुलिस की कस्टडी से 31 वर्षीय दलित युवक सनोज कुमार के गायब होने के मामले में सख्त कदम उठाया है। घटना के लगभग एक साल बीत जाने के बाद भी राज्य पुलिस और जांच एजेंसियों द्वारा कोई ठोस नतीजा न निकाले जाने पर कोर्ट ने इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने का आदेश दिया है। जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद और जस्टिस आलोक कुमार सिन्हा की खंडपीठ ने पीड़ित पिता गौरी शंकर राम की याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य पुलिस की निष्पक्षता और कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए। यह मामला 13 अगस्त ,2025 का है, जब बिहिया थाना क्षेत्र के धरहरा मुसहर टोली से सेंट्रिंग मिस्त्री का काम करने वाले सनोज कुमार को आबकारी पुलिस ने पकड़ा था। परिजनों के अनुसार सनोज ने पुलिस हिरासत में रहते हुए फोन कर बताया था कि पुलिसकर्मी उसकी बेरहमी से पिटाई कर रहे हैं, जिसके तुरंत बाद उसका फोन बंद हो गया।
प्रत्यक्षदर्शियों और सीसीटीवी फुटेज से भी यह बात सामने आई थी कि सनोज को घसीटकर पुलिस वाहन में बैठाया गया था। हालांकि, आबकारी पुलिस का दावा था कि युवक चलती गाड़ी से कूदकर भाग गया, जिसे हाईकोर्ट ने पूरी तरह से खारिज कर दिया। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि चूंकि इस मामले में आरोपी आबकारी विभाग और पुलिसकर्मी खुद हैं, इसलिए स्थानीय पुलिस ने जांच को प्रभावित करने और मामले को दबाने का प्रयास किया। कोर्ट ने कहा कि एक पूरी तरह बंद बोलेरो गाड़ी की डिग्गी खोलकर भागने की पुलिसिया कहानी मनगढ़ंत है।
इसके अलावा, आबकारी विभाग के एक अधिकारी द्वारा गायब युवक का मोबाइल कई दिनों तक छिपाकर रखने की बात भी सामने आई है, जिससे सबूत मिटाने के संदेह को बल मिलता है। इस मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पुलिस और आबकारी विभाग की भूमिका पर बेहद कडी टिप्पणियां कीं। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पुलिस विभाग अपने ही अधिकारियों और कर्मचारियों को बचाने के लिए जांच को भटकाने की कोशिश कर रहा है, जिससे कानून-व्यवस्था और पुलिस की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
कोर्ट ने यह भी कहा कि हिरासत में हुई ऐसी बर्बरता और पुलिस द्वारा गढ़ी गई फर्जी कहानियां जनता के विश्वास को पूरी तरह से तोड़ती हैं। हाईकोर्ट ने भोजपुर के पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया है कि वे एक सप्ताह के भीतर केस से जुड़ी सभी डायरी, सबूत और डिजिटल रिकॉर्ड्स सीबीआई को सौंपें। सीबीआई के निदेशक को एक विशेष जांच टीम गठित करने का आदेश दिया गया है, जो इस रहस्यमयी गुमशुदगी या संभावित हत्या के पहलू की गहराई से जांच करेगी। साथ ही, कोर्ट ने पीड़ित परिवार को सुरक्षा प्रदान करने के निर्देश देते हुए सीबीआई को 11 सितंबर, 2026 तक अपनी प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा है।