Bihar News : बिहार में हाईवे पर यात्रियों को मिलेगा शुद्ध तेल और देशी मसालों से तैयार मटन, पूर्णिया से ‘दीदी के ढाबा’ की हुई शुरुआत
Bihar News : बिहार के हाईवे पर अब यात्रियों को देशी मशालों से तैयार मटन मिलेगा. इस योजना में 14 महिलाओं को रोजगार मिल रहा है.......पढ़िए आगे
PATNA : बदलते बिहार और सुरक्षित बिहार की दिशा में एक और प्रेरक पहल सामने आई है। पूर्णिया जिले में महिला बकरीपालकों ने मिलकर राजमार्ग पर “दीदी का ढाबा” शुरू किया है। यहां स्वच्छ वातावरण में देशी मसालों और शुद्ध तेल से तैयार बिहारी स्टाइल मटन परोसा जाएगा। यह पहल महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण उद्यमिता का नया उदाहरण बन रही है। यह पहल स्थानीय किसानों द्वारा संचालित दामगारा महिला बकरी पालक उत्पादक कंपनी के माध्यम से संचालित की जा रही है, जो लगभग 1400 महिला किसानों को जोड़कर बकरी पालन आधारित आजीविका को मजबूत बना रही है। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और बकरी पालन के माध्यम से उनकी आय बढ़ाना है।
राजमार्गों के बढ़ते नेटवर्क के साथ इस पहल को जोड़ते हुए “दीदी का ढाबा” स्थानीय उत्पादों को सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाने का माध्यम बन रहा है। जल्द ही पूरे प्रदेश में 40 से अधिक ढाबों पर बकरी मांस व देशी शुद्ध तेल व मसालों से तैयार बिहारी जायका परोसने की योजना है । इस ढाबे का मुख्य उद्देश्य “स्वच्छ मीट ढाबा” (Clean Meat Dhaba) की अवधारणा को बढ़ावा देना है, जहां आधुनिक स्वच्छता मानकों, बेहतर गुणवत्ता और नई तकनीकों के साथ स्वस्थ बकरी के मांस पर आधारित विभिन्न जायके तैयार किये जा रहे हैं। इस पहल से एक ओर जहां यात्रियों को साफ-सुथरे वातावरण में स्थानीय बिहारी स्वाद का अनुभव मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर बकरी पालक किसानों को अपने पशुओं के लिए बेहतर और स्थायी बाजार उपलब्ध हो रहा है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्थानीय खाद्य उद्योग को भी नई दिशा मिल रही है। दामगारा महिला बकरी पालक उत्पादक कंपनी से जुड़ी विमला देवी जैसी कई महिलाएं बकरी पालन के माध्यम से अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत बना रही हैं। वे न केवल अपने परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं, बल्कि समाज में भी एक नई पहचान बना रही हैं।
लघु पशुपालन के क्षेत्र में दुनिया भर में विभिन्न वैश्विक संस्थाओं के सलाहकार रहे प्रोफेसर संजीव कुमार भी इस प्रयोग से उत्साहित होकर कहते हैं कि प्रदेश में सरकार के स्पष्ट, सार्थक और निर्णायक कदमों से निर्मित माहौल में इस तरह की पहल ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन, फूड इंडस्ट्री और महिला उद्यमिता को एक साथ जोड़कर रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकती है। साथ ही, यह मॉडल बकरी पालन से जुड़े किसानों के लिए मूल्य श्रृंखला (Value Chain) को मजबूत करने का एक प्रभावी उदाहरण बन सकता है।
प्रोफेसर संजीव कुमार का मानना है कि बिहार में अनंत संभावनाए हैं , अगर बिहार में इस प्रयोग को प्रोत्साहन मिला तो ये पशुपालक सम्पूर्ण राज्य की अर्थव्यवस्था में दो हजार करोड़ से अधिक का योगदान कर सकते हैं। ग्रामीण आजीविका, महिला सशक्तिकरण और स्थानीय खाद्य उद्योग को जोड़ने वाला “दीदी का ढाबा” आने वाले समय में बिहार के अन्य हिस्सों के लिए भी एक प्रेरक मॉडल बन सकता है।