सत्ता का जुनून जब हद से बढ़ जाए! गेस्ट हाउस से नंग धडंग चीखती चिल्लाती लड़की वाला काण्ड भी मैनेज हो जाए!
सत्ता और वर्दी के रसूख के आगे दब गई लड़की की चीख? पटना के खजपुरा में JDU नेता के गेस्ट हाउस से आधी रात को बदहवास भागी युवती। आरोप है कि पुलिस और नेता के बेटों को बचाने के लिए खेल शुरू हो चुका है। शास्त्री नगर पुलिस चुप क्यों है?
राजधानी पटना के शास्त्री नगर थाना क्षेत्र अंतर्गत खजपुरा इलाके में 6 और 7 जून की दरमियानी रात एक रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई। स्टेट बैंक कॉलोनी नंबर 2 में स्थित एक सियासी और दबंग रसूखदार के गेस्ट हाउस से अचानक एक युवती बदहवास और बेहद आपत्तिजनक (नंग-धड़ंग) हालत में चीखती-चिल्लाती हुई सड़क पर भागकर आई। रात के सन्नाटे में युवती की कलेजे को चीर देने वाली आवाजें सुनकर आसपास के घरों की लाइटें जल गईं और लोग बालकनी में आ गए। सामने स्थित एक नर्सिंग होम की लाइटों के उजाले में सड़क पर रोती-बिलखती युवती को देखकर स्थानीय लोग सन्न रह गए। इसके बाद पीड़ित युवती ने तुरंत खुद ही डायल 112 पर फोन कर पुलिस को इस खौफनाक घटना की सूचना दी।
पुलिस महकमे में हड़कंप और शुरुआती कानूनी प्रक्रिया
युवती द्वारा गेस्ट हाउस का नाम बताते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया, क्योंकि वह परिसर सत्तारूढ़ दल जदयू (JDU) महानगर से जुड़े एक बेहद दबंग और अति प्रभावशाली नेता का बताया जाता है। सूचना मिलते ही एयरपोर्ट और शास्त्री नगर दोनों थानों की पेट्रोलिंग गाड़ियां ताबड़तोड़ मौके पर पहुंच गईं। चूंकि घटना स्थल जगदेव पथ, पिलर नंबर 7 और सुधा बूथ के सामने का है, इसलिए यह पूरा मामला शास्त्री नगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आया। पुलिस ने शुरुआती तत्परता दिखाते हुए पीड़िता से लिखित आवेदन लिया और वैधानिक प्रक्रिया के तहत सनहा दर्ज कर मामले की जांच शुरू की।

रसूखदारों के नाम आते ही बदलने लगीं 'खाकी और खादी' की चालें
शुरुआती बयानों में पीड़िता ने बताया कि वह 6 जून को अपने एक दोस्त के साथ इस गेस्ट हाउस में आई थी। लेकिन धीरे-धीरे वहां का माहौल बदला और उसके दोस्त ने अपने पांच अन्य साथियों को भी वहां बुला लिया। पीड़िता अपना पूरा बयान दर्ज करा ही रही थी कि अचानक बड़े अधिकारियों और नेताओं के फोन घनघनाने लगे। दरअसल, जिन छह युवकों पर आरोप लग रहे थे, उनमें एक बड़े पुलिस अधिकारी का बेटा और नेता के बेटा समेत शहर के इन रसूखदार परिवारों के 'चश्मों-चिरागों' को बचाने के लिए खाकी और खादी का गठजोड़ सक्रिय हो गया और मामले को रफा-दफा करने का भारी दबाव बनने लगा।
सबूत मिटाने की कवायद और 'तीसरी आंख' का पहरा
रात के सन्नाटे में जो कुछ भी हुआ, उसे दबाने के लिए एक तरफ जहां पीड़िता पर डर और प्रलोभन का ताना-बाना बुना गया, वहीं दूसरी तरफ सबूत मिटाने की कोशिशें भी तेज हो गईं। 7 जून को दिन के उजाले में पुलिस का वाहन दो बार गेस्ट हाउस के ठीक सामने स्थित निजी अस्पताल (नर्सिंग होम) पहुंचा। पुलिस की इस कवायद के पीछे की वजह अस्पताल में लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरे थे, जिसने रात के अंधेरे में सड़क पर हुए इस पूरे घटनाक्रम को रिकॉर्ड कर लिया था। हालांकि, रसूखदारों के दबाव में पुलिस सीसीटीवी फुटेज को कब्जे में लेकर मिटाने की कोशिश में जुटी रही, लेकिन स्थानीय लोगों और मोबाइल कैमरों की उन 'तीसरी आंखों' ने इस पूरे घटनाक्रम और पुलिस की संदिग्ध कार्यप्रणाली को अपनी मेमोरी में सहेज लिया है।

पुलिसिया तंत्र का मौन और न्याय व्यवस्था पर उठते सवाल
इस संवेदनशील मामले को लेकर जब हमने तहकीकात शुरू हुई, तो पुलिस का रवैया पूरी तरह टालमटोल वाला नजर आया। शास्त्री नगर थाना पुलिस ने पहले तो लिखित शिकायत पर सनहा दर्ज होने की बात स्वीकार की, लेकिन फिर पुलिस अधिकारियों ने फोन उठाना बंद कर दिया। वहीं बड़े पुलिस अधिकारियों ने भी इस गंभीर विषय पर पूरी तरह से मौन साध लिया है। सत्ता और वर्दी के रसूख के आगे एक चीखती हुई लड़की के इंसाफ को 'मैनेज' करने का यह प्रयास सीधे तौर पर सूबे की कानून व्यवस्था और पुलिस की विश्वसनीयता पर गंभीर सवालिया निशान खड़े करता है। वही सत्ता के गुरुर का दंभ ,पैसे कि ताकत का नंगा नाच और मिटाए गए सुबूतों से बेबस और लाचार खौफज़दा युवती ने अब मौन साध लिया है! सवाल उठता है क्या यही सुशासन है ?