Patna High Court: अपराध पर हाईकोर्ट का हथौड़ा,पार्क बने नशे के अड्डे, निगम-पुलिस को लगाई कड़ी फटकार
Patna High Court: पटना में सार्वजनिक सुरक्षा, स्वच्छता और नागरिक सुविधाओं को लेकर पटना हाईकोर्ट ने नगर निगम और पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर बेहद सख्त नाराज़गी जाहिर की है। ...
Patna High Court: पटना में सार्वजनिक सुरक्षा, स्वच्छता और नागरिक सुविधाओं को लेकर पटना हाईकोर्ट ने नगर निगम और पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर बेहद सख्त नाराज़गी जाहिर की है। पटना हाईकोर्ट ने नगर निगम की सुस्ती और पुलिस की निष्क्रियता पर कड़ी फटकार लगाते हुए स्थिति सुधारने के लिए सख्त दिशा-निर्देश दिया।पटना के पार्क नशे के अड्डे और कचरे के ढेर में तब्दील होने पर कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई। पटना जिला सुधार समिति की रिट याचिका पर आदेश पारित करते हुए जस्टिस राजीव रॉय ने सार्वजनिक स्वच्छता, नागरिक बुनियादी ढांचे में घोर लापरवाही और असामाजिक गतिविधियों पर पटना नगर निगम और स्थानीय पुलिस प्रशासन पर कड़ी नाराज़गी व्यक्त की।पटना के प्रमुख इलाके अपराध का गढ बन गया हैं।पिछले 7 महीनों में 22 मामलें सामने आये, अपराधियों ने विधि व्यवस्था को चुनौती दी हैं।कोर्ट ने सार्वजनिक स्थानों, विशेष रूप से राजेंद्र नगर स्थित वैशाली गोलंबर (शास्त्री पार्क) में सुरक्षा व्यवस्था के पूरी तरह चरमराने पर गंभीर चिंता जताई। ये आमजनों के सुरक्षा सम्बन्धित मामला हैं।इसे किसी भी तरह से नजरअंदाज नहीं किया जा सकता हैं।
कदमकुआं थाने के थाना प्रभारी द्वारा दायर आधिकारिक हलफनामे से खुलासा हुआ कि 1 जनवरी से 31 जुलाई ,2026 के बीच 22 इस प्रकार के आपराधिक मामले दर्ज किए गए।इन दर्ज मामलों में छीना-झपटी (चेन-स्नैचिंग) के 3 मामलें, वाहन चोरी (मोटरसाइकिल/ई-रिक्शा) के 3 मामलें, एनडीपीएस (मादक पदार्थ) अधिनियम के तहत 8 मामलें और उत्पाद अधिनियम (शराबबंदी उल्लंघन) के तहत 8 मामलें शामिल हैं।इससे स्पष्ट हैं कि स्थिति किस तरह की भयावह हो गई हैं,जिसमें आमलोगों शहर में रहना मुश्किल हो गया हैं।ये तो वे आंकडे हैं,जिनमें एफआईआर दर्ज हुआ हैं।लेकिन अधिकतर मामलों में न तो लोग एफआईआर लिखाने जाते हैं, न ही पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज किये जाते हैं।
नाबालिगों पर भी खतरा मंडराते रहता हैं।कोर्ट ने रेखांकित किया कि रात के समय स्थानीय पार्कों में असामाजिक तत्वों, खुले में शराब पीने वालों और ड्रग तस्करों का कब्जा हो गया है। यह अनियंत्रित नशाखोरी स्थानीय युवाओं और स्कूली छात्रों के लिए सीधा खतरा बन गई है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि पुलिस की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। थाना प्रभारी के पास ठोस कार्ययोजना न होने पर नाराजगी जताते हुए कोर्ट ने पटना नगर निगम के सहयोग से 24x7 सीसीटीवी निगरानी और पर्याप्त स्ट्रीट लाइट लगाने का व्यापक ब्लू प्रिंट तैयार करने का निर्देश दिया।
इन सारी व्यवस्था का होना आवश्यक हैं। स्ट्रीट लाइट नहीं होने पर जहां नागरिकों की सुरक्षा और आने जाने में कठिनाई होती हैं,वहां असामाजिक और अपराधिक तत्वों की सक्रियता काफी बढ़ जाती है। अंततः इसका खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पडता है। कोर्ट ने सख्त चेतावनी दी कि वैशाली गोलंबर के आसपास अपराध रोकने में विफल रहने पर थाना प्रभारी को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए कड़े आदेश दिए जाएंगे।इसके लिए उनकी सीधे जिम्मेदार माना जाएगा।
कोर्ट ने पर्यावरण और स्वच्छता का संकट पर भी कडी टिप्पणी की।खुले में शौचालय और जहरीला जलजमावअनुच्छेद 21 के तहत स्वास्थ्य और स्वच्छ पर्यावरण के संवैधानिक अधिकारों की अनदेखी करने पर हाईकोर्ट ने पटना नगर निगम को फटकार लगाई।
सार्वजनिक गंदगी के बीच छात्राओं को काफी कठिनाई होती हैं।वैशाली गोलंबर के पास स्थित एक खुला सार्वजनिक शौचालय—जो रवींद्र बालिका विद्यालय की छात्राओं के दैनिक रास्ते में पड़ता है—कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद नहीं हटाया गया है।वरीय अधिवक्ता अजय ने बताया कि वैशाली गोलंबर व उसके आसपास बड़े पैमाने पर अतिक्रमण और गंदगी हैं।
उन्होंने कोर्ट को बताया कि स्थिति में कोई सुधार तो नहीं हुआ, बल्कि और भी स्थिति बिगड़ी ही हैं।तीन वकीलों की टीम सर शिवसागर रामगुलाम पार्क और सुभाष पार्क का निरीक्षण किया।इसमें वरीय अधिवक्ता प्रसून सिन्हा, संतोष कुमार सिंह और कुमार पंकज शामिल थे।उन्होंने अपने रिपोर्ट में सुधार के सम्बन्ध सुझाव दिए।
पटना के पार्को में अतिक्रमण और मलबा की भीषण समस्या पर भी कोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया। पार्क को घेरने वाली पटना नगर निगम की चार इमारतों सहित सार्वजनिक जमीनों पर अनधिकृत ढांचों व नर्सरी का अवैध कब्जा है। इसके साथ ही साइट पर मलबे और बिजली के सामान का कचरा फेंका हुआ है।निरीक्षण रिपोर्ट ने अक्षम अधिकारियों और कोर्ट को गुमराह करने की पोल भी खोली।न्यू कैपिटल सर्किल (पटना) के कार्यपालक अधिकारी द्वारा जमा किए गए हलफनामों में पार्कों के नियमित रखरखाव का दावा किया गया था, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। जमीनी हकीकत छिपाने के दावों को आंखों में धूल झोंकना बताते हुए अदालत ने सर शिव सागर राम गुलाम पार्क के औचक निरीक्षण रिपोर्ट का हवाला दिया।इसमें वहां की स्थिति के सम्बन्ध कोर्ट को विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत किया गया।कोर्ट ने अगली सुनवाई में पटना नगर निगम के चीफ टाउन इंजीनियर, कदमकुंआ पुलिस स्टेशन के थानाध्यक्ष, बांकीपुर सर्किल के कार्यपालक पदाधिकारी,न्यू कैपिटल सर्किल के कार्यपालक पदाधिकारी ने तलब किया है।
साथ ही बांकीपुर सर्किल के कार्यपालक पदाधिकारी को ये बताना होगा के वैशाली गोलंबर के आसपास के अतिक्रमण को क्यों नहीं हटाया गया।खुले शौचालय और पेशाबघर को कोर्ट का स्पष्ट निर्देश के बाद भी क्यों नही हटाया गया।इस मामलें पर अगली सुनवाई 9 अक्टूबर, 2026 को की जायेगी।