Patna Police: पटना ट्रैफिक के हीरो अनिल कुमार को मिला एक साल का एक्सटेंशन, रिटायरमेंट के बाद भी यातायात डीएसपी पर सरकार का बड़ा भरोसा
Patna Police: बिहार सरकार ने ट्रैफिक डीएसपी अनिल कुमार के अनुभव, काबिलियत और शानदार कार्यशैली पर एक बार फिर भरोसा जताते हुए उन्हें 31 मई 2026 के बाद एक वर्ष का सेवा विस्तार देने की मंजूरी दे दी है।...
Patna Police: बिहार की सियासत और प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों एक नाम ज़ोरदार चर्चा में है पटना ट्रैफिक डीएसपी अनिल कुमार। बिहार सरकार ने उनके अनुभव, काबिलियत और शानदार कार्यशैली पर एक बार फिर भरोसा जताते हुए उन्हें 31 मई 2026 के बाद एक वर्ष का सेवा विस्तार देने की मंजूरी दे दी है। सेवानिवृत्ति के बाद संविदा के आधार पर उनकी पुनर्नियुक्ति को प्रशासनिक हलकों में बड़ा फैसला माना जा रहा है।

पटना जैसे भीड़भाड़ वाले शहर में ट्रैफिक व्यवस्था संभालना किसी इम्तिहान से कम नहीं। बेली रोड से लेकर बायपास तक जब भी जाम की खबर आती है, अनिल कुमार खुद मोर्चा संभालते नजर आते हैं। यही वजह है कि आम जनता के बीच उनकी छवि एक सख्त लेकिन जनहितैषी अफसर की बन चुकी है। वे सिर्फ आदेश देने वाले अधिकारी नहीं, बल्कि सड़क पर उतरकर जवानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने वाले अफसर हैं।
उनकी इसी कार्यशैली ने उन्हें दो-दो बार राष्ट्रपति पदक की दहलीज तक पहुंचाया। साल 2015 में उन्हें सराहनीय सेवा के लिए राष्ट्रपति पदक मिला था, जबकि 2025 में विशिष्ट सेवा के लिए फिर उनका नाम चयनित हुआ। यह उपलब्धि किसी भी पुलिस अधिकारी के लिए फख्र की बात मानी जाती है।
जहानाबाद के घोसी थाना क्षेत्र के शेखपुरा गांव में किसान परिवार में जन्मे अनिल कुमार का सफर संघर्ष और मेहनत की मिसाल है। गांव के स्कूल से पढ़ाई करने के बाद उन्होंने पटना यूनिवर्सिटी से उच्च शिक्षा हासिल की। 1994 में सार्जेंट के रूप में पुलिस सेवा में कदम रखने वाले अनिल कुमार ने NSG कमांडो की ट्रेनिंग भी ली और कई अहम जिलों में अपनी सेवाएं दीं।
पटना में ट्रैफिक डीएसपी रहते हुए उन्होंने सड़क सुरक्षा अभियान 2024 में रिकॉर्ड चालान वसूली कर पूरे बिहार में पहला स्थान हासिल किया। डबल हेलमेट अभियान को सफल बनाने में भी उनकी अहम भूमिका रही। इको पार्क रोड चौड़ीकरण और ट्रैफिक सिस्टम में तकनीक के इस्तेमाल जैसे कई फैसलों ने राजधानी की यातायात व्यवस्था को नई दिशा दी।
राजनीतिक गलियारों में अब इस फैसले को गुड गवर्नेंस मॉडल के तौर पर देखा जा रहा है। सरकार का यह संदेश साफ है कि ईमानदारी, मेहनत और जनता के प्रति जवाबदेही रखने वाले अफसरों की अब भी कद्र होती है।
रिपोर्ट- रंजीत कुमार